पंजाबी बाग,ढिगरा पार्क में विराट हिंदू सम्मलेन का आयोजन किया गया। इसमें धार्मिक संगठनों के लोगों ने हिस्सा लिया और अपने विचार रखे।

मंच पर मौजूद अंतराष्ट्रीय हास्य कवि अनिल अग्रहरि ,पांडेय जी,चौहान जी पवन सिंघल मुकेश गर्ग, चंद्रभान गर्ग ,एम के त्रिपाठी (चोटी वाले) सकारनी के चेयरमैन – अशोक गुप्ता ,पुनीत मिश्रा, बसंत भट्ठ, आदि मौजूद रहे।इस अवसर सम्मेलन का शुभारंभ राष्ट्र कवि द्वारा राष्ट्र गान से किया गया । कार्यक्रम के मुख्य भगवान शिव पार्वती जी की झाकियां रही

समाज को एकजुट करने के लिए विराट हिंदू सम्मेलन:
दिल्ली के सभी बस्ती पंजाबी बाग, पटेल नगर वेस्ट,करोल बाग,राजेंद्र नगर आदि स्थानों में आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन में शामिल एम के त्रिपाठी उर्फ चोटी वाले बाबा ने कहा कि वर्तमान समय में सामाजिक-सांस्कृतिक विघटन और मूल्यों के विस्मरण के बीच हिंदू समाज को एकजुट करना ही इस सम्मेलन का मूल उद्देश्य है. सम्मेलन में ये विचार प्रमुखता से रखा गया कि हिंदू समाज की सबसे बड़ी शक्ति उसकी एकता, संस्कार और इतिहास रहा है, जिसे समय-समय पर जागृत करने की आवश्यकता पड़ती है. उन्होंने इस सम्मेलन को किसी एक वर्ग या संगठन तक सीमित न रखते हुए इसे सामाजिक चेतना और सांस्कृतिक जागरण का अभियान बताया.
सम्मेलन में महिलाओं की बड़ी भागीदारी देखने को मिली. महिला एकत्रीकरण के जरिए ये संदेश दिया गया कि समाज की सांस्कृतिक रक्षा और संस्कारों का संवहन मातृशक्ति के बिना संभव नहीं है. इस दौरान डॉ अभिषेक, अमित आजाद, नवीन कानूनगो जैसे राष्ट्रीय कवियों ने अपनी पंक्तियों में कहा कि इतिहास गवाह है कि जब-जब समाज संकट में पड़ा, तब महिलाओं ने संस्कार, साहस और संकल्प के साथ नेतृत्व किया.

सम्मेलन में साहिबजादों फतेह सिंह और जोरावर सिंह के बलिदान, गुरु गोविंद सिंह जी की धर्मरक्षा की परंपरा और छत्रपति शिवाजी महाराज के हिंदू स्वराज, सांस्कृतिक संरक्षण के कार्यों को विशेष रूप से याद किया गया. उन्होंने कहा कि ये केवल इतिहास के पात्र नहीं, बल्कि हिंदू समाज के लिए आज भी प्रेरणा के स्रोत हैं, जिन्होंने अत्याचार के सामने झुकने के बजाय धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए अपने जीवन तक का बलिदान दिया.
सम्मेलन में भजन, श्लोक, शौर्यगाथाएं, लोक-नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भारत की सनातन परंपरा को जीवंत रूप में पेश किया गया. इन प्रस्तुतियों ने युवाओं को इतिहास से जोड़ने और समाज को अपनी जड़ों पर गर्व करने का संदेश दिया. उन्होंने कहा कि विराट हिंदू सम्मेलन के मंच से समाज से आह्वान किया गया कि मत, पंथ और क्षेत्र से ऊपर उठकर हिंदू समाज को एकजुट रहना होगा. एकजुट समाज ही संस्कृति की रक्षा, आने वाली पीढ़ियों को संस्कार देने और राष्ट्र को सशक्त बनाने में सक्षम है.


