आचार्य, श्रीकांत तिवारी
प्रयागराज के शंकरगढ़ विकासखंड में, जो क्षेत्र लंबे समय से असिंचित और पानी की कमी से जूझ रहा था, मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप से सिंचाई की नई उम्मीद जगी है।
प्रयागराज। विकास खंड शंकरगढ़ क्षेत्र के किसानों की दशा आज भी बेहद दयनीय है। यहां दर्जनों गांव के किसान आज भी खेती के लिए पानी हेतु तरस रहे हैं। जहां किसानों को खेती-बारी के लिए पूरी तरह से भगवान के पानी पर निर्भर रहना पड़ता है।
बरसात की थोड़ी बहुत फसल छोड़ दें तो रबी की बुवाई और गर्मी की खेती पूरी तरह चौपट हो जाती है। जिन बड़े लोगों के पास निजी नलकूप हैं, वही किसी तरह अपने खेतों में पानी पहुंचा पाते हैं, लेकिन पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण गर्मियों में ट्यूबवेल का पानी भी सूख जाता है। जिसकी वजह से खेत तो दूर पीने के पानी के लिए भी दर-दर की ठोकरे खानी पड़ती हैं। कई सालों से सरकार को टैंकरों के माध्यम से इंसान तक पानी पहुंचना पड़ता हैं। गांव के जानवरों को भी पानी सही तरीके से नहीं मिल पाता इस समस्या पर अगर प्रशासन के साथ-साथ सरकार भी समस्या का पर अमल करें तो कहीं न कहीं इस समस्या से निजात मिल सकता है परंतु संबंधित विभाग के अधिकारियों को जमीनी स्तर पर कार्य करने में कठिनाई महसूस हो रही है। किसानों का कहना है कि शंकरगढ़ का इलाका पहाड़ी होने के कारण बरसात भी अपेक्षाकृत कम होती है। गर्मी आते-आते भूमिगत जलस्तर नीचे खिसक जाता है। नतीजा यह कि निजी नलकूप वाले किसान भी खेतों में सिंचाई नहीं कर पाते। कई गांवों में तो ऐसी स्थिति है कि किसान अपनी जमीन में बीज भी नहीं डाल पाते।
विकासखंड शंकरगढ़ के मिश्रापूर्वा, शिवराजपुर, कपारी, बेनीपुर, बडगड़ी,जनवा, बिहरिया, टकटई, गाढा कटरा, रमना, लखनपुर, बघला आदि ऐसे कई गांव है जहां पर किसान अपना क़ृषि छोड़कर अवैध खनन करने पर मजबूर रहते हैं क्योंकि दो रोटी कमाने के लिए एवं अपने बच्चों का पालन पोषण करने के लिए कुछ न कुछ कार्य करना जरूरी है। यदि इन असिंचित क्षेत्रों में सिंचित की व्यवस्था होती है तो किसान मजदूर अपने जमीनों पर फसल उगा सकते हैं। जिससे उनका जीवन यापन चल सकता है सरकार की उदासीनता कहें, यह विभाग की लापरवाही यह जांच का विषय है कि आखिर इतना सर्वे इतनी व्यवस्था होने के बावजूद भी इस कार्य को प्रगति अभी तक क्यों नहीं हो पा रही है। उत्तर प्रदेश में विकास का डंका बजने के बाबजूद बुंदेलखंड की तरह भूमि व लगा क्षेत्र आज सिंचाई के लिए किसान तरस रहा हैं।
जिलाधिकारी प्रयागराज ने जल संरक्षण में सबसे बड़ी बाधा दूर करने के लिए तीन अधिकारियों एडीएम प्रशासन, उपजिलाधिकारी बारा तथा अधिशाषी अभियंता बाघला नहर प्रखंड प्रयागराज की सयुंक्त रूप स्थलीय निरीक्षण व जाँच हेतु टीम बनायीं हैं। जाँच के दौरान चौकाने वाले तथ्य सामने आए आजादी के 76 वर्ष बाद मालूम चला कि सिंचाई विभाग का तहसील बारा के अंतर्गत 26 बंधियों में सिर्फ टीला हैं शेष अंदर व डूब क्षेत्र की भूमि किसानों के नाम हैं। तब कैसे बरसात का पानी संरक्षण होता,जिनकी जमीन हैं वही किसान फाटक रात में खोल देते थे सब पानी बह जाता रहा हैं। अब पता चला गर्मी के दिनों पानी के एक एक बूंद के लिए हाहाकार क्यों मच रहा था। जाँच रिपोर्ट का इंतजार है।
करोड़ों की स्वीकृति,दो वर्ष बीतने के बाद भी शून्य
ग्रामीणों ने बताया कि सिंचाई के पंप को बदलने एवं मशीनरी सुधारने के लिए सरकार ने करोड़ों रुपये की स्वीकृति भी दी थी।पंडुआ पंप में लगें 9 पंप,540 क्यू सेक पानी देने की क्षमता से घटते घटते लगभग 400 से 430 हो गए थे और भोंड़ी में स्थापित पंप जो 180 क्यू सेक स्थान पर लगभग 100 से 110 क्यू सेक पानी देने के कारण टेल तक पानी नहीं पहुँच पा रहा था,समय से पानी न मिलने से किसानों में हाहाकार था. जिस पर उत्तर प्रदेश सरकार ने पंप व मशीनों के बदलने के लिए लगभग 32 करोड़ रूपये स्वीकृति दिया। लेकिन विभागीय अधिकारियों की लापरवाही के चलते योजना आज भी अधर में लटकी हुई है। ज्ञात हुआ हैं कि पिछले साल एलआईडी विभाग नें 9 करोड़ रुपये शासन को वापस कर दिए।
किसान आरोप लगाते हैं कि अधिकारी कागजों पर तो काम दिखाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत में कोई काम नहीं होता हैं। कहते हैं हमने पम्प बदला हैं तो फिर क्यों लीकेज हैं हल्के-फुल्के काम दिखाकर फाइलें बंद कर दी जाती हैं।
समाजसेवी दिनेश तिवारी ने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर एडीएम स्तर के निगरानी में काम पूर्ण कराने का मांग किया। जिसपर जिलाधिकारी के निर्देश पर एडीएम आपूर्ति जाँच कर रहे हैं। जिलाधिकारी के निर्देश पर विगत दिनों जांच के दौरान जानकारी सामने आया कि संबंधित पार्ट आकर के रखे हैं, पावर स्टेशन में काम लगा हुआ दिख रहा।जून 2026 तक सब पाइप और मशीनरी बदलने का दावा कर रहे हैं और अधिशाषी अभियंता लिफ्ट कैनाल विभाग ने बताया कि अक्टूबर 2026 तक का कार्य संस्था को पंप बदलने की अंतिम डेडलाइन का बांड है। फिलहाल एडीएम आपूर्ति ने जो कार्य तीन साल में क्रमशः करने का हैं वह दो साल बीतने के बाद कार्य प्रगति का अभी तक शून्य बताया हैं।
गांव-गांव जन चौपाल में किसान अपनी पीड़ा की आवाज उठा रहा हैं
अपनी समस्या को जन-जन तक पहुंचाने के लिए क्षेत्र के समाजसेवी दिनेश तिवारी व अन्य ग्रामीण गांव-गांव जाकर जन चौपाल कर रहे हैं। इन चौपालों में किसान एकजुट होकर अपनी पीड़ा सुनाते हैं और समाधान की रणनीति तय करते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक नहर का पानी नहीं पहुंचेगा, खेती-किसानी का भविष्य उज्ज्वल नहीं हो सकता।
ज्ञात हो कि बारा विधानसभा क्षेत्र में नहर सिंचाई की शुरुआत 1972 में पूर्व मुख्यमंत्री हेमवती नंदन बहुगुणा के कार्यकाल में हुई थी। साठ प्रतिशत इलाकों में फर्स्ट स्टेज और सेकंड स्टेज नहर बनाकर किसानों के खेतों में पानी देने का 1982 से शुरू हुआ था। उसके बाद शेष बचें चालीस प्रतिशत असिंचित क्षेत्रों के दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई। पूर्व सांसद डॉ रीता बहुगुणा जोशी ने भी इस योजना को आगे बढ़ाने की कोशिश की हैं।

दिनेश तिवारी ने बताया कि प्रयागराज के सभी जनप्रतिनिधियों सांसद प्रवीण पटेल, पूर्व मंत्री व विधायक सिद्धार्थ नाथ सिंह, महापौर गणेश केसरवानी, विधायक बारा डॉ वाचस्पति, एमएलसी डॉ के.पी. श्रीवास्तव, विधायक ई. हर्षवर्धन बाजपेई तथा इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन अध्यक्ष राकेश पांडेय और भाजपा जिलाध्यक्ष राजेश शुक्ला ने किसानों की पीड़ा को समझकर समाधान कराने के लिए मुख्यमंत्री और सिंचाई मंत्री को पत्र के माध्यम से अवगत करा चुके हैं।
मुख्यमंत्री को मिलकर दिए प्रार्थना पत्र पर सचिव मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश शासन ने असिंचित क्षेत्र में नहर निर्माण हेतु सर्वें एवं डीपीआर बनाने का आदेश दिया हैं, मगर सिंचाई विभाग पानी उपलब्ध नहीं होने की आख्या लिखकर भेज दे रहें हैं जबकि सिंचाई विभाग के अधिकारी मानते हैं किसानों को पानी की आवश्यकता हैं असिंचित क्षेत्र में बहुत बड़ी पानी की समस्या भी हैं।
ई. प्रदीप कुमार सिंह अधिशाषी अभियंता बाघला नहर प्रखंड बताते हैं पंप का नवीनीकरण होने पर पानी की क्षमता बढ़ने से सभी माइनरों के टेल तक सुगमता से किसानों को पानी मिलने लगेगा साथ ही असिंचित इलाकों में कृषि योग्य भूमि को सिंचित करने की परियोजना बन सकती हैं पानी पहुंच सकता हैं। देखना हैं सरकार किसानों की समस्या का समाधान करने के लिए कितना गंभीर हैं। कब किसानों के भाग्य खुलेंगे….
- मुख्य बातें:
- सिंचाई समस्या: शंकरगढ़ के कई गांव असिंचित थे, जिससे खेती केवल बारिश पर निर्भर थी।
- नई आशा: मुख्यमंत्री के आदेशों के बाद प्रशासन की सक्रियता से किसानों को जल्द ही खेतों तक पानी पहुँचने की उम्मीद है।
- विकास की उम्मीद: इस पहल का उद्देश्य, विशेषकर गर्मियों में होने वाली पानी की कमी को दूर करना और कृषि उत्पादन को बढ़ाना है।
