रामराज्य में अपराध की सजा इतनी कठोर थी कि भ्रष्टाचार और चोरी की संभावना ही समाप्त हो गई थी. राम के राज्य में चोरी से भी ज्यादा गंभीर बात भ्रष्टाचार करना माना जाता था. चोरी करने वालों से कड़ाई से पेश आया जाता था.
आखिर जब भगवान राम राजा थे और अयोध्या में शासन करते थे तो उनके राज्य में चोरी करने वालों से कैसे निपटा जाता था. भ्रष्टाचारियों से कैसे पेश आया जाता था. हमारे शास्त्रों में भी इसे लेकर क्या कहा और लिखा गया है.
मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के राज्य में न्याय व्यवस्था, दंड नीति और शासन व्यवस्था का मुख्य आधार वाल्मीकि रामायण और रामचरितमानस जैसे ग्रंथों में मिलता है. रामराज्य को एक आदर्श शासन माना गया है, जहां अपराध नहीं के बराबर थे.
रामायण के ‘उत्तरकांड’ और ‘अयोध्याकांड’ में बताई गई दंड नीति के अनुसार, राम के राज्य में चोरी और भ्रष्टाचार करने वालों के लिए बहुत कड़े और स्पष्ट नियम थे.
चोरी के लिए दंड
रामराज्य में चोरी को एक गंभीर सामाजिक और नैतिक अपराध माना जाता था. छोटे स्तर की चोरी के लिए संपत्ति की जब्ती, भारी जुर्माना या कोड़े मारने की सजा दी जाती थी. यदि कोई व्यक्ति बार-बार चोरी करता या किसी के जीवनयापन का मुख्य साधन को चुराता था, जैसे किसी किसान के बैल या गरीब की आजीविका तो उसे अंग-भंग या देश निकाला की सजा दी जाती थी.
उल्लेखनीय विचारो को व्यक्त करते हुए
हल्दीराम ग्रुप के चेयरमैन मधुसूदन अग्रवाल ने बताया कि…

“ रामराज्य में चोरी को एक गंभीर सामाजिक और नैतिक अपराध माना जाता था. छोटे स्तर की चोरी के लिए संपत्ति की जब्ती, भारी जुर्माना या कोड़े मारने की सजा दी जाती थी.” यदि कोई व्यक्ति बार-बार चोरी करता या किसी के जीवनयापन का मुख्य साधन को चुराता था, जैसे किसी किसान के बैल या गरीब की आजीविका तो उसे अंग-भंग या देश निकाला की सजा दी जाती थी.
वाल्मीकि रामायण और रामचरितमानस के अनुसार, इस राज्य में सभी प्रजाजन सुखी थे, भेदभाव का नामोनिशान नहीं था और किसी को भी शारीरिक या मानसिक पीड़ा नहीं थी।
राम राज्य की प्रमुख विशेषताएं
- समानता और प्रेम: समाज में कोई ऊंच-नीच नहीं थी। सभी लोग अपने वर्ण और धर्म के अनुसार कर्तव्यों का पालन करते थे।
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- अपराध और भयमुक्त समाज: राज्य चोरी, डकैती और हिंसा से मुक्त था। किसी भी नागरिक को किसी प्रकार का भय या शोक नहीं था।
- प्रजा-वत्सल राजा: राजा भगवान राम का जीवन प्रजा के कल्याण और मर्यादा पर आधारित था। राज्य का संचालन धर्म के अनुसार होता था और दंड व्यवस्था बहुत निष्पक्ष थी।
- पर्यावरण और प्रकृति: राम राज्य में प्रकृति पूरी तरह संतुलित थी। मौसम समय पर आते थे, धरती धन-धान्य से परिपूर्ण थी और पशु-पक्षी भी अपनी प्राकृतिक शत्रुता भूलकर एक साथ रहते थे।
इस शासन व्यवस्था को ‘कल्याणकारी राज्य’ (Welfare State) का सबसे उत्तम रूप माना जाता है, जिसकी कल्पना महात्मा गांधी ने भी स्वतंत्रता के बाद स्वतंत्र भारत के लिए की थी।

उल्लेखनीय विचारो को व्यक्त करते हुए