नई दिल्ली: BRICS Summit 2026 भारत मंडपम में एक ऐतिहासिक मोड़ लेता दिख रहा है जी। दुनिया की तीन बड़ी शक्तियों – भारत, रूस और चीन ने एक मंच पर हाथ मिला लिया है, और इसका सीधा असर अमेरिकी डॉलर पर पड़ता दिख रहा है जी। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीर में लिखा है – “डॉलर का निकला तोड़, ब्रिक्स करेंसी का आगाज” – और ये बात अब सिर्फ नारा नहीं, बल्कि एजेंडा बन चुकी है जी।
- *क्या हुआ भारत मंडपम में ?
शनिवार को PM नरेंद्र मोदी ने BRICS समिट की अध्यक्षता की। उनके साथ रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग एक ही फ्रेम में दिखे। ये तस्वीर 2020 के गलवान विवाद के बाद पहली बार इतनी गर्मजोशी वाली थी। तीनों नेताओं की ये एकजुटता दुनिया को एक बड़ा संदेश दे रही है – अब ग्लोबल ऑर्डर सिर्फ डॉलर से नहीं चलेगा जी।
फोटो में RUSSIA, JAPAN, INDIA लिखा दिख रहा है, लेकिन असली चर्चा RUSSIA, CHINA, INDIA यानी RIC की है। जापान BRICS का सदस्य नहीं है, ये ग्राफिक्स की गलती हो सकती है, लेकिन मुद्दा BRICS का है जी।
- BRICS करेंसी क्या है ? डॉलर का तोड़ कैसे ?
पिछले 80 सालों से दुनिया का 58% इंटरनेशनल ट्रेड अमेरिकी डॉलर में होता है। अमेरिका ने डॉलर को हथियार बना लिया है – प्रतिबंध लगाना, SWIFT से निकालना। रूस पर यूक्रेन युद्ध के बाद लगे प्रतिबंधों ने सभी देशों को सोचने पर मजबूर कर दिया जी।
इसीलिए BRICS देशों ने 2023 से एक कॉमन करेंसी पर काम शुरू किया है। इसे अभी तक कोई आधिकारिक नाम नहीं मिला, लेकिन इसे BRICS Pay और BRICS Bridge के नाम से जाना जा रहा है।
- इसका आइडिया है:
1. आपस में व्यापार डॉलर में नहीं, लोकल करेंसी में हो।
2. भारत-रूस व्यापार रुपए-रूबल में हो रहा है जी।
3. चीन और रूस युआन में व्यापार कर रहे हैं।
4. एक डिजिटल प्लेटफॉर्म बनेगा जहाँ सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) से पेमेंट होगा।
*डॉलर का निकला तोड़? कितना सच ?
यहाँ सच्चाई समझनी जरूरी है जी।
अभी तक BRICS ने कोई नोट या सिक्का लॉन्च नहीं किया है जी। कोई BRICS करेंसी मार्केट में नहीं आई है। जो हुआ है वो है – *De-Dollarization* यानी डॉलर पर निर्भरता कम करना।
RBI की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में भारत का 18% इंटरनेशनल ट्रेड लोकल करेंसी में हुआ है, जो 2020 में सिर्फ 3% था। रूस तो अपना 90% तेल व्यापार युआन और रुपए में कर रहा है जी।
लेकिन डॉलर को हटाना इतना आसान नहीं। IMF के अनुसार आज भी दुनिया के 58% रिजर्व डॉलर में हैं, जबकि युआन सिर्फ 2.5% है।
- PM मोदी का स्टैंड क्या है ?
PM मोदी ने BRICS मंच पर साफ कहा है – भारत किसी के खिलाफ नहीं, बल्कि एक नए और निष्पक्ष सिस्टम के पक्ष में है। भारत ने कभी भी डॉलर को सीधे चुनौती नहीं दी, बल्कि कहा है कि हमें विकल्प चाहिए।
भारत की नीति है – “रुपए का इंटरनेशनलाइजेशन”। यानी दुनिया रुपए में व्यापार करे, लेकिन डॉलर को दुश्मन न बनाए। यही कारण है कि भारत BRICS करेंसी पर जल्दबाजी नहीं कर रहा, बल्कि धीरे-धीरे UPI और RuPay को ग्लोबल बना रहा है जी।
- पुतिन और जिनपिंग क्यों साथ आए ?
पुतिन को डॉलर सिस्टम से निकाला जा चुका है, इसलिए वे सबसे ज्यादा BRICS करेंसी के पक्ष में हैं। जिनपिंग चाहते हैं कि युआन डॉलर की जगह ले। लेकिन भारत इस बात से सहमत नहीं कि युआन ही BRICS करेंसी बन जाए।
इसीलिए तीनों का हाथ मिलाना बड़ी बात है, लेकिन तीनों के इरादे अलग-अलग हैं जी।

- Dr. Pramod Tiwari की विशेष टिप्पणी
राष्ट्र समाज के संपादक डॉ प्रमोद तिवारी जी कहते हैं, “ये फोटो सिर्फ तीन नेताओं की नहीं, तीन सभ्यताओं की है। भारत, रूस, चीन – तीनों ही हजारों साल पुरानी संस्कृति हैं। अगर ये तीन मिल जाएं तो दुनिया का 40% जीडीपी और 45% आबादी एक साथ आ जाती है। डॉलर का तोड़ नोट से नहीं, नियत से निकलेगा। PM मोदी ने BRICS को टकराव का नहीं, सहयोग का मंच बनाया है जी।”
- निष्कर्ष
दुनिया की तीन बड़ी शक्तियों का हाथ मिलाना एक संकेत है। डॉलर का एकछत्र राज अब चुनौती में है, लेकिन उसका अंत कल सुबह नहीं होगा जी। BRICS करेंसी अभी आइडिया है, इकोसिस्टम बन रहा है।
अगले 5 साल में क्या होगा? डॉलर रहेगा, लेकिन उसकी मनमानी नहीं चलेगी। और इस बदलाव की पटकथा भारत मंडपम, नई दिल्ली में लिखी जा रही है जी।
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*Source:* BRICS Summit 2026 Bharat Mandapam, RBI Report, IMF Data
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