अम्बेडकर नगर यूपी: शिक्षा केवल ज्ञान प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज के भविष्य को गढ़ने की सबसे सशक्त शक्ति है। ग्रामीण क्षेत्रों में बालिका शिक्षा को बढ़ावा देना सामाजिक विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसी विचार और संकल्प को आधार बनाकर श्री तेज प्रताप स्मारक बालिका इंटर कॉलेज की स्थापना 1 जुलाई 2004 को की गई।
विद्यालय के स्थापना दिवस का उद्घाटन उत्तर प्रदेश सरकार के तत्कालीन शिक्षा मंत्री श्री जय प्रकाश यादव जी द्वारा किया गया। यह अवसर क्षेत्र के लिए विशेष महत्व रखता था, क्योंकि ग्रामीण अंचल में बालिकाओं को गुणवत्तापूर्ण एवं आधुनिक शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण पहल थी।
बालिका शिक्षा को समर्पित एक संकल्प: विद्यालय के संस्थापक एवं प्रबंधक श्री सतीराम यादव जी ने ग्रामीण क्षेत्र की बालिकाओं को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से इस संस्थान की नींव रखी।उस समय ग्रामीण क्षेत्रों में आधुनिक सुविधाओं से युक्त विद्यालयों की संख्या सीमित थी। ऐसे समय में एक बड़े और सुविधासंपन्न विद्यालय की स्थापना अपने आप में दूरदर्शी प्रयास था।
विद्यालय ने प्रारंभ से ही केवल पाठ्यक्रम आधारित शिक्षा तक स्वयं को सीमित नहीं रखा, बल्कि अनुशासन, संस्कार, नैतिक मूल्यों और व्यक्तित्व विकास को भी शिक्षा का अभिन्न हिस्सा बनाया। उद्देश्य स्पष्ट था—विद्यार्थियों को केवल परीक्षा के लिए नहीं, बल्कि जीवन के लिए तैयार करना।
तकनीकी शिक्षा की ओर पहला कदम;
बदलते समय और शिक्षा में तकनीक की बढ़ती भूमिका को समझते हुए विद्यालय ने वर्ष 2006 में कंप्यूटर प्रयोगशाला की स्थापना की। ग्रामीण क्षेत्र में उस दौर में कंप्यूटर शिक्षा की सुविधा उपलब्ध कराना एक महत्वपूर्ण पहल थी।
इस कदम ने विद्यार्थियों को पारंपरिक शिक्षा के साथ-साथ आधुनिक तकनीकी ज्ञान से जोड़ने का अवसर प्रदान किया। कंप्यूटर शिक्षा के माध्यम से विद्यार्थियों के सामने आगे की पढ़ाई, रोजगार और तकनीकी क्षेत्र में नए अवसरों के द्वार खुले।
हजारों विद्यार्थियों के भविष्य की नींव
स्थापना से लेकर आज तक विद्यालय की शैक्षणिक यात्रा निरंतर आगे बढ़ती रही है। विद्यालय में अब तक लगभग 35,000 से अधिक छात्र-छात्राओं ने प्रवेश लेकर शिक्षा प्राप्त की है। यह संख्या केवल विद्यालय के विस्तार को नहीं दर्शाती, बल्कि क्षेत्र के लोगों के बीच संस्थान के प्रति बने विश्वास और इसकी निरंतर भूमिका को भी रेखांकित करती है।
विद्यालय से शिक्षा प्राप्त करने वाले अनेक विद्यार्थी आज विभिन्न क्षेत्रों में अपने कार्य और प्रतिभा के माध्यम से समाज में योगदान दे रहे हैं। प्रत्येक सफल विद्यार्थी इस संस्थान की शैक्षणिक यात्रा का एक महत्वपूर्ण अध्याय है।
शिक्षा से सामाजिक परिवर्तन तक
आज श्री तेज प्रताप स्मारक बालिका इंटर कॉलेज केवल एक शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा, जागरूकता और सामाजिक परिवर्तन का महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है।
इस संस्थान की यात्रा यह संदेश देती है कि यदि शिक्षा को सही दिशा, अनुशासन और संस्कारों के साथ जोड़ा जाए तो वह आने वाली पीढ़ियों के जीवन को बदल सकती है। विशेष रूप से बालिकाओं को शिक्षा प्रदान करना पूरे परिवार और समाज को आगे बढ़ाने का माध्यम बनता है।
विद्यालय की स्थापना से लेकर आज तक की यात्रा में अनेक उतार-चढ़ाव आए होंगे, लेकिन शिक्षा के प्रति इसकी प्रतिबद्धता निरंतर बनी रही है। आने वाले समय में आधुनिक शिक्षा, तकनीकी ज्ञान और बेहतर शैक्षणिक सुविधाओं के साथ यह संस्थान नई पीढ़ी के सपनों को आकार देने की दिशा में आगे बढ़ता रहे—यही अपेक्षा है। “तमसो मा ज्योतिर्गमय”
अर्थात—अज्ञान के अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर।
इसी आदर्श को अपना मार्गदर्शक बनाकर श्री तेज प्रताप स्मारक बालिका इंटर कॉलेज शिक्षा के प्रकाश को ग्रामीण अंचल की नई पीढ़ी तक पहुँचाने की अपनी यात्रा को निरंतर आगे बढ़ा रहा है।

— राष्ट्र समाज / राष्ट्रतक
