नोएडा यूपी , राष्ट्रतक- राह से राष्ट्र तक:
एक जांबाज, तकनीक-प्रिय और जनसेवी पुलिस अधिकारी का . संक्षिप्त परिचय और पारिवारिक पृष्ठभूमि
डॉ. राजीव नारायण मिश्रा भारतीय पुलिस सेवा के 2010 बैच के IPS अधिकारी हैं। उनका जन्म 30 अक्टूबर को कानपुर नगर में विजयादशमी के दिन हुआ था। उनके पिता उत्तर प्रदेश सरकार में एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी थे और माता मनोरमा मिश्रा शिक्षित गृहिणी थीं तथा साहित्य रत्न की उपाधि प्राप्त थीं।
पिता के तबादलों के कारण उनकी प्रारंभिक शिक्षा उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में हुई। बाद में उन्होंने कानपुर में माध्यमिक और उच्च शिक्षा पूरी की। शैक्षणिक रूप से वे बेहद प्रतिभाशाली रहे – क्राइस्टचर्च कॉलेज, कानपुर से बीकॉम और एमकॉम की डिग्री, रुहेलखंड विश्वविद्यालय बरेली से पीएचडी। IPS बनने से पहले उन्होंने एक निजी कंपनी में मैनेजमेंट ट्रेनी और PPN डिग्री कॉलेज कानपुर में प्रवक्ता के रूप में भी काम किया। 3753
2. पीसीएस से आईपीएस तक का सफर
राजीव नारायण मिश्रा ने अपना करियर मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग से PCS अधिकारी के रूप में खंडवा जिले में शुरू किया। लेकिन उनका लक्ष्य IPS था जिसे उन्होंने मेहनत से हासिल किया और 2010 बैच में IPS बने। 1827
3. सेवा में नियुक्तियां और कार्यक्षेत्र
प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उनकी पहली नियुक्ति वाराणसी में हुई। इसके बाद उन्होंने अयोध्या, बरेली, मेरठ, नोएडा, कुशीनगर और लखनऊ जैसे संवेदनशील जिलों में विभिन्न पदों पर काम किया।
प्रमुख पद:
– SP Traffic, नोएडा- यहां उन्होंने ट्रैफिक सुधार के कई अभिनव प्रयोग किए
– SP, ATS और SP, STF पश्चिमी UP
– SSP, STF उत्तर प्रदेश – पूरे प्रदेश में पेशेवर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई की कमान
– PAC East Zone, प्रयागराज में तैनाती के बाद 2024-2025 में उन्हें नोएडा का अपर पुलिस आयुक्त, कानून एवं व्यवस्था बनाया गया ।वर्तमान में कानून व्यवस्था के साथ-साथ रिट सेल का पर्यवेक्षण भी हैं ।सिंगापुर पुलिस की कार्यप्रणाली का प्रशिक्षण भी लिया है।
4. प्रमुख उपलब्धियां और योगदान –
A. राष्ट्र की रक्षा में अदम्य साहस – अयोध्या हमला 2005
IPS राजीव नारायण मिश्रा की सबसे बड़ी पहचान 5 जुलाई 2005 को अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि पर हुए आतंकी हमले में उन्होंने प्राणों की परवाह न करते हुए CRPF के साथ आतंकवादियों से सीधा मोर्चा लिया और हमले में शामिल सभी 5 आतंकवादियों को मार गिराया। आतंकियों के पास से AK-47, पिस्टल, हैंड ग्रेनेड, रॉकेट लॉन्चर जैसी बड़ी मात्रा में सामग्री बरामद हुई थी।
- इस वीरता के लिए भारत सरकार ने उन्हें राष्ट्रपति के पुलिस पदक – वीरता से सम्मानित किया। इसी कारण उन्हें “अयोध्या के रणबांकुरे” और “योगी के भरोसेमंद अफसर” भी कहा जाता है।
- B. अपराध नियंत्रण में सख्त प्रशासक की छवि
वे एक सख्त लेकिन न्यायप्रिय अधिकारी माने जाते हैं। STF में रहते हुए उन्होंने 37,000 करोड़ रुपये की साइबर ठगी का पर्दाफाश किया और साइबर अपराधियों को जेल पहुंचाया। ATS में रहते हुए कई आतंकी साजिशों को विफल किया। SSP, STF रहते हुए उन्होंने अभ्यस्त और पलायित अपराधियों को उनके “अंतिम अंजाम” तक पहुंचाया।
नोएडा जैसे हाई-प्रोफाइल क्षेत्र में उनकी तैनाती को इस बात का संकेत माना गया कि राज्य सरकार लॉ एंड ऑर्डर में लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेगी।
C. ट्रैफिक और टेक्नोलॉजी में क्रांतिकारी बदलाव
राजीव नारायण मिश्रा अभिनव प्रयोगों के लिए जाने जाते हैं। SP Traffic नोएडा रहते हुए उन्होंने *उत्तर प्रदेश में सबसे पहले नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेस-वे पर कैमरों के माध्यम से ऑटोमेटिक चालान प्रणाली* शुरू की। इसका परिणाम ये हुआ कि सड़क दुर्घटनाओं और मृतकों की संख्या में महत्वपूर्ण कमी आई।
वर्तमान में भी उनसे ट्रैफिक व्यवस्था, महिला सुरक्षा, साइबर क्राइम और शहरी कानून व्यवस्था में बड़े निर्णयों की उम्मीद है।
D. कोविड काल में मानवता की मिसाल
कोरोना की पहली लहर में जब लोग परेशान थे, तब उन्होंने अपने *PAC कैंपस में L-1 हॉस्पिटल बनवाया और 48 जवानों व उनके परिवारों का मुफ्त इलाज कराया। इस मॉडल को बाद में पूरे उत्तर प्रदेश में अपनाया गया।

E. महिला सशक्तिकरण और सामुदायिक पुलिसिंग
मिशन शक्ति 5.0 के तहत नोएडा स्टेडियम में ‘रन फॉर एम्पावरमेंट’ का आयोजन उनके नेतृत्व में हुआ। उन्होंने बताया कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए जागरूकता अभियान, कल्याणकारी योजनाएं और चौपालों के माध्यम से समस्याओं का त्वरित समाधान किया जा रहा है।
10 जून 2025 को नोएडा सिटीजन फोरम के साथ बैठक में उन्होंने *सामुदायिक पुलिसिंग, नाइट पेट्रोलिंग, महिला सुरक्षा, साइबर क्राइम और घरौंदा माफिया* पर चर्चा की और 15 दिन में एक्शन प्लान का आश्वासन दिया।
5. सम्मान और पहचान
– राष्ट्रपति पुलिस पदक – वीरता
– DGP प्लेटिनम डिस्क
– राज्य और केंद्र सरकार से कई प्रशंसा पत्र
– तकनीक और इंटेलिजेंस के सहारे अपराध खत्म करने में माहिर अधिकारी के रूप में पहचान
6. कार्यशैली और नेतृत्व
उनकी छवि एक “सख्त प्रशासक, तेजतर्रार अधिकारी” की है। वे अपने अधीनस्थ कर्मचारियों को भी बराबरी का सम्मान देते हैं। नोएडा में उनकी दूसरी पारी को लेकर पुलिस विभाग में सकारात्मक उत्साह है क्योंकि पहले भी यहां उनकी अपराध नियंत्रण नीतियों की सराहना हुई थी।
वर्तमान में पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने जिले में बेहतर समन्वय के लिए उन्हें कानून व्यवस्था के साथ रिट सेल का दायित्व दिया है।
निष्कर्ष
IPS राजीव नारायण मिश्रा का जीवन कर्तव्य, साहस और नवाचार का संगम है। अयोध्या में देश की रक्षा करने वाले जांबाज से लेकर नोएडा में ट्रैफिक और साइबर अपराध पर नियंत्रण करने वाले आधुनिक पुलिस अधिकारी तक, उनका सफर प्रेरणादायक है। कोविड में मानवता, महिलाओं के सशक्तिकरण और सामुदायिक पुलिसिंग पर उनका जोर उन्हें एक जनसेवी अफसर बनाता है।
नोएडा की कानून व्यवस्था की कमान अब ऐसे अधिकारी के हाथों में है जिनकी पहचान “जीरो टॉलरेंस” और “टेक्नोलॉजी के साथ पुलिसिंग” है।ऐसे देश के बीर जवानों की सेवा के लिए राष्ट्र समाज परिवार हार्दिक शुभकामनाएँ एवं अभिनंदन करता है

