नई दिल्ली: देश में महंगाई का दबाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। खाने-पीने की चीजों की कीमतों में तेजी के चलते थोक महंगाई दर पांच महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। इसके साथ ही फुटकर यानी खुदरा महंगाई में भी तेजी दर्ज की गई है। महंगाई में इस बढ़ोतरी ने आम उपभोक्ताओं और कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी है। थोक महंगाई में वृद्धि के पीछे खाद्य वस्तुओं की बढ़ती कीमतों को एक प्रमुख कारण माना जा रहा है। खाने-पीने की चीजें महंगी होने का असर बाजार में वस्तुओं की लागत पर पड़ता है, जिसका प्रभाव आगे चलकर उपभोक्ताओं की जेब पर भी पड़ सकता है। रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं के दाम बढ़ने से घरेलू बजट पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की आशंका है। थोक मूल्य सूचकांक (WPI) उत्पादकों और कारोबारियों के स्तर पर कीमतों में होने वाले बदलाव को दर्शाता है, जबकि खुदरा महंगाई उपभोक्ताओं द्वारा चुकाई जाने वाली कीमतों से जुड़ी होती है। दोनों दरों में तेजी अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण संकेत मानी जाती है। विशेषज्ञों की नजर अब खाद्य वस्तुओं की कीमतों, आपूर्ति की स्थिति और आने वाले महीनों में महंगाई के रुझान पर रहेगी। कीमतों में स्थिरता बनाए रखना सरकार और नीति-निर्माताओं के लिए अहम चुनौती बनी हुई है।
