व्यंग्य कथा:
अयोध्या के भव्य राम मंदिर के एक कोने में स्थित भारी-भरकम दान-पात्र पर ‘पहरेदारों’ की ड्यूटी लगी थी। पहरेदार भी ऐसे-वैसे नहीं, आधुनिक कैमरों और सुरक्षा विशेषज्ञों की फौज से लैस। लेकिन कहते हैं न, ‘दीया तले अंधेरा’।
एक दिन जब दान-पात्र की गिनती शुरू हुई, तो जो आंकड़े सामने आए, उसने सबको चौंका दिया। हिसाब-किताब में दान गायब था! मंदिर के गर्भगृह में विराजमान प्रभु श्रीराम के बाल-रूप ने जब यह ‘चमत्कार’ देखा, तो वे मंद-मंद मुस्कुराए। उन्होंने पहरेदारों की मीटिंग बुलाई और पूछा, “भाइयों, इतनी कड़ी सुरक्षा के बाद भी दान की रकम कैसे उड़ गई? आखिर चोर घुसा कैसे?”

एक चतुर सुरक्षा अधिकारी ने हाथ जोड़कर कहा, “प्रभु! चोर कोई साधारण इंसान नहीं था। उसने ‘भक्त’ का चोला ओढ़ रखा था। हमारी मशीनें चेहरे पहचान सकती हैं, नीयत नहीं। उसने पूरी श्रद्धा के साथ दान पेटी में हाथ डाला और बोला- ‘प्रभु, तेरा तुझको अर्पण, क्या लागे मेरा!’ और फिर उसने ‘मेरा’ वाले हिस्से पर खुद ही जीएसटी (GST) लगा लिया।”
रामलला मुस्कुराए और बोले, “कलयुग की महिमा अपरंपार है! जब अयोध्या में 134 सालों तक कोर्ट कचहरी के मामलों में आस्था का केस लड़ा जा सकता है, तो दान-पात्र की रकम में ‘लीपापोती’ क्यों नहीं हो सकती?”
तभी अधिकारी ने गिड़गिड़ाते हुए कहा, “महाराज, हम जांच (SIT) बैठा रहे हैं। सीसीटीवी फुटेज खंगाल रहे हैं।”
रामलला ने तंज कसते हुए कहा, “जांच तो 2021 में ज़मीन खरीद घोटाले की भी हुई थी, दानपात्र की धनराशि पर भी सोशल मीडिया और टीवी चैनलों पर खूब बहस हो रही है। तुम लोग बस कमेटियां बनाते रहो, जनता को ‘राम नाम’ का लॉलीपॉप देते रहो और खुद मजे लेते रहो। असली चोर तो वही है जो सिस्टम की चाबी अपने पास रखता है!” क्या तुम्हें नहीं पता?
यह सुनकर पहरेदार शर्म से झुक गए। तभी पीछे से एक भक्त की आवाज आई, “अरे छोड़ो यार, जो गया सो गया! चलो, अब आगे की पर्ची कटाओ और दान-पेटी को फिर से भरो, ताकि अगली बार कोई और ‘चौकीदार’ अपना घर भर सके!”
मंदिर के दरबार में हास्य और व्यंग्य का ऐसा सन्नाटा पसरा कि स्वर्ग लोक में देवता भी ताली बजाने को मजबूर हो गए,और इंद्र देव को बुलाकर कमेटी गठित करने का आग्रह किया गया।

