नई दिल्ली : तेल अवीव/रियाद: मध्य पूर्व में इजराइल और हूती विद्रोहियों के बीच तनाव को लेकर क्षेत्रीय राजनीति एक बार फिर चर्चा में है। हूती विद्रोहियों के खिलाफ अपनी रणनीति को मजबूत करने के लिए इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू द्वारा अमेरिका के माध्यम से मदद का संदेश भेजे जाने की खबर सामने आई है। हालांकि, खबर के मुताबिक, सऊदी अरब ने इस मामले में सहयोग देने से इनकार कर दिया है। यमन में सक्रिय हूती विद्रोही लंबे समय से क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए चुनौती बने हुए हैं। लाल सागर और आसपास के समुद्री मार्गों में हूतियों की गतिविधियों ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार और जहाजों की आवाजाही को प्रभावित किया है। इजराइल भी हूतियों को अपने लिए सुरक्षा चुनौती मानता है। ऐसे में उनके हमलों को रोकना और उनकी सैन्य क्षमता को सीमित करना इजराइल की रणनीति का अहम हिस्सा हो सकता है। नेतन्याहू की ओर से अमेरिका के जरिए मदद मांगने की खबर ऐसे समय आई है, जब मध्य पूर्व में कई मोर्चों पर तनाव बना हुआ है। अमेरिका पहले से ही क्षेत्रीय सुरक्षा और समुद्री व्यापार की रक्षा से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। दूसरी ओर, सऊदी अरब का कथित इनकार क्षेत्रीय समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। सऊदी अरब यमन संघर्ष के अनुभवों के कारण किसी नए सैन्य टकराव में सीधे शामिल होने को लेकर सतर्क रह सकता है।
