भारत सरकार वित्तीय मजबूती और परिचालन क्षमता बढ़ाने के लिए पीएसयू (सार्वजनिक क्षेत्र) बैंकों का विलय कर रही है। 2020 में 10 बैंकों को मिलाकर 4 बड़े बैंक बनाए गए, जिससे सरकारी बैंकों की संख्या 27 से घटकर 12 रह गई। अब सरकार का लक्ष्य 12 बैंकों को और कम करके 6-7 बड़े बैंक बनाना है, जिसके लिए सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और इंडियन ओवरसीज बैंक जैसे छोटे बैंकों का विलय बड़े बैंकों में किया जा सकता है।
पीएसयू बैंकों के विलय के प्रमुख बिंदु (2025-26 के परिप्रेक्ष्य में):
- हालिया स्थिति: सरकार का लक्ष्य अगले कुछ वर्षों में पीएसयू बैंकों की संख्या को और कम करके उन्हें अधिक सक्षम बनाना है।
- संभावित बैंक: इंडियन ओवरसीज बैंक, यूको बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया जैसे छोटे बैंकों का बड़े बैंकों में विलय हो सकता है।
- उद्देश्य: बेहतर प्रबंधन, पूंजी की कमी को दूर करना, ऋण देने की क्षमता बढ़ाना और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने योग्य बैंक तैयार करना।
- विगत विलय (1 अप्रैल 2020):
- ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स और यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया का विलय पंजाब नेशनल बैंक में।
- सिंडिकेट बैंक का विलय केनरा बैंक में।
- इलाहाबाद बैंक का विलय इंडियन बैंक में।
- आंध्रा बैंक और कॉर्पोरेशन बैंक का विलय यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में।
- सरकारी रुख: हालांकि लगातार विलय की चर्चाएं हैं, लेकिन सरकार छोटे बैंकों के निजीकरण का विकल्प भी तलाश रही है।
यह एकीकरण भारतीय बैंकिंग क्षेत्र को अधिक सुदृढ़ और लाभदायक बनाने की रणनीति का हिस्सा है

