धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े को एक महीने से अधिक समय तक दिल्ली के जंतर मंतर पर चले जेन ज़ी आंदोलन की बड़ी सफलता के रूप में जाना गया.
लेकिन दूसरे ही दिन मोदी सरकार ने शिक्षा मंत्रालय की ज़िम्मेदारी प्रल्हाद जोशी को दे दी. प्रल्हाद जोशी और धर्मेंद्र प्रधान दोनों ही आरएसएस के स्वयंसेवक रहे हैं. हालांकि बीजेपी नेताओं की ये पहचान बहुत आम बात है. प्रल्हाद जोशी के शिक्षा मंत्री बनते ही कुछ विवाद सामने भी आने लगे.
- मंगलवार को संसद के बाहर कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रल्हाद जोशी ने गर्भवती महिला के बलात्कारियों की रिहाई का समर्थन किया था. राहुल गांधी से पहले यही बयान प्रियंका गांधी ने लोकसभा में दिया था. इस बयान को संसद की कार्यवाही से हटा दिया गया था.
- प्रियंका गांधी की इस टिप्पणी पर बीजेपी नेताओं ने कड़ी आपत्ति जताई. इसका जवाब प्रल्हाद जोशी ने भी लोकसभा में दिया. जोशी ने कहा, ”प्रियंका ने जो कहा है, उसे साबित करना चाहिए. वह ग़लत सूचना दे रही हैं और इसके लिए उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई करनी चाहिए. कुछ भी बोल सकती हैं क्या? मैं इसका खंडन करता हूँ.”
बिलकिस बानो मामले में प्रल्हाद जोशी ने क्या कहा था?
2002 के गुजरात दंगों के दौरान बिलकिस बानो से गैंग रेप और उनके परिवार के सदस्यों की हत्या के मामले में उम्र क़ैद की सज़ा काट रहे 11 दोषियों की समय से पहले रिहाई कर दी गई थी. इस रिहाई पर गुजरात की बीजेपी सरकार ने मुहर लगाई थी. जब इसे लेकर चौतरफ़ा सवाल उठ रहे थे, तब प्रल्हाद जोशी ने इसका बचाव किया था.
तब प्रल्हाद जोशी केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री थे. 2022 में 18 अक्तूबर को प्रह्लाद जोशी ने NDTV के तत्कालीन सीनियर जर्नलिस्ट श्रीनिवासन जैन से कहा था, “जब सरकार और संबंधित लोगों ने यह फ़ैसला किया है, तो मुझे इसमें कुछ भी ग़लत नहीं लगता क्योंकि यह क़ानून के तहत होने वाली प्रक्रिया ही है.”
उन्होंने कहा था कि जो दोषी काफ़ी समय जेल में बिता चुके हैं, उनके लिए समय से पहले रिहाई का प्रावधान भी है.

उन्होंने यह कहा था, “क़ानून के अनुसार ही यह किया गया है.” उस समय प्रल्हाद जोशी गुजरात में चुनाव प्रचार के दौरान कहे थे.
गुजरात सरकार के फ़ैसले का बचाव करते हुए प्रल्हाद जोशी ने उस समय कहा था, “अच्छे आचरण के आधार पर क़ैदियों को रिहा करने का अधिकार राज्य सरकार के पास है.और मेरा मानना है कि इस मामले को जानबूझकर ग़लत तरीके से पेश किया जा रहा है. हालांकि, किसी भी अपराधी को उसके अपराध की सज़ा मिलनी ही चाहिए.”
गुजरात सरकार की ओर से दायर 470 पन्नों के हलफ़नामे से पता चलता है कि दोषियों की रिहाई को मंज़ूरी देते समय केंद्र सरकार ने कई गंभीर आपत्तियों को नज़रअंदाज किया था. गुजरात सरकार ने 28 जून (2022) को केंद्र से मंज़ूरी मांगी थी. इसके बाद 11 जुलाई को केंद्र की ओर से महज़ एक पन्ने की मंज़ूरी दे दी गई, जिसमें कोई कारण भी दर्ज नहीं किया गया था.”

अब बीजेपी का क्या कहना है?
बीजेपी ने मंगलवार को प्रियंका गांधी की टिप्पणी को निंदनीय और भ्रामक बताया. बीजेपी की ओर से पार्टी के मीडिया सेल के संयोजक और लोकसभा सांसद अनिल बलूनी ने एक बयान जारी किया.
बलूनी ने कहा, ”एक स्वस्थ लोकतंत्र में सदन के भीतर किसी केंद्रीय मंत्री के ख़िलाफ़ इस तरह की भ्रामक और आधारहीन टिप्पणियां स्वीकार नहीं की जा सकतीं. प्रल्हाद जोशी ने बिलकिस बानो सामूहिक दुष्कर्म मामले को लेकर ऐसा कोई बयान दिया ही नहीं था. उन्होंने केवल क़ानूनी प्रक्रिया पर टिप्पणी की थी, मामले के गुण-दोष पर नहीं.”
उन्होंने कहा, “ऐसे बयान देने से पहले राहुल गांधी और प्रियंका वाड्रा को तथ्यों को ठीक से पढ़ना और समझना चाहिए था. लेकिन राजनीतिक सुविधा के लिए बयानों को तोड़-मरोड़कर पेश करना, देश को गुमराह करना और निराधार आरोप लगाना कांग्रेस पार्टी की आदत बन चुकी है.”
वहीं कांग्रेस के लोग सोशल मीडिया पर प्रल्हाद जोशी की टिप्पणी का वीडियो शेयर कर रहे
