हरिद्वार के कनखल में स्थित सती कुंड अत्यंत पवित्र और पौराणिक स्थल है, जो माता सती के आत्मदाह और भगवान शिव की शक्ति से जुड़ा है। यह वह स्थान है जहाँ सती ने अपने पिता राजा दक्ष द्वारा पति शिव का अपमान करने पर यज्ञ कुंड में कूदकर प्राण त्याग दिए थे। यहाँ के पास ही प्रसिद्ध दक्षेश्वर महादेव मंदिर भी स्थित है।उल्लेखनीय मंदिर महिमा के बारे में पंडित जगदीश शर्मा ने बताया कि …

सती कुंड की मुख्य महिमा और महत्व: ऐतिहासिक आत्मदाह स्थल: माना जाता है कि सती कुंड कनखल की वही पावन भूमि है, जहाँ माता सती ने यज्ञ की अग्नि में स्वयं को समर्पित कर दिया था।
शक्तिपीठों की जननी: सती कुंड को माँ सती के आत्मदाह से जुड़ी घटनाओं के कारण शक्तिपीठों का उद्गम स्थल या ‘सती कुंड’ के रूप में पूजा जाता है।
दक्षेश्वर महादेव और सती कुंड: यह स्थान सती के पिता राजा दक्ष प्रजापति द्वारा आयोजित यज्ञ की स्मृति है, जहां पास में ही दक्षेश्वर महादेव मंदिर स्थित है, जहां शिव ने दक्ष को दंडित किया था।
आध्यात्मिक ऊर्जा: कनखल के शांत परिवेश में स्थित यह कुंड भक्तों के लिए एक शांत ध्यान केंद्र है, जहाँ बहुत से लोग आशीर्वाद लेने आते हैं।

विशेष अवसर: महाशिवरात्रि, सावन मास और नवरात्रि के दौरान यहाँ भक्तों की भारी भीड़ लगती है।
सती कुंड का दर्शन करना हरिद्वार की पंचतीर्थ यात्रा का एक अनिवार्य हिस्सा माना जाता है।आज के समय में यहाँ की व्यवस्थापिका रजनी शर्मा के साथ पंडित जगदीश शर्मा,चेतन थरेजा,मानसिका, विन्दु तिवारी आदि उपस्थित रहे तथा सभी को माँ की कृपा की अनुभूति प्राप्त हुई ।

