दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी की परम कृपा से, दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान(डीजेजेएस) द्वारा नवम्बर 2025 को दिव्यधाम आश्रम, दिल्ली में मासिक आध्यात्मिककार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। हज़ारों शिष्यों द्वारा इस पवित्र समागम मेंईश्वरीय आशीर्वाद की वर्षा का अनुभव किया गया, जिसने सभी के हृदयों कोआध्यात्मिक ऊर्जा और नवीन जीवन से भर दिया। इस कार्यक्रम ने श्रद्धालुओं कोधर्मपरायणता को आत्मसात करने के लिए सफलतापूर्वक प्रेरित किया।
‘दिव्य आध्यात्मिक ज्ञान’ के साथ शाश्वत जीवन जीने के सर्वोच्च संदेश को लेकर श्रीआशुतोष महाराज जी के शिष्य व शिष्याओं ने उन आध्यात्मिक शिक्षाओं केव्यावहारिक अनुप्रयोगों को उजागर किया, जिन्हें आज की आधुनिक जीवनशैली में भीअपनाया जा सकता है। फिर यही प्रयास मनुष्य को एक अद्भुत रूपांतरण की ओरअग्रसर करते हैं। संस्थान के विश्व शांति के सर्वोच्च उद्देश्य को पुनः रेखांकित करतेहुए, अनुयायी शिष्यों को जागरूक किया गया कि आने वाले समय की चुनौतियों कासामना करने हेतु उन्हें अपने धैर्य, विश्वास, संकल्प, अनुशासन और आत्मसंयम को दृढ़बनाना होगा। उन्होंने यह भी बताया कि गुरु के आदेशों का निष्ठापूर्वक पालन औरपूर्ण समर्पण ही वह दिव्य सुरक्षा कवच है जो एक शिष्य को सदैव संरक्षित रखता है, सशक्त बनाता है और जीवन की हर परीक्षा में विजय दिलाता है।

दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी की दिव्य कृपा से प्राप्त ‘ब्रह्मज्ञान’ जोआध्यात्मिक विज्ञान पर आधारित एक अद्वितीय साधना पद्धति है, ने विश्वभर मेंलाखों लोगों के जीवन को रूपांतरित किया है। इसी दिव्य ज्ञान की प्राप्ति हेतु सत्य केजिज्ञासुओं के लिए संस्थान के द्वार सदा खुले हैं। कार्यक्रम में भक्ति गीतों की श्रृंखलातथा गूढ़ प्रवचन सम्मिलित रहे, जिन्होंने सभी को अपनी आध्यात्मिक उपलब्धियों केविभिन्न स्तरों पर स्वयं का आकलन करने के लिए प्रेरित किया। जैसे बाहर दीप जलाने से मार्ग का अंधकार मिटता है और राहगीर को दिशा दिखाई देती है, वैसे ही आत्मा के भीतर दिव्य प्रकाश प्रज्वलित करने से संसार का अंधकार दूर होता है और सभी जीवों में सर्वोच्च शांति व आनंद की स्थापना होती है। दिव्य गुरु द्वारा प्रेरित ऐसीदिव्य प्रेरणाओं से अनेकों शिष्यों को अपने भीतर छिपे भय, संदेह, अशांति औरअसमंजस के स्पष्ट समाधान भी प्राप्त हुए।
समस्त प्राणियों के कल्याण और विश्व शांति की कामना करते हुए, उपस्थित समस्तशिष्यों ने सामूहिक ध्यान में भाग लिया और कार्यक्रम का समापन सामूहिक भंडारे केसाथ किया।
