सोशल मीडिया यूजर्स ने एअर इंडिया के केबिन क्रू हैंडबुक के कथित पन्नों के स्क्रीनशॉट वायरल कर दिए, जिनमें केबिन क्रू के लिए शादी का चूड़ा, मंगलसूत्र, बिंदी, सिंदूर, टीका (तिलक) और कलावा जैसी हिंदू परंपरागत चीजें पहनने पर रोक बताई गई है।
नई दिल्ली। लेंसकार्ट के ड्रेस कोड विवाद के महज कुछ दिनों बाद, देश की प्रमुख एयरलाइन एअर इंडिया अब इसी तरह के विवाद में फंस गई है।
सोशल मीडिया यूजर्स ने एअर इंडिया के केबिन क्रू हैंडबुक के कथित पन्नों के स्क्रीनशॉट वायरल कर दिए, जिनमें केबिन क्रू के लिए शादी का चूड़ा, मंगलसूत्र, बिंदी, सिंदूर, टीका (तिलक) और कलावा जैसी हिंदू परंपरागत चीजें पहनने पर रोक बताई गई है।
एक्स पर यूजर प्रणव महाजन ने कई स्क्रीनशॉट शेयर किए, जिनमें लिखा था कि ड्यूटी के दौरान बिंदी, सिंदूर, तिलक और कलावा पहनना मना है। पोस्ट तेजी से वायरल हुई और हजारों यूजर्स ने तीखी प्रतिक्रियाएं दीं।
कई यूजर्स ने सवाल उठाया कि जब मुस्लिम देशों की एयरलाइंस में हिजाब की अनुमति है, तो भारत की राष्ट्रीय एयरलाइन क्यों हिंदू प्रतीकों पर रोक लगा रही है? कुछ ने इसे हिंदू-विरोधी भावना से जोड़ा, जबकि अन्य ने लेंसकार्ट विवाद से तुलना की।
हिजाब, पगड़ी पहन सकते हैं, तिलक, कलावा-सिंदूर बैन विवाद पर लेंसकार्ट के संस्थापक पियूष बंसल ने दी सफाई
एअर इंडिया का स्पष्टीकरण
विवाद बढ़ने पर एअरइंडिया ने सफाई दी है। एयरलाइन का कहना है कि वायरल हो रहे स्क्रीनशॉट पुराने दस्तावेज से लिए गए हैं और वर्तमान में लागू नहीं हैं। प्रवक्ता ने बताया कि कर्मचारियों को बिंदी लगाने की पूरी अनुमति है और कंपनी किसी भी धार्मिक प्रतीक पर रोक नहीं लगाती।
हालांकि, सोशल मीडिया पर यूजर्स अभी भी पुरानी 2022 की ग्रूमिंग गाइडलाइंस का हवाला दे रहे हैं, जिसमें बड़े बिंदी, सिंदूर, कलावा और डिजाइन वाली चूड़ियों पर सख्ती थी।
भारत की प्रमुख ओम्नीचैनल आईवियर (चश्मा) रिटेल चेन लेंसकार्ट ने कंपनी के ड्रेसकोड विवा पर सफाई पेश की है। कंपनी के संस्थापक और सीईओ पियूष बंसल ने 12 घंटे बाद एक्स पर एक और बड़ी पोस्ट साझा करके अपना पक्ष रखा है। कंपनी एक स्टाइल गाइड को लेकर आलोचना का सामना कर रही थी। जिसमें हिजाब-पगड़ी को पहनने की अनुमति दी गई थी लेकिन कलावा, सिंदूर पर रोक लगाई गई थी।
- विवादित पॉलिसी: कंपनी के ‘स्टाइल गाइड’ दस्तावेज़ में स्टोर के कर्मचारियों को तिलक, सिंदूर, बिंदी और कलावा (हाथ में धागा) पहनने से मना किया गया था, जिसे ‘भेदभावपूर्ण’ बताया गया।
- कंपनी की सफाई: विवाद बढ़ने के बाद, लेंसकार्ट ने स्पष्ट किया कि सिंदूर, बिंदी, तिलक और कलावा जैसी आस्था के प्रतीकों का वह पूरा सम्मान करती है और उन्हें अपनी संस्कृति का हिस्सा मानती है।
- नया रुख: कंपनी ने सफाई देते हुए कहा कि वह अपनी ‘इन-स्टोर स्टाइल गाइड’ को मानकीकृत कर रही है और हिंदू संस्कृति के हर प्रतीक (बिंदी, सिंदूर, कलावा) का स्वागत करती है, न कि उन्हें प्रतिबंधित।
- पीयूष बंसल का बयान: लेंसकार्ट के फाउंडर पीयूष बंसल ने इस मामले पर सफाई देते हुए कहा कि विवादित दस्तावेज़ वर्तमान गाइडलाइन को नहीं दर्शाता है।
हिंदू संगठनों ने आरोप लगाया कि कंपनी एक तरफ हिजाब (धार्मिक प्रतीक) को अनुमति दे रही है, लेकिन हिंदू आस्था के प्रतीकों (सिंदूर, बिंदी) पर रोक लगा रही है।
ड्रेस कोड पर Lenskart की सफाई
आईवियर कंपनी लेंसकार्ट के एक अंदरूनी दस्तावेज में ऑफिस के ड्रेस कोड से जुड़े निर्देश दिए गए थे। इस दस्तावेज़ को लेकर तब बड़ा विवाद खड़ा हो गया, जब लोगों ने बताया कि इसमें काम की जगह पर बिंदी और तिलक लगाने की मनाही है, जबकि हिजाब पहनने की इजाजत दी गई है। जैसे-जैसे यह विवाद बढ़ता गया। लेंसकार्ट के फाउंडर और सीईओ पियूष बंसल ने सफाई दी कि यह नीति दस्तावेज गलत था और कंपनी की मौजूदा गाइडलाइंस को नहीं दिखाता था। अपनी पहली सफाई के करीब 12 घंटे बाद बंसल ने X पर एक और पोस्ट में बताया कि वायरल हो रहा दस्तावेज ट्रेनिंग का एक पुराना नोट था। उन्होंने माना कि यह कंपनी की एचआर की नीति नहीं है, और इसमें गलती से बिंदी/तिलक का जिक्र किया गया था, जिसे पहले ही हटा दिया गया था।


