दिल्ली किराड़ी बलजीत विहार शिव मंदिर के पास स्थित मैदान में श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन शुक्रवार को श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह का प्रसंग सुनाया गया। इस व्यास पीठ पर विराजमान कथावाचक आचार्य इंद्रशेखर मिश्र जी
महाराज ने रास के पांच अध्याय का वर्णन किया और आचार्य जी ने कहा कि इस कथा में भगवान कृष्ण दशम स्कंद पाठ और भजन के गाये जाने वाले पंचगीत भागवत के पंच प्राण हैं
और आचार्य जी ने कहा कि इस कथा में भगवान कृष्ण दशम स्कंद पाठ और भजन के गाये जाने वाले पंचगीत भागवत के पंच प्राण हैं जो भी ठाकुरजी के इन पांच गीतों को भाव से गाता है वह भव से पार हो जाता है। भागवत कथा पुराण में यह कहा है कि उन्हें वृंदावन की भक्ति सहज प्राप्त हो जाती है।आचार्य जी ने बताया कि भगवान श्री कृष्ण ने गौ माता की सेवा करते थे और उन्हें चराने के लिए जमुना के किनारे गए, जहां पर कालिया नाग का पूरा अत्याचार रहा उसी के बध के कारण ही भगवान ने अपने सखाओं के साथ मिलकर इस तरह का खेल रचा और कालिया का बध किया ।
कथा में भगवान का मथुरा प्रस्थान, कंस का वध, महर्षि संदीपनी के आश्रम में विद्या ग्रहण करना, कालयवन का वध, उधव गोपी संवाद, ऊधव द्वारा गोपियों को अपना गुरु बनाना, द्वारका की स्थापना एवं रुक्मणी विवाह के प्रसंग का संगीतमय भावपूर्ण पाठ किया गया। इस अवसर पर कथा के दौरान आचार्य ने कहा कि महारास में भगवान श्रीकृष्ण ने बांसुरी बजाकर गोपियों का आह्वान किया और महारास लीला के द्वारा ही जीवात्मा परमात्मा का ही मिलन हुआ। जीव और ब्रह्म के मिलने को ही महारास कहते है।इस अवसर पर क्षेत्र के तमाम गणमान्य में पंडित हरि कुमार त्रिपाठी ,रोहतास पूर्व निगम पार्षद , के पी सिंह, जंग बहादुर सिंह,राम सागर तिवारीनरेंद्र सिंह ,दिनेश दूबे,अभिषेख त्रिपाठी , आदि एवं अन्य भक्त मौजूद रहे।
