यह एक सर्वाइवल थ्रिलर फिल्म है जो एक मगरमच्छ के एक जोड़े से भरे पूल में कहानी दिखाती है. फिल्म 2018 में आई थाई हौरर फिल्म ‘द पूल’ से प्रेरित है. वैसे तो यह एक लवस्टोरी है लेकिन निर्देशक ने इस में मगरमच्छ वाला जो ट्विस्ट डाला है, उस की कल्पना शायद ही किसी ने की होगी. लव से शुरू हुई यह कहानी एक गहरे खौफ पर खत्म होती है दर्शक सांसें थामे रहते हैं कि आगे क्या होगा. फिल्म का रिव्यू पढ़ने के बाद डरने या घबराने की जरूरत नहीं है. वैलेंटाइन वीक प्यार की फुहार वाली यह फिल्म एक बार देखी जा सकती है.
बौलीवुड में सर्वाइवल थ्रिलर फिल्में कम ही बनी हैं. टाइटल देख कर और शनाया कपूर का नाम पढ़ कर दर्शकों ने एक रैगुलर लवस्टोरी की उम्मीद की थी, मगर निर्देशक ने रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी डाल कर दर्शकों की धारणा को बदल डाला है. इस फिल्म को देखते वक्त ज्यादा लौजिक ढूंढ़ने की कोशिश न करें. ढाई घंटे की यह फिल्म आप के धैर्य की परीक्षा लेती नजर आती है.
फिल्म की कहानी मुंबई में रहने वाली सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर अवनि शाह उर्फ मिस वैनिटी ( शनाया कपूर) और नालासोपारा के युवा मारुति कदम उर्फ फ्लोपारा (आदर्श गौरव) के इर्दगिर्द बुनी गई है. सोशल मीडिया के लिए रील्स बनाते वक्त दोनों करीब आते हैं और एकदूसरे से प्यार करने लगते हैं. अवनि के 20 लाख फॉलोअर्स हैं जबकि मारुति आर्थिक तंगी से गुजर रहा है. उस के फौलोअर्स भी ज्यादा नहीं हैं.
हालात से तंग आ कर दोनों गोवा जाने का फैसला करते हैं. रास्ते में उन की मोटरसाइकिल खराब हो जाती है और एक सुनसान जगह में बंद पड़े स्कूबा डाइविंग सैंटर में डाइविंग करते हैं. यहीं से कहानी में ट्विस्ट आता है दोनों लगभग एक 20 फुट गहरे स्विमिंग पूल में ज्यादा फंस जाते हैं पूल में ज्यादा पानी नहीं है और बाहर निकलने का रास्ता भी नहीं है. अचानक एक मगरमच्छ उस पूल में घुस आता है. उन की जान पर बन आती है.
इस के बाद पूरी फिल्म सर्वाइवल थ्रिलर में बदल जाती है मगरमच्छ के साथ फंसी अवनि और मारुति अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष करते हैं. मगरमच्छ का सामना करते हुए उन का कुत्ता मारा जाता है और मदद के लिए आया इंस्पैक्टर भी मगरमच्छ का शिकार बनता है. अवनि एक मगरमच्छ को गोली मार देती है मगरमच्छ के काटने से घायल मारुति तैरने में असमर्थ हो जाता है लेकिन अवनि उसे तैर कर पूल से बाहर निकलने में मदद करती है आखिरकार दोनों बच जाते हैं।
फिल्म में रोमांचक सीन दर्शकों को निश्चित रूप से भयभीत कर देते हैं।
थाई फिल्म ‘द पूल’ से प्रेरित इस फिल्म की कहानी में निर्देशक ने टेंशन बनाए रखी है. फिल्म सैकंड हाफ में कई जगह सांसें थामने पर मजबूर कर देती है. अवनि और मारुति का रोमांस लंबा लगता है. फिर भी तकनीकी रूप में फिल्म काफी मजबूत है.

मध्यांतर के बाद के संवाद कसावट लिए हैं. मगरमच्छ के साथ टकराव वाले दृश्य रोमांच पैदा करते हैं. पटकथा में कुछ तार्किक कमियां हैं. मोबाइल का पानी में तैरना और उस की घंटी बजना अविश्वसनीय लगता है. मगरमच्छ फिल्म का अहम हिस्सा है, मगर यह पहचान पाना मुश्किल लगता है कि वह असली है या नकली.
अभिनय की दृष्टि से आदर्श गौरव और शनाया कपूर ने पूरी फिल्म को संभाले रखा है. शनाया कपूर इन्फ्लुएंसर के रूप में आत्मविश्वासी नजर आती है. यह उस की दूसरी फिल्म है. अन्य कलाकार अपनी अपनी भूमिकाओं में फिट हैं. बीचबीच में फिल्म की रफ्तार धीमी पड़ जाती है. कुछ सीन दोहराव लिए हैं. सस्पेंस को लंबा खींचा गया लगता है.
फिल्म की सिनेमेटोग्राफी शानदार है. वीएफ एक्स और मगरमच्छ को क्रिएट करने वाले तकनीकी कलाकारों का काम अच्छा है. बैकग्राउंड म्यूजिक भी अच्छा है जो ‘आंखें चार…’ या ‘तुम ही प्यारी मंजिल हो माई लव…’ गीतों को गुनगुनाने का काम करता है. फिल्म का निर्देशन ठीकठाक है. संपादन में और ज्यादा कसावट होती, तो अच्छा था.

