पानी, जंगल और जमीन प्रकृति की अमूल्य धरोहर हैं। मानव जीवन और पर्यावरण का संतुलन इन्हीं पर निर्भर करता है। यदि इन प्राकृतिक संसाधनों का सही संरक्षण नहीं किया गया, तो भविष्य में अनेक गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
पर्यावरण के प्रति जागरूक रहना जरूरी है क्योंकि इससे प्रदूषण रूपी दानव को बड़ने से बचाया जा सकता है ।प्राकृतिक संसाधनों को संरक्षित करने और पर्यावरण समस्याओं के समाधान के लिए

बीटीडब्लू के चेयरमैन सती राम यादव ने बताया कि…
पानी जीवन का आधार है। इसके बिना किसी भी जीव का अस्तित्व संभव नहीं है। आज बढ़ती जनसंख्या और पानी की बर्बादी के कारण कई क्षेत्रों में जल संकट उत्पन्न हो रहा है। इसलिए हमें पानी का उपयोग सोच-समझकर करना चाहिए और वर्षा जल संचयन जैसी विधियों को अपनाना चाहिए।
“जंगल पर्यावरण को संतुलित बनाए रखनेमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।पेड़-पौधे हमें ऑक्सीजन प्रदान करते हैं, वायु को शुद्ध करते हैं और वन्य जीवों को आश्रय देते हैं। लेकिन लगातार हो रही कटाई के कारण जंगलों का क्षेत्र कम होता जा रहा है। इस समस्या को रोकने के लिए अधिक से अधिक वृक्षारोपण करना और वनों की रक्षा करना आवश्यक है।”
जमीन भी हमारे जीवन का महत्वपूर्ण आधार है। कृषि, आवास और अनेक अन्य आवश्यकताएँ जमीन पर ही निर्भर करती हैं। अत्यधिक रासायनिक पदार्थों के उपयोग, प्रदूषण और मिट्टी के कटाव से भूमि की उर्वरता कम होती जा रही है। इसलिए भूमि का संरक्षण करना और उसके संसाधनों का संतुलित उपयोग करना बहुत आवश्यक है।श्री यादव ने कहा कि इस समय पर्यावरण मंत्रालय द्वारा पर्यावरण संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा हैं ताकि पर्यावरण के प्रति जागरूकता लाई जा सके और लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रेरित किया जा सकें ।
उन्होंने केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव जी को धन्यवाद देते हुए कहा कि इस दिशा में सरकार की ओर से जो सार्थक प्रयास किया जा रहा है वह सराहनीय कार्य है लेकिन
- जल , जंगल और जमीन का संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। यदि हम आज इन संसाधनों की रक्षा करेंगे, तो आने वाली पीढ़ियों को भी स्वच्छ पर्यावरण और बेहतर जीवन प्राप्त होगा।

