तेलंगाना सरकार ने एक ऐसा कानून बनाया है जिसके तहत अगर सरकारी/अर्ध सरकारी कर्मचारी अपने माता पिता की सेवा नहीं करते हैं तो उनके सेलरी से पैसे काटा जाएगा ।
इस नियम के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- कटौती की राशि: कर्मचारी के वेतन में से 10% से 15% तक की कटौती की जा सकती है।
- पैसा सीधे माता-पिता को: सैलरी से काटा गया यह पैसा सीधे उनके माता-पिता के बैंक खाते में जमा कर दिया जाएगा।
- कानून का नाम: इस कानून को “तेलंगाना कर्मचारी की जवाबदेही और माता-पिता के भरण-पोषण की निगरानी विधेयक, 2026” के रूप में जाना जा रहा है।
- किन पर लागू होगा: यह नियम न केवल सरकारी कर्मचारियों पर, बल्कि राज्य के निजी कर्मचारियों, जनप्रतिनिधियों (जैसे पार्षद, सरपंच) पर भी लागू होगा।
- शिकायत पर कार्रवाई: यदि माता-पिता शिकायत करते हैं कि उनके बच्चे देखभाल नहीं कर रहे हैं, तो जांच के बाद यह कटौती की जाएगी।
- उद्देश्य: इस कानून का उद्देश्य बुजुर्ग माता-पिता को आर्थिक सुरक्षा और सम्मान प्रदान करना है, जिन्हें उनके बच्चे उपेक्षित कर देते हैं।
यह एक अनूठा कदम है जो माता-पिता की देखभाल को कानूनी जिम्मेदारी बनाता है।
तेलंगाना में माता-पिता की सेवा नहीं की तो सैलरी से कटेंगे 10 हजार रुपए
◆ तेलंगाना सरकार ने ‘तेलंगाना कर्मचारी की जवाबदेही और माता-पिता के भरण-पोषण की निगरानी विधेयक, 2026’ को सर्वसम्मति से पारित कर दिया है
◆ इसके दायरे में केवल सरकारी कर्मचारी ही नहीं, बल्कि निजी क्षेत्र के कर्मचारी और विधायक, MLC, कारपोरेटर, पार्षद एवं सरपंच जैसे जनप्रतिनिधि भी शामिल हैं
