भारी संख्या में पहुंचे श्रद्धालु, भजनों की धुन पर थिरके श्रोता
नई दिल्ली, कंझावला के क़ुत्तबगढ़ रोड पर स्थित माँ बगलामुखी शक्ति पीठ मंदिर जौन्ती में 15 जुलाई से एक दिव्य और भव्य धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन किया जा रहा है, जहाँ एक ओर मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की महिमा गूँज रही है तो दूसरी ओर माँ पीताम्बरी देवी के महायज्ञ की आहुतियों से पूरा वातावरण शुद्ध होकर मन को आनंदित करने वाला है ।

इस अलौकिक महोत्सव को अयोध्या धाम से पधारे अंतर्राष्ट्रीय कथा व्यास,वैष्णव कुलभूषण श्रीमद्जगतगुरू रामानंदा चार्य श्री श्री 1008 स्वामी श्री श्री बल्लभाचार्य जी महाराज (श्री रामहर्षण मैथल सख्य पीठाधीश्वर) स्वामी जी के सानिध्य मे किया जा रहा है ।
इस भक्ति रस की शुरुआत 15 जूलाई को सुबह 9बजे एक भव्य और विशाल कलश यात्रा से शुरू हुई ।इसके बाद प्रतिदिन शाम चार बजे से प्रभु इच्छा तक संगीतमय राम कथा का अमृत प्रवाह बहरहा है ।संगीत की सुमधुम लहरियों के बीच जब स्वामी श्री श्री बल्लभाचार्य जी महाराज ने श्री राम जानकी विवाह की कथा सुनाई तो हर हृदय झूम उठा ।
कथा के दौरान श्री महाराज जी ने श्री राम कथा के पाँचवे दिवस रविवार को तुलसीकृत रामायण जी के सीता स्वयंवर राम सीता विवाह का वर्णन किया।श्री श्री महाराज ने कथा में बताया कि जनक जी ने अपनी बेटी सीता के विवाह के लिए धनुष यज्ञ का आयोजन रखा तो उसमें देश-विदेश के दूर-दूर से हजारों राजा महाराजा शिव के धनुष को तोड़ने के लिए स्वयंवर में पहुंचे थे। रावण और बाणासुर जैसे महा योद्धा भी सीता जी से विवाह करने के लिए पूरी ताकत के साथ धनुष को तोड़ने की कोशिश की, लेकिन धनुष तोड़ने की बात तो दूर बड़े-बड़े राजा महाराजा धनुष को हिला भी नहीं सके।

उन्होंने कथा सुनाते हुए आगे कहा कि गुरु विश्व मित्र के साथ दोनों राजकुमार राम और लक्ष्मण बैठे होते हैं। वह सब जान रहे हैं की राजा जनक जी के मन में क्या विचार चल हैं, जनक जी बोले की मुझे लगता है कि शायद पृथ्वी पर ऐसा कोई वीर नहीं है जो की धनुष को तोड़ दे। मुझे तो सारी पृथ्वी खाली नजर आ रही है। इस प्रकार के वचन जब राम जी के भ्राता लक्ष्मण जी ने सुने तो वह सभा में उठकर खड़े होते हैं और कहते हैं कि है राजन आपने ऐसे कैसे इतनी बड़ी बात कह दी कि पृथ्वी वीरों से खाली है। अगर गुरु जी और बड़े भाई मुझे आज्ञा दें तो आप तो धनुष तोड़ने की बात कह रहे हैं मैं सारा ब्रह्मांड भी उठा सकता हूं और जल को थल और थल को जल में परिवर्तन कर सकता हूं।

इस प्रकार से लक्ष्मण जी के कठोर वचन सुनकर गुरु विश्वामित्र उन्हें बैठने का इशारा करते हैं। इसी दौरान श्री राम गुरु विश्वामित्र को प्रणाम करते हुए मन में गुरु का स्मरण कर खड़े होते हैं और धनुष को उठाकर दो टुकड़े कर देते हैं। जैसे ही भगवान राम ने धनुष तोड़ा तो जनकपुरी में आयोजित सीता स्वयंवर में भगवान श्री राम के जय जयकार गूंज उठे।श्री श्री महाराज जी ने भक्तों को भगवान श्रीराम के कथा का स्मरण कराते हुए बताया कि गुप्त नवरात्रि के सिद्ध मुहूर्त में होने वाला भगवान श्री राम की कथा और माँ बगलामुखी पीतांबरा महायज्ञ, जो जीवन के समस्त विघ्नों, कष्टों और बाधाओं को समाप्त करने का प्रतीक हैं और सभी को अपने कार्य में सफलता और सर्वमनोकामनाओं की पूर्ति के लिए बेहद अचूक और कल्याणकारी उपाय माना जाता है ।
उल्लेखनीय हैं कि इस कथा के दौरान प्रातः 10 बजे माँ दोहसर धाम,भोजा वाली,पहाड़ी वाली माता के मंदिर का भूमि पूजन किया गया ।कथा के विश्राम के पश्चात प्रतिदिन भक्तों के लिए भव्य भोजन प्रसाद (भंडारे) भोग की व्यवस्था की गई है ।
श्री श्री स्वामी जी महाराज के इस कथा के दौरान सुनने आए कई श्रद्धालु भक्ति में झूमते नजर आए।


