Rashtratak:- दिल्ली से वृंदावन तक की ‘सनातन एकता पदयात्रा’ निकालने जा रहे बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेन्द्र शास्त्री महाराज ने यात्रा के पूर्व कहा कि उनकी यह यात्रा किसी धर्म के खिलाफ नहीं है। यह ईसाई और मुस्लिम के खिलाफ नहीं है, बल्कि हिंदुओं को जगाने के लिए हैं। यह हिंदुओं की अगली पीढ़ी को बचाने के लिए है कि वह मुस्लिम न बनें। हम जातिवाद में न बंटे। जातिवाद से ऊपर यह राष्ट्रवाद की यात्रा है। उन्होंने समाज के लोगों से तंज किया कि कुछ लोग तिरंगा पर चांद चाहते हैं।

हम चांद पर भारत को चाहते हैं। हिंदू राष्ट्र की परिकल्पना तभी पूर्ण होगी, जब आम जनमानस से यह आवाज आए। देश के लिए कुछ करने का समय है तो समाज के सभी वर्गों को एकजुट होकर धर्म के प्रति समर्पित होना होगा तभी समाज और राष्ट्र का निर्माण संभव है ।

पूज्य सरकार के पावन सानिध्य में दिल्ली से वृंदावन तक आरंभ हुई सनातन एकता पदयात्रा- यह केवल कदमों की चाल नहीं, आस्था और विश्वास की पुकार है, संस्कृति के संरक्षण और सनातन एकता के पुनर्जागरण का महायज्ञ है।
माननीय मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता जी के संग हिंदूवादी मिनिस्टर कपिल मिश्रा जी का इस पवित्र यात्रा में सम्मिलित होना, यह प्रमाण है कि जब शासन और सनातन संस्कार एक पथ पर चलते हैं, तब संस्कृति अमर होती है, और राष्ट्र मजबूत बनता है।

ये होती है हिम्मत !
29 साल का एक युवा संत देश जोड़ने निकले है.
मतलब उस बीमारी से अकेले लड़ने निकले है
जो देश को कैंसर की तरह खा रही है
और जो आतंकवाद और नक्सलवाद से भी ज्यादा घातक है
बीमारी का नाम है – जातिगत द्वेष
डीप स्टेट (देश के दुश्मनों) की एक ऐसी साज़िश जो हज़ारों साल से साथ रह रहे समाज को एक दूसरे का दुश्मन बनाकर भारत को बर्बाद करने के लिए शुरू की गयी है
दुर्भाग्य की बात ये है कि
देश का कोई राजनेता,बुद्धिजीवी,कलाकार इस ज़हर के खिलाफ आवाज़ नहीं उठा रहा
जबकि अगर तुरंत इसे नहीं रोका तो समाज की हर जाति एक दूसरे से लड़कर मर जायेगी
आज से शुरू हो रही यह पदयात्रा 29 साल का वह युवा संत कर रहे है जो गाँव के सरकारी स्कूल में पढ़े है और कुछ साल पहले तक 2 वक्त की रोटी के लिए संघर्ष कर रहा थे।
तो अगर आप इस देश से प्यार करते हैं
और डीप स्टेट की इस देश को बांटने की साज़िश को असफल करना चाहते हैं तो इस यात्रा का समर्थन कीजिये
ताकि हमारी भविष्य की पीढ़िया हंसी ख़ुशी साथ साथ रह सकें
नहीं तो ‘जातिगत द्वेष’ देश का वह नुक्सान करेगा जो हज़ारों साल की गुलामी और दुश्मन देश का छद्म युद्ध भी नहीं कर पाया ।
जिन्हें यह यात्रा असंवैधानिक लगती है
उन्होंने कभी भारतीय संविधान की भावना को नहीं समझा है
संविधान देश को जोड़ने का दस्तावेज है तोड़ने का नहीं ,।
बाकी आज यह यात्रा ‘राष्टगान’ के साथ शुरू हो रही है

