राष्ट्रातक-यूपी मनकापुर की पावन धरती ने हमेशा प्रेम, सौहार्द और एकता का संदेश दिया है। मैं अपने आपको अत्यंत सौभाग्यशाली मानता हूँ कि मुझे इस धरती की जनता ने न केवल एक जनप्रतिनिधि और केंद्रीय राज्य मंत्री के रूप में, बल्कि अपने राजा के रूप में भी अपार स्नेह, सम्मान और विश्वास से नवाज़ा है।
यह प्रेम कोई आज का नहीं है — यह संबंध कई पीढ़ियों से मनकापुर की परंपरा और संस्कृति में रचा-बसा है। मेरे पूज्य पिता स्वर्गीय कुंवर आनंद सिंह जी, मेरे पूजनीय दादाजी, और उनके भी पूर्वजों के समय से ही मनकापुर की जनता और राज परिवार के बीच यह आत्मीय रिश्ता निरंतर बना हुआ है।

हर वर्ष शारदीय नवरात्र की पूर्णाहुति के पश्चात जब देवी मां की प्रतिमाओं का विसर्जन होता है, उससे पहले मनकापुर की सम्मानित जनता, माँ दुर्गा की प्रतिमा लेकर मेरे आवास मनकापुर कोट आते है जहां पर श्रद्धा के साथ मेरे परिवार के द्वारा नमन किया जाता है। यह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जनता और उनके राजा के बीच के अटूट विश्वास और स्नेह का प्रतीक है।
इसी प्रकार मोहर्रम के अवसर पर मनकापुर के सम्मानित मुस्लिम भाई बहन भी तहज़िया लेकर परंपरानुसार मनकापुर कोट अवश्य आते हैं, श्रद्धा के साथ मेरे परिवार द्वारा नमन किया जाता है। यह परंपरा हमारी सामाजिक एकता और धार्मिक सद्भाव का जीवंत उदाहरण है, जो मनकापुर की पहचान रही है।

इन परंपराओं को देखकर मैं गर्व और भावुकता से भर उठता हूँ। यह केवल इतिहास नहीं, यह वह विरासत है जिसे मेरे पूर्वजों ने अपने आचरण और जनता के प्रति प्रेम से संजोया है। मैं संकल्प लेता हूँ कि इस परंपरा, इस एकता और इस सम्मान की डोर को सदैव सशक्त बनाए रखूँगा।
मैं न केवल एक जनप्रतिनिधि के रूप में, बल्कि मनकापुर के राजा के रूप में भी सदैव अपनी जनता के सुख-दुख में साथ खड़ा रहूँगा।
मनकापुर की जनता का यह स्नेह मेरे लिए सम्मान ही नहीं, बल्कि प्रेरणा है — जनता की सेवा और उनकी भावनाओं के सम्मान का यह संकल्प, पीढ़ियों तक अमर रहेगा।

