– प्रतिष्ठा संस्था द्वारा चौ ब्रह्म प्रकाश आयुर्वेदिक कॉलेज में, आयुष मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (NMPB) के सहयोग से अश्वगंधा राष्ट्रीय जागरूकता अभियान का सफल आयोजन किया गया।”
इस कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों, विद्यार्थियों और समाज में अश्वगंधा की औषधीय, स्वास्थ्यवर्धक एवं आर्थिक महत्व के प्रति जागरूकता फैलाना था। कुल 178 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें 42 किसान, 158 विद्यार्थी, प्रतिष्ठा संस्था के 8 सदस्य और कॉलेज के 8 सदस्य सम्मिलित थे।
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और भगवान धन्वंतरि वंदना से हुई। इसके पश्चात प्रतिष्ठा संस्था की अध्यक्ष सुश्री सोहिनी रोहिल्ला ने संस्था के उद्देश्यों और गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि “अश्वगंधा केवल स्वास्थ्य का आधार नहीं, बल्कि समाज के लिए समृद्धि और आत्मनिर्भरता का माध्यम भी है। आज इसकी बढ़ती बाज़ार मांग किसानों और युवाओं के लिए नए अवसर खोल रही है।”अश्वगंधा जैसे औषधीय पौधे हमारे लिए न केवल औषधि हैं बल्कि किसानों की आजीविका के सशक्त साधन भी हैं।
“कार्यक्रम के विशेष अतिथि प्रो. (डॉ.) एम. बी. गौर, निदेशक एवं प्राचार्य, चौ. ब्रह्म प्रकाश आयुर्वेद संस्थान को प्रतिष्ठा संस्था की अध्यक्षा सुश्री सोहिनी रोहिल्ला एवं संस्था के ट्रस्टी श्री विनोद नागर द्वारा शॉल उढ़ाकर, मोमेंटो, पुष्पगुच्छ भेंट कर एवं अश्वगंधा पौधा प्रदान कर सम्मानित किया गया।

अपने आशीर्वचन में विशेष अतिथि प्रो. (डॉ.) एम. बी. गौर, जी ने कहा कि “इस राष्ट्रीय जागरूकता अभियान में भाग लेकर मुझे प्रसन्नता हुई। हमें अपने देश को आयुर्वेद की ओर अग्रसर कर स्वास्थ्य व समृद्धि की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।”ऐसे आयोजनों से छात्रों, किसानों और शोधकर्ताओं को एक साझा मंचौ . मिलता है, जहाँ ज्ञान, अनुभव और नवीन अवसरों का आदान–प्रदान होता है। मुझे आशा है कि इस प्रकार के अभियान भविष्य में भी निरंतर आयोजित होते रहेंगे और भारत को आयुर्वेदिक औषधियों के क्षेत्र में वैश्विक पहचान दिलाएँगे।”इसके उपरांत कार्यक्रम को निर्धारित क्रम के अनुसार आगे बढ़ाया गया।”।
“कार्यक्रम के दौरान अश्वगंधा पर आधारित एक जानकारीपूर्ण ब्रोशर का भी लोकार्पण किया गया, जिसमें इसकी औषधीय महत्व, खेती की संभावनाएँ तथा बाज़ार में बढ़ती माँग से जुड़े पहलुओं को दर्शाया गया।”
“कार्यक्रम में सभी मुख्य वक्ताओं को प्रतिष्ठा संस्था की ओर से मोमेंटो प्रदान कर, शॉल ओढ़ाकर, अश्वगंधा किट एवं अश्वगंधा पौधा देकर सम्मानित किया गया। यह सम्मान संस्था द्वारा आयुर्वेद और औषधीय पौधों की दिशा में उनके योगदान और मार्गदर्शन के प्रति आभार स्वरूप अर्पित किया गया।”
व् इसी के साथ टेक्निकल सेशन को आगे बढ़ाया गया जिसमेआये हुए गेस्ट स्पीकर्स ने एक एक करके अश्वगंधा के सभीपहलुओं पर प्रकाश डाला
कार्यक्रम के मुख्य वक्ताओं में—

डॉ. सुभाष साहू, विभागाध्यक्ष, द्रव्यगुण विभाग ने कहा कि “अश्वगंधा का महत्व केवल चिकित्सा तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा, शोध और स्वास्थ्य क्षेत्र में नई संभावनाएँ खोलता है।” वही पीपीटी द्वारा अश्वगंधा के महत्व , अश्वगंधाइन ग्लोबल मार्किट, कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स, फ़ूड प्रोडक्ट्स,,आदि में इस्तेमाल व् फायदे बताये ।”
डॉ. मोनिका शर्मा, सहायक आचार्य, द्रव्यगुण विभाग ने कहा कि “अश्वगंधा के माध्यम से युवाओं और किसानों को ज्ञान, स्वास्थ्य और बाजार तक पहुँचौ . के अवसर मिल सकते हैं।”
“श्री कैलाश (KVK, उजवा) ने कहा कि अश्वगंधा की खेती से किसानों की आय में स्थायी वृद्धि हो सकती है। गुणवत्ता और प्रमाणन पर ध्यान देने से उनका उत्पाद खरीदारों तक उचित मूल्य पर पहुँचेगा। उन्होंने यह भी बताया कि यदि किसान समूह बनाकर संगठित रूप से औषधीय पौधों की खेती करें तो उन्हें बाज़ार तक पहुँच आसान होगी और निर्यात के अवसर भी खुल सकते हैं। साथ ही उन्होंने किसानों को सलाह दी कि सरकारी योजनाओं और कृषि विज्ञान केंद्रों के तकनीकी सहयोग का लाभ उठाकर वे अपनी खेती को और अधिक लाभकारी बना सकते हैं।”
कार्यक्रम का संचालन डॉ. मोनिका शर्मा द्वारा किया गया। किसानों ने अपने उत्पाद को उचित मूल्य पर खरीदारों तक पहुँचाने से जुड़े प्रश्न रखे। इस दौरान कुछ सुझाव भी सामने आए कि औषधीय पौधों की खेती के इच्छुक किसानों का एक समूह बनाकर मार्केटिंग और बिक्री के समय आने वाली चुनौतियों को दूर किया जा सकता है।
“संस्था के सचिव श्री गिरीश शर्मा, ट्रस्टी श्री विनोद नागर और श्री मुकेश कुमार ने क्रमशः ‘फार्म टू सॉइल’ अवधारणा, वैश्विक स्तर पर खेती की संभावनाएँ और युवाओं के लिए रोजगार अवसर जैसे बिंदुओं पर अपने विचार साझा किए। श्री गिरीश शर्मा ने बताया कि ‘फार्म टू सॉइल’ मॉडल से किसानों को टिकाऊ खेती के साथ–साथ स्वस्थ समाज बनाने का अवसर मिलेगा। श्री विनोद नागर ने कहा कि अश्वगंधा जैसे औषधीय पौधों की मांग केवल भारत में ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी लगातार बढ़ रही है, जिसे देखते हुए किसानों के लिए बड़े अवसर उपलब्ध हैं। श्री मुकेश कुमार ने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि औषधीय पौधों की खेती और इससे जुड़े स्टार्टअप्स के माध्यम से नए रोज़गार और उद्यमिता के द्वार खोले जा सकते हैं।”
“कार्यक्रम वाले दिन प्रतिष्ठा संस्था द्वारा पोस्टर एवं ड्रॉइंग प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया, जिसमें छात्रों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और अश्वगंधा विषय पर अपनी रचनात्मक प्रतिभा प्रस्तुत की। विजेताओं को प्रतिष्ठा संस्था द्वारा पुरस्कार एवं प्रशंसा प्रमाण पत्र प्रदान किए गए, जिससे छात्रों में उत्साह और आत्मविश्वास का संचार हुआ।”
कार्यक्रम के समापन से पूर्व आयोजित पैनल में औषधीय पौधों की खेती, बाजार तक पहुंच और किसानों के सामने आने वाली चुनौतियों जैसे मुद्दों पर गहन विचार–विमर्श हुआ। अंत में प्रतिभागियों को अश्वगंधा पौधे वितरित किए गए और सामूहिक फोटोग्राफ एवं भोजन के साथ कार्यक्रम का सफल समापन हुआ।
प्रतिष्ठा संस्था का मानना है कि इस प्रकार की पहलें आयुर्वेद एवं औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देंगी और भारत को स्वस्थ एवं आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाने में सहायक सिद्ध होंगी।
