प्रतापगढ़ यूपी,श्रीमदभागवत कथा सुनने से मन की अशुद्धियाँ, नकारात्मक विचार और भ्रम धीरे-धीरे समाप्त हो जाते हैं। भगवान के चरित्र और लीलाओं का चिंतन मन को शांति, भक्ति और पवित्रता से भर देता है।भगवान को हृदय से समझ सकते हैं बुद्धि से नहीं। भगवान को प्राप्त करने के लिए अपने मन से काम, क्रोध, लोभ, मोह और माया से मुक्त होना पड़ता है। जिनका मन गंगा की तरह पवित्र होता है उन्हें ही भगवान के दर्शन प्राप्त होते हैं। ये बातें प्रसिद्ध कथाकार कुल गुरु आचार्य श्री सत्यब्रत शुक्ल ने व्यासपीठ से शरपोशबीर गाँव के महेंद्र प्रसाद द्रिवेदी के यहाँ श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ कथा के दौरान उपस्थित श्रोताओं के समक्ष कहीं।
श्री आचार्य गुरु जी महाराज ने आयोजित श्रीमद् भागवत कथा महापुराण पर आधारित सुदामा चरित्र और परीक्षित उद्धार के प्रसंग पर बहुत सुंदर और सारगर्भित व्याख्यान मानव जीवन के कल्याण के लिये प्रस्तुत की ।
- श्री गुरु जी ने कहा यह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला सिखाने वाली दिव्य गाथा है।मन की शांति और शुद्धि: भागवत कथा सुनने से मन की अशुद्धियाँ, नकारात्मक विचार और भ्रम धीरे-धीरे समाप्त हो जाते हैं। भगवान के चरित्र और लीलाओं का चिंतन मन को शांति, भक्ति और पवित्रता से भर देता है।
मोक्ष का मार्ग: यह कथा सीधे तौर पर नारायण और उनके अवतारों से जुड़ी है, जो सांसारिक दुखों से मुक्ति दिलाकर मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करती है।

कलियुग में उत्तम साधन: कलियुग में, जहाँ हर कोई अशांत है, भागवत कथा का श्रवण मानसिक रोगों और कष्टों से मुक्ति का सबसे सरल तरीका बताया गया है।
ज्ञान और आनंद: यह कथा केवल भगवान की कहानी नहीं है, बल्कि यह जीवन के परम सत्य को समझाती है, जिससे असंतोष की जड़ खत्म होती है।
आजकल के श्रोता कथा को सुनने का लाभ तो लेते हैं लेकिन उसे अपने जीवन में धारण नहीं करते हैं। जो भी व्यास पीठ से बोल दिया जाता था उसे श्रोता भगवान का वाक्य समझकर पालन करते थे। भागवत सुनने का फल तो अवश्य मिलना ही है लेकिन भागवत से भौतिक वस्तुएं ना मागकर स्वयं भगवान को माग लिया जाए तो आपका जीवन सफल हो जाएगा।
सुदामा जी अपनी दरिद्रता के बावजूद कृष्ण के प्रति समर्पित थे। जब वे द्वारका पहुँचे, तो कृष्ण ने मित्र सुदामा का भव्य स्वागत किया और उनके चरणों को आँसुओं से धोया।

आचार्य श्री ने बताया कि इस कथा को संक्षेप में समझो ?, श्रद्धा के साथ भागवत कथा सुनने से न केवल मानसिक शांति मिलती है, बल्कि घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का भी संचार होता है।
कथा समापन पर आचार्य श्री द्वारा श्री हरि कथा पर पधारे सभी भक्तों का अभिनंदन किया और आभार प्रकट करते हुए कहा कि आज मेरा जीवन सफल हुआ और पधारे श्री द्वारा पूरे परिवार और समाज को एक साथ जोड़ने और जीवन जीने का सौभाग्य संदेश प्राप्त हुआ है ।

