Rashtra Tak Hindi Monthly Magazine Tue, 01 Sep 2026 17:07:32 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1 https://www.rashtratak.com/wp-content/uploads/2025/05/cropped-cropped-WhatsApp-Image-2025-05-08-at-2.40.25-PM-32x32.jpeg Rashtra Tak 32 32 श्री कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव विशेष: जानिए भगवान श्री कृष्ण की दिव्य लीलाओं में निहित आध्यात्मिक संदेश https://www.rashtratak.com/%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%83%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%a3-%e0%a4%9c%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a4%ae%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a4%b9/ Tue, 01 Sep 2026 17:07:31 +0000 https://www.rashtratak.com/?p=2853 दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी (संस्थापक एवं संचालक, दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान)   उस युग का सर्वाधिक

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दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी

(संस्थापक एवं संचालक, दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान)

 

उस युग का सर्वाधिक तमग्रस्त काल था वह। पापाचार चरम सीमा पर था। श्रीमद्भागवत के एक रूपक के अनुसार उस समय सहस्रों दैत्य राजाओं का रूप धरकर पृथ्वी को आक्रान्त कर रहे थे। इनके दुर्दान्त अत्याचारों से पृथ्वी भयाक्रान्त थी। वे गौ रूप धारण कर करुण स्वर में रंभा रही थी। इस करुण क्रंदन को सृष्टि के पालनहार कैसे अनसुना कर सकते थे? अतः वे असीम परम सत्ता ससीम मानवीय चोले में सिमट कर इस धरा पर उतर आई। मानों अज्ञानरूप अंधकार को चीरता हुआ ज्ञान रूपी पूर्ण चन्द्रमा द्वापर युगीन नभ में उदित हुआ। यह अतिशुभ घड़ी थी, भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी की अर्धरात्रि और यह अवतारी युगपुरुष थे- पुरुषोत्तम भगवान श्री कृष्ण!

 

श्री कृष्ण, एक ऐसा अलौकिक व्यक्तित्व जिसे किसी एक परिभाषा से चित्रित ही नहीं किया जा सकता। ये ही तो हैं जिन्होंने संसार में एक ओर तो गोप-गोपिकाओं के माध्यम से प्रेम-भक्ति-विरह की सरस धारा प्रवाहित की, वहीं दूसरी ओर समस्त उपनिषदों को दुहकर गीता रूपी दुग्धामृत अर्जुन के निमित्त से सम्पूर्ण मानव जाति को दिया। माधुर्यपूर्ण प्रेम और धर्म सम्मत ज्ञान का अद्भुत सम्मिश्रण! यही श्री कृष्ण हैं।

 

इस लीलाधर ने अपने अवतरण काल में अनेकानेक दिव्य लीलाएँ की। ब्रज की कुंज गलियाँ, कंस के अत्याचारों से त्रस्त मथुरा भूमि, कुरुक्षेत्र का महा समरांगण – हर क्षेत्र में इनकी अलौकिक लीलाओं का प्रकाश जगमगाया। ये दिव्य क्रीड़ाएँ तत्समय तो सप्रयोजन थी हीं, आज युगोपरान्त भी हमारे लिए प्रेरणा दीप हैं। साधारण प्रतीत होते हुए भी असाधारण संदेशों की वाहक हैं। एक-एक लीला में गूढ़ आध्यात्मिक रहस्य संजोया व पिरोया हुआ है। जैसे ग्वालिनों की मटकियों से माखन चुराकर खाना। नन्दनन्दन माखन चोर की यह लीला अत्यंत सांकेतिक है। यह इशारा कर रही है कि संसार द्वैतात्मक है। इसमें माखन रूपी सार एवं छाछ रूपी असार दोनों ही विद्यमान हैं। माखन चुराकर प्रभु यही समझा रहे हैं कि संसार में परम सार तत्त्व अर्थात् ईश्वर का वरण करो, सारहीन माया का नहीं।

 

बाल-लीलाओं की इस श्रृंखला में विषधर कालिया की मर्दन लीला को ही लें। यह बाललीला भी कुछ कम प्रतीकात्मक नहीं। यहाँ विषधर कालिया हमारे विषाक्त मन का प्रतीक है। उसके सहस्रों विषैले फन हमारे अंतस् में फुँफकारते अगणित विकारों,  दुर्भावनाओं के द्योतक हैं। हमारे जीवन की यमुना भी इन वासनात्मक प्रवृत्तियों के कारण विषाक्त हो गई है। जीवन की मिठास लुप्त और शांति भंग होती जा रही है। श्री कृष्ण का यमुना के तल में उतरना प्रतीक है हमारे जीवन में एक पूर्ण गुरु के पदार्पण का। गुरु प्रदत्त ब्रह्मज्ञान द्वारा अंतस् में व्याप्त एक-एक विकार क्षीण होने लगता है। मन नथ जाता है। पूर्णतया विकार रहित एवं समर्पित हो, उस परम सत्ता के दिव्य नृत्य का उचित धरातल बन पाता है।

महारास की दिव्य लीला भी अपने में गूढ़ आध्यात्मिक रहस्य को संजो हुए हैरासलीला वह भावलीला है, जिसमें माया, दैहिक आकर्षण व श्रृंगार का कोई स्थान नहीं। देहाध्यास लेशमात्र भी नहीं। यह शरीर का नहीं, अपितु आत्मा का रसपूर्ण नृत्य है इस दिव्य नर्तन में गोपियाँ आत्मा रूप थीं और श्री कृष्ण परमात्मा स्वरूप! यह प्रत्येक आत्मा का अपने स्रोत परमात्मा के संग आध्यात्मिक संयोग था। पदम्पुराण में वर्णन आता है कि त्रेता के जिन ऋषिगणों की इच्छा प्रभु राम के संग रहने की थी, वे सब ही द्वापर में गोप-गोपियाँ बन कर आए। ऋषि-आत्माएँ अर्थात् गोपियाँ जन्म-जन्मान्तरों से ब्रह्म रस की पिपासु थीं। और जैसा कि कहा भी गया है- वह ब्रह्म ही परम रस है। पारब्रह्म ने श्री कृष्ण रूप में महारास के माध्यम से इसी परम रस की गोपियों पर वृष्टि की। उनकी चिरकालीन आध्यात्मिक पिपासा को शान्त किया।

 

समग्रतः भगवान श्री कृष्ण की समस्त लीलाएँ दिव्य एवं पारलौकिक हैं उनका चरित्र अत्यंत उदात्त है वे शुद्ध-बुद्ध-मुक्त-चैतन्य रूप हैं उनको एवं उनकी लीलाओं में निहित गूढ़ार्थों को लौकिक बुद्धि द्वारा नहीं समझा जा सकता ब्रह्मज्ञान ही उनको समझने की एक मात्र कुंजी है। एक ब्रह्मज्ञानी ही अन्तर्हृदय की गहराइयों में उतरकर इन लीलाओं के मर्म को समझ सकता है। इनसे प्रेरित होकर जीवन में परमानन्द का अनुभव कर सकता है। जन्माष्टमी के इस पावन पर्व पर सभी भागवत् प्रेमियों को दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान का यही सन्देश है कि आप श्री कृष्ण कन्हैया की बाहरी झांकियों को देखने तक ही सीमित न रहें उसका गुणगान मात्र बाहरी इंद्रियों से ही न सुनें अपितु इस पर्व को सही मायनों में सार्थक करने हेतु इस अवतारी युगपुरुष को ब्रह्मज्ञान द्वारा तत्त्व से जानने की चेष्टा करें

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वित्तीय वर्ष 2026-27 की प्रथम तिमाही में आर्थिक विकास दर ने चौंकाया https://www.rashtratak.com/rashtratak-vittiya-varsh/ Tue, 01 Sep 2026 16:56:56 +0000 https://www.rashtratak.com/?p=2848 दिनांक 31 अगस्त 2026 को सायंकाल में केंद्र सरकार ने भारत के वित्तीय वर्ष 2026-27 की प्रथम तिमाही

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दिनांक 31 अगस्त 2026 को सायंकाल में केंद्र सरकार ने भारत के वित्तीय वर्ष 2026-27 की प्रथम तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि दर के आंकड़े जारी किए हैं। विश्व बैंक एवं अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष सहित अन्य वैश्विक संस्थानों, एसोचेम, भारतीय रिजर्व बैंक आदि के अनुमानों को धत्ता बताते हुए अप्रेल-जून 2026 की तिमाही में भारत के सकल घरेलू उत्पाद में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई है। जबकि, उक्त संस्थानों ने उक्त अवधि में 6.5 प्रतिशत से 7 प्रतिशत के बीच की वृद्धि दर का अनुमान लगाया था। उक्त वृद्धि दर वैश्विक स्तर पर विभिन्न प्रकार की आर्थिक समस्याओं के बीच हासिल हुई है, इसलिए भारत के लिए यह एक मील का पत्थर साबित होगी। रूस-यूक्रेन युद्ध तो बहुत लम्बे समय से चल रहा है, ईरान-अमेरिका/इजराईल युद्ध भी इस तिमाही में जारी रहा, जिसके चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि देखने को मिली थी। एक समय तो कच्चे तेल की कीमतें 120 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच गई थीं। ज्ञातव्य हो कि भारत अपनी जरूरत का 80 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करता है। ईरान द्वारा स्ट्रेट ओफ होर्मुज को बंद करने के पश्चात इस मार्ग से गुजरने वाले तेल के जहाजों को रोक दिया गया था एवं कच्चे तेल की आपूर्ति पर इसका विपरीत प्रभाव पड़ा था। परंतु, भारत ने इस दयनीय स्थिति को बहुत ही सूझ बूझ के साथ सम्भाला और अन्य कई देशों से तेल एवं गैस का आयात जारी रखा, जिससे भारत में न तो तेल की आपूर्ति कम हुई और न ही भारत में पेट्रोल एवं डीजल की कीमतों में भारी वृद्धि हुई। जबकि अन्य कई  देशों में तो पेट्रोल एवं डीजल की कीमतों में 50 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज हुई है।

भारत के युवाओं (जेन-जी) को इस बात को समझना होगा कि भारत आज आर्थिक विकास के जिस दौर से गुजर रहा है, वह बहुत ही संवेदनशील है। यदि देश में किसी भी प्रकार की अराजकता फैलायी जाती है तो आर्थिक विकास की पटरी से भारत डीरेल हो सकता है। आगे आने वाले 10 वर्षों तक भारत यदि विकास दर की इसी ट्रेजेक्टरी में अपने आप को बनाए रखने में सफल होता है तो भारत के वर्ष 1947 में विकसित राष्ट्र बनने के सपने को साकार होने से कोई रोक नहीं सकता है। अर्थ के लगभग प्रत्येक क्षेत्र में अप्रेल-जून 2026 तिमाही में सराहनीय वृद्धि दर हासिल की गई है। सकल मूल्य संवर्धन में वृद्धि दर 8.2 प्रतिशत की रही है जो अप्रेल-जून 2025 की तिमाही में 7 प्रतिशत की रही थी। विनिर्माण के क्षेत्र में वृद्धि दर पिछले वर्ष की तिमाही में 8.3 प्रतिशत की रही थी जो इस वर्ष की तिमाही में बढ़कर 9.2 प्रतिशत की हो गई है। इसी प्रकार सेवा के क्षेत्र में भी आर्थिक विकास दर इस वर्ष की प्रथम तिमाही में बढ़कर 10 प्रतिशत पर पहुंच गई जो पिछले वर्ष इसी अवधि में 8 प्रतिशत रही थी। भारत की अर्थव्यवस्था उपभोग आधारित है, अतः निजी उपभोग में इस वर्ष की तिमाही में 7.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है जो पिछले वर्ष इसी अवधि में 6.8 प्रतिशत रही थी। सकल स्थिर पूंजी निर्माण में भी अतुलनीय 11.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई है जो पिछले वर्ष की इसी अवधि में केवल 5.8 प्रतिशत की रही थी। इसी प्रकार, रोजगार निर्मित करने वाले क्षेत्रों में भी विकास दर प्रभावशाली रही है। वित्तीय क्षेत्र में वृद्धि दर 12.1 प्रतिशत की दर्ज हुई है तो व्यापार, होटल, यातायात एवं संचार के क्षेत्र में 8.5 प्रतिशत की विकास दर हासिल की गई है। साथ ही गैस एवं विजली उत्पादन में भी वृद्धि दर 8.9 प्रतिशत की रही है।

वित्तीय वर्ष 2026-27 की प्रथम तिमाही में सराहनीय विकास दर हासिल करने को केंद्र सरकार की योजनाओं की सफलता के रूप में भी देखा जा सकता है। केंद्र सरकार ने मेक इन इंडिया नामक योजना को तेजी से आगे बढ़ाया है और इसने भारत को कई क्षेत्रों में आत्म निर्भर बनाने का कार्य सफलतापूर्वक किया है। विशेष रूप से सूचना प्रौद्योगिकी, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, डिजिटल भुगतान, फिन टेक, इंजिनीयरिंग डिजाइन, व्यापार परामर्श, वैश्विक ग्लोबल योग्यता सेंटर, आदि क्षेत्रों में भारत आज पूरे विश्व में लीड कर रहा है। मेक इन इंडिया योजना ने भारतीय नागरिकों में जोश भरा और भारत की प्रतिभा का डंका पूरे विश्व में बज गया है। दूसरे, भारत में उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना को भी लागू किया गया। इस योजना ने भारत को उपभोक्ता बाजार से निकालकर मजबूत वैश्विक विनिर्माण हब में बदल दिया है। उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत 14 प्रमुख क्षेत्रों में करीब 2.3 लाख करोड़ रुपए का निवेश हुआ है, 16.5 लाख करोड़ रुपए से अधिक का कुल उत्पादन हुआ है एवं 12 लाख से अधिक रोजगार के नए अवसर निर्मित हुए। इसके उपरांत प्रारम्भ हुई प्रधानमंत्री गति शक्ति योजना के अंतर्गत सड़क, रेल, बंदरगाह, एयरपोर्ट और लाजिस्टिक को पहली बार इंटीग्रेटेड तरीके से जोड़ने की कोशिश की गई। समर्पित मालवाहक गलियारों का निर्माण तो इस दृष्टि से मील का पत्थर साबित हुए हैं। नए एक्स्प्रेस वे ने माल ढुलाई का समय घटाया। लागत को कम किया और भारतीय उत्पादों को वैश्विक बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनाया। 86,300 करोड़ अमेरिकी डॉलर का निर्यात इस सफलता की कहानी को दर्शाता है।

निर्यात में अतुलनीय वृद्धि दर उस समय पर हासिल की गई है जब अमेरिका की टैरिफ नीति ने पूरे विश्व को परेशान किया हुआ है। साथ ही, रूस यूक्रेन युद्ध, ईरान इजराईल-अमेरिका युद्ध, इजराईल हमास युद्ध एवं वैश्विक स्तर पर अस्थिरता का बने रहना भी शामिल है। इन परिस्थितियों के बीच भारत ने उत्पादों एवं सेवा के क्षेत्र में निर्यात का रिकार्ड बनाया है। जबकि कई देशों की अर्थव्यवस्थाओं में सुस्ती बनी हुई है। भारत के कुल निर्यात में सेवा क्षेत्र की कुल हिस्सेदारी तेजी से बढ़ रही है। यदि भारत को चीन जैसी विनिर्माण क्षेत्र की ताकत बनाना है तो भारत को हाई वैल्यू मैन्युफेक्चरिंग, सेमीकंडक्टर, मशीनरी, और सूक्षम, लघु एवं मध्यम उद्योग के क्षेत्र को और अधिक मजबूत करना होगा। घरेलू उत्पाद बढ़ाकर न केवल उत्पादों के आयात को कम किये जाने का प्रयास किया जा रहा है बल्कि वैश्विक बाजार में अपनी हिस्सेसरी भी बढ़ाई जा रही है। भारत में हाल ही में आई मोबाइल एवं इलेक्ट्रॉनिक क्रांति का भी इसमें बहुत बड़ा योगदान है। वर्ष 2014 में भारत में केवल 2 मोबाइल उत्पादन इकाईयां कार्यरत थीं। आज भारत मोबाइल निर्माण के क्षेत्र में दुनिया का दूसरा  सबसे बड़ा निर्माता देश बन गया है। ऐपल की फ्लेगशिप कम्पनी अब मैन्युफेक्चरिंग इन इंडिया की ओर आगे बढ़ रही हैं। इलेक्ट्रॉनिक उत्पादन 2014-15 के 1.9 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 2025-26 में 13.11 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। रक्षा के क्षेत्र में भी उत्पादन एवं निर्यात तीव्र गति से आगे बढ़ रहा है। रक्षा के क्षेत्र में भारत अपनी छोटी मोटी जरूरतों के लिए अन्य देशों की ओर देखता था आज वह फिलिपींस को ब्रह्मोस मिसाईल का निर्यात कर रहा है। कई अफ्रीकी देशों को मेड इन इंडिया हेलिकोप्टर निर्यात कर रहा है। अब देश की कुल जरूरत का लगभा 65 प्रतिशत रक्षा उत्पाद देश में ही निर्मित हो रहा हैं। जो रक्षा उत्पादन वर्ष 2014-15 में 46,429 करोड़ रुपए का था वह 2025-26 में बढ़कर 1.78 लाख करोड़ रुपए के रिकार्ड स्तर पर पहुंच चुका है। रक्षा निर्यात 38,424 करोड़ रुपए के उच्चत्तम स्तर पर पहुंच चुका है। आज रक्षा के क्षेत्र में विभिन्न उत्पादों का निर्यात 100 से अधिक देशों को किया जा रहा है। ऑटोमोबाइल के क्षेत्र में उत्पादन में अतुलनीय वृद्धि दर्ज हुई है एवं फार्मा क्षेत्र में तो भारत को फार्मेसी आफ द वर्ल्ड कहा जा रहा है। भारत की एक्स्पोर्ट बास्केट भी बढ़ रही है – पेट्रोलीयम उत्पाद, इंजिनीयरिंग उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा, ऑटोमोबाइल, टेक्स्टायल जैसे कई क्षेत्रों में विकास दर तेजी से बढ़ रही है। भारत किसी एक सेक्टर पर निर्भर नहीं है। कई क्षेत्रों में एक साथ आगे बढ़ रहा है। दुनिया की सप्लाई चैन में भारत की नई भूमिका तय हो रही है। भारत एक लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर का निर्यात करने की ओर आगे बढ़ रहा है।

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दुनिया जब बुरे दौर में है तब भारत के आर्थिक उजाले https://www.rashtratak.com/rashtratak-duniya/ Tue, 01 Sep 2026 16:52:20 +0000 https://www.rashtratak.com/?p=2844 दुनिया आज जिस दौर से गुजर रही है, वह आर्थिक और सामरिक दोनों दृष्टियों से असाधारण चुनौतियों का

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दुनिया आज जिस दौर से गुजर रही है, वह आर्थिक और सामरिक दोनों दृष्टियों से असाधारण चुनौतियों का दौर है। रूस-यूक्रेन युद्ध के प्रभाव, पश्चिम एशिया में तनाव, अमेरिका और चीन के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा, वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता, आपूर्ति शृंखला में व्यवधान और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने दुनिया की बड़ी-बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के सामने कठिन प्रश्न खड़े कर दिए हैं। ऐसे समय में भारत की अर्थव्यवस्था ने जिस मजबूती का परिचय दिया है, वह केवल एक आर्थिक आंकड़ा नहीं, बल्कि बदलते भारत की सामर्थ्य का प्रमाण है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की 7.8 प्रतिशत वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि ने वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में भारत को ऐसी उम्मीद के रूप में प्रस्तुत किया है, जिसकी ओर दुनिया आश्चर्य और विश्वास दोनों के साथ देख रही है। इस विकास दर ने वैश्विक अनिश्चितताओं के दौर में भारत की आर्थिक शक्ति और आत्मविश्वास को नई ऊंचाई दी है एवं एक उजाला बिखेरा है। यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह वृद्धि ऐसे समय दर्ज हुई है, जब परिस्थितियां सामान्य नहीं थीं। महंगाई, ऊर्जा संकट, भू-राजनीतिक तनाव और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था का विकास पथ मजबूत बना रहा। पिछले वर्ष इसी तिमाही में विकास दर 6.9 प्रतिशत थी। यानी एक वर्ष में आर्थिक वृद्धि की गति में उल्लेखनीय सुधार दिखाई दिया है। घरेलू मांग की मजबूती, सरकारी पूंजीगत व्यय, विनिर्माण, निर्माण और निर्यात जैसे क्षेत्रों का योगदान इस प्रदर्शन के पीछे महत्वपूर्ण रहा है।
आर्थिक विकास का वास्तविक अर्थ तभी समझ में आता है, जब उसे उसके वैश्विक संदर्भ में देखा जाए। आज दुनिया की अर्थव्यवस्थाएं केवल आर्थिक नीतियों से प्रभावित नहीं हो रहीं, बल्कि युद्ध, कूटनीतिक तनाव, ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक संबंध भी उनकी दिशा तय कर रहे हैं। अमेरिका और चीन के बीच आर्थिक एवं रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है। पश्चिम एशिया का तनाव ऊर्जा बाजार और वैश्विक आपूर्ति तंत्र के लिए चिंता पैदा करता है। इन परिस्थितियों में भारत का अपेक्षाकृत तेज आर्थिक विकास यह संकेत देता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था ने अपने लिए ऐसे मजबूत घरेलू आधार तैयार किए हैं, जो बाहरी झटकों को सहने की क्षमता रखते हैं। यही वह परिवर्तन है जो भारत को केवल एक बड़ी अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि वैश्विक आर्थिक शक्ति बनने की दिशा में आगे ले जा रहा है। भारत की सबसे बड़ी ताकत उसका विशाल घरेलू बाजार है। करोड़ों उपभोक्ताओं की मांग, बढ़ता मध्यम वर्ग, डिजिटल अर्थव्यवस्था का विस्तार, बुनियादी ढांचे पर निवेश और बदलती उपभोग संस्कृति ने अर्थव्यवस्था को आंतरिक गति प्रदान की है। जब वैश्विक बाजार अनिश्चित हों, तब घरेलू मांग अर्थव्यवस्था के लिए सुरक्षा-कवच का काम करती है। इसीलिए वर्तमान विकास दर में घरेलू मांग की मजबूती को विशेष महत्व दिया जाना चाहिए।
इस आर्थिक प्रदर्शन की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह भी है कि वृद्धि केवल एक क्षेत्र के सहारे नहीं टिकी है। विनिर्माण क्षेत्र में 9.2 प्रतिशत की वृद्धि इस बात का संकेत है कि भारत धीरे-धीरे उत्पादन आधारित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। लंबे समय तक भारत की अर्थव्यवस्था को मुख्यतः सेवा क्षेत्र की शक्ति के रूप में देखा जाता रहा, लेकिन अब देश में उत्पादन बढ़ाने, घरेलू उद्योगों को प्रोत्साहन देने और बुनियादी ढांचे के विस्तार की दिशा में किए गए प्रयासों से औद्योगिक क्षेत्र के लिए नई संभावनाएं पैदा हुई हैं। निर्माण क्षेत्र भी रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। सड़कें, रेल, बंदरगाह, हवाई अड्डे, आवास, औद्योगिक गलियारे और डिजिटल बुनियादी ढांचे में निवेश का प्रभाव केवल आर्थिक वृद्धि के आंकड़ों में नहीं दिखाई देता, बल्कि उससे भविष्य की आर्थिक क्षमता भी निर्मित होती है।
भारत की वर्तमान आर्थिक यात्रा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अपनाई गई नीतियों की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। पिछले वर्षों में सरकार ने बुनियादी ढांचे, डिजिटल भुगतान, वित्तीय समावेशन, विनिर्माण, नए उद्यम, आत्मनिर्भरता, ऊर्जा सुरक्षा और औपचारिक अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने पर लगातार जोर दिया है। जनधन खातों से लेकर डिजिटल भुगतान तक और राजमार्गों से लेकर रेलवे के आधुनिकीकरण तक, आर्थिक गतिविधियों का एक व्यापक तंत्र तैयार हुआ है। वस्तु एवं सेवा कर ने देश के बड़े बाजार को अधिक एकीकृत करने में भूमिका निभाई है। दिवाला एवं दिवालियापन संहिता जैसी व्यवस्थाओं ने कारोबारी वातावरण को अधिक व्यवस्थित बनाने का प्रयास किया है। उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजनाओं ने अनेक क्षेत्रों में घरेलू उत्पादन और निवेश को बढ़ावा दिया है। इन नीतियों का वास्तविक मूल्यांकन केवल घोषणाओं से नहीं, बल्कि उनके परिणामों से होना चाहिए। सकल घरेलू उत्पाद के ताजा आंकड़े इस दिशा में एक सकारात्मक संकेत अवश्य देते हैं।
आम नागरिक के लिए आर्थिक विकास का अर्थ तभी सार्थक है, जब उसके जीवन में रोजगार के अवसर बढ़ें, आय में वृद्धि हो, महंगाई नियंत्रित रहे, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर हों तथा जीवन की समग्र गुणवत्ता में सुधार आए। सकल घरेलू उत्पाद हमें अर्थव्यवस्था की गति बताता है, लेकिन यह नहीं बताता कि उस विकास का लाभ समाज के विभिन्न वर्गों तक किस प्रकार पहुंच रहा है। इसलिए भारत की अगली चुनौती तेज विकास से आगे बढ़कर गुणवत्तापूर्ण और समावेशी विकास सुनिश्चित करना है। आर्थिक विकास की सबसे महत्वपूर्ण कसौटी रोजगार है। विनिर्माण और निर्माण क्षेत्र का विस्तार इसलिए आशाजनक है क्योंकि ये बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा करने की क्षमता रखते हैं। लेकिन भविष्य में भारत को ऐसे उद्योगों की आवश्यकता होगी, जो बड़ी संख्या में युवाओं को सम्मानजनक और स्थायी रोजगार दे सकें। भारत की युवा आबादी उसकी सबसे बड़ी शक्ति है। यदि उसे कौशल, शिक्षा, तकनीक और रोजगार के पर्याप्त अवसर मिलते हैं तो यही युवा शक्ति भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने की सबसे बड़ी ऊर्जा बन सकती है।
भारत का लक्ष्य केवल आत्मनिर्भर बनना नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में नेतृत्वकारी भूमिका निभाना होना चाहिए।

आत्मनिर्भरता का अर्थ दुनिया से अलग होना नहीं, बल्कि अपनी क्षमताओं को इतना मजबूत करना है कि भारत वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सके। आज दुनिया चीन के विकल्प के रूप में विभिन्न उत्पादन केंद्रों की तलाश कर रही है। भारत के पास विशाल बाजार, युवा मानव संसाधन, तकनीकी क्षमता और लोकतांत्रिक व्यवस्था जैसी विशिष्ट ताकतें हैं। यदि भारत विनिर्माण, अर्धचालक, इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा उत्पादन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अंतरिक्ष तकनीक और उच्च गुणवत्ता वाली सेवाओं में अपनी क्षमता बढ़ाता है, तो वह वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में कहीं अधिक प्रभावशाली भूमिका निभा सकता है। 2047 का विकसित भारत केवल सरकार का संकल्प नहीं, बल्कि देशवासियों की सामूहिक आकांक्षा है। 7.8 प्रतिशत की विकास दर इस यात्रा में एक उत्साहजनक पड़ाव है, मंजिल नहीं। भारत को लगातार उच्च विकास दर, मजबूत वित्तीय व्यवस्था और स्थिर आर्थिक वातावरण के साथ-साथ बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि उत्पादकता, कौशल विकास, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा पर भी समान ध्यान देना होगा।
भारत की आर्थिक कहानी अब केवल आंकड़ों की कहानी नहीं रह गई है। यह आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता और वैश्विक नेतृत्व की कहानी बन रही है। दुनिया जब युद्ध और आर्थिक अस्थिरता की छाया में अपनी दिशा तलाश रही है, तब भारत का मजबूत आर्थिक प्रदर्शन उसे एक भरोसेमंद और संभावनाशील शक्ति के रूप में स्थापित कर रहा है। 7.8 प्रतिशत की विकास दर निश्चित रूप से भारत के लिए गर्व का विषय है। लेकिन इससे भी महत्वपूर्ण यह है कि भारत ने यह संदेश दिया है कि वैश्विक संकटों के बीच भी उसकी आर्थिक बुनियाद मजबूत है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चल रही आर्थिक नीतियों और योजनाओं को अब अगले चरण में अधिक रोजगार, अधिक निवेश, अधिक उत्पादन और अधिक समान अवसरों से जोड़ना होगा। भारत के आर्थिक आकाश पर उगता यह उजाला तभी स्थायी प्रकाश बनेगा, जब विकास की रोशनी देश के अंतिम व्यक्ति के जीवन तक पहुंचे। यही 2047 के विकसित भारत की वास्तविक कसौटी होगी और यही आर्थिक शक्ति को जनशक्ति में बदलने का मार्ग भी।

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समाधान फाउंडेशन के द्वारा “डा. राजीव नारायण मिश्र को महामना सम्मान” https://www.rashtratak.com/dr-rajiv-narayan-mishra/ Mon, 31 Aug 2026 04:33:50 +0000 https://www.rashtratak.com/?p=2835 अपर पुलिस आयुक्त गौतमबुद्ध नगर को समाधान फाउंडेशन द्वारा सम्मानित गौतमबुद्ध नगर में आयोजित सम्मान समारोह में महामना

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अपर पुलिस आयुक्त गौतमबुद्ध नगर को समाधान फाउंडेशन द्वारा सम्मानित

गौतमबुद्ध नगर में आयोजित सम्मान समारोह में महामना सम्मान प्राप्त करते हुए अपर पुलिस आयुक्त डॉ. राजीव नारायण मिश्र एवं समाधान फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ प्रमोद तिवारी

गौतमबुद्ध नगर, २६ अगस्त 2026 – सेवा, समर्पण और जनकल्याण की भावना को साकार करते हुए गौतमबुद्ध नगर के अपर पुलिस आयुक्त डॉ. राजीव नारायण मिश्र को समाधान फाउंडेशन द्वारा प्रतिष्ठित “महामना सम्मान” से सम्मानित किया गया। राजधानी दिल्ली के निकट गौतमबुद्ध नगर पुलिस कमिश्नरेट परिसर में आयोजित गरिमामय समारोह में उन्हें यह सम्मान पुलिस सेवा में उत्कृष्ट योगदान, कानून-व्यवस्था के प्रभावी प्रबंधन तथा जनसामान्य के कल्याण हेतु किए गए निरंतर प्रयासों के लिए प्रदान किया गया।

 समाधान फाउंडेशन द्वारा  डॉ. मिश्र के कार्यकाल की सराहना करते हुए कहा गया कि उनके नेतृत्व में गौतमबुद्ध नगर में पुलिसिंग को अधिक संवेदनशील, पारदर्शी और जनोन्मुख बनाया गया है। अपराध नियंत्रण, महिला सुरक्षा, साइबर अपराध रोकथाम तथा सामुदायिक पुलिसिंग के क्षेत्र में उनके नवाचारों ने आम नागरिकों का विश्वास पुलिस के प्रति और प्रगाढ़ किया है। डॉ. मिश्र ने सदैव पुलिस को सेवा का माध्यम माना है और जनसमस्याओं के त्वरित समाधान को अपनी प्राथमिकता बनाया है।

सम्मान ग्रहण करने के पश्चात डॉ. राजीव नारायण मिश्र ने कहा, कि “पुलिस का धर्म है जनता की सेवा और सुरक्षा। यह सम्मान मेरे लिए व्यक्तिगत नहीं, बल्कि पूरे गौतमबुद्ध नगर पुलिस बल के समर्पण और परिश्रम का सम्मान है। हम निरंतर यह प्रयास करेंगे कि कानून का राज स्थापित हो और प्रत्येक नागरिक स्वयं को सुरक्षित महसूस करे।”यह सम्मान के लिए समाधान फाउंडेशन ट्रस्ट का आभारी हैं जो आज सम्मान प्रतीक चिह्न देकर सम्मानित किया गया हैं ।

समाधान फाउंडेशन के संस्थापक अध्यक्ष डॉ प्रमोद तिवारी ने बताया कि महामना सम्मान प्रतिवर्ष उन व्यक्तियों को दिया जाता है जिन्होंने समाज सेवा, राष्ट्र निर्माण तथा जनकल्याण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया हो। डॉ. मिश्र द्वारा कोविड काल से लेकर वर्तमान तक कानून व्यवस्था बनाए रखने, सड़क सुरक्षा अभियान चलाने, तथा युवा-जन संवाद कार्यक्रमों के माध्यम से पुलिस और जनता के बीच विश्वास बढ़ाने के कार्य को विशेष रूप से सराहा गया।

कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्य लोगों ने कहा कि ऐसी सम्मान परंपरा समाज में सेवा भाव को प्रोत्साहित करती है और अधिकारियों को और अधिक प्रेरित करती है।

*विशेष – महामना सम्मान:
– स्थापित: 2020, समाधान फाउंडेशन द्वारा
– उद्देश्य: समाज सेवा, शिक्षा, स्वास्थ्य व सुरक्षा क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान को सम्मानित करना
– पूर्व सम्मानित: शिक्षाविद, चिकित्सक, सामाजिक कार्यकर्ता व पुलिस अधिकारी
– इस वर्ष: पुलिस सेवा एवं जनकल्याण श्रेणी में डॉ. राजीव नारायण मिश्र
– सम्मान स्वरूप: प्रशस्ति पत्र, अंगवस्त्र एवं स्मृति चिह्न

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धर्म संसद और भारतीय संसद मिलकर काम करें तो भारत विश्वगुरु बनेगा https://www.rashtratak.com/dharma-sansad/ Sat, 29 Aug 2026 00:49:13 +0000 https://www.rashtratak.com/?p=2791 धर्म संसद और भारतीय संसद मिलकर काम करें तो भारत विश्वगुरु बनेगा।   Page 2 – संपादकीय: प्रिय

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धर्म संसद और भारतीय संसद मिलकर काम करें तो भारत विश्वगुरु बनेगा।

 

Page 2 –

संपादकीय:
प्रिय पाठकों, राष्ट्र समाज का यह विशेषांक ‘सनातन धर्म संसद एवं भारतीय संसद’ एक ऐतिहासिक प्रयास है। जब ऋषि धर्म संसद में बैठकर राष्ट्र कल्याण पर चर्चा करते थे, तब से लेकर आज की संसद तक भारत की आत्मा एक ही रही – धर्म, न्याय और लोक कल्याण। सनातन धर्म संसद नैतिकता देती है, भारतीय संसद कानून देती है। दोनों का लक्ष्य राष्ट्र कल्याण है। इस अंक में हमने दोनों को आमने-सामने रखा है ताकि युवा पीढ़ी अपनी दोनों परंपराओं को समझे। मुझे विश्वास है यह अंक आपको नई दिशा देगा।
– डॉ. प्रमोद तिवारी, संपादक, 9911662767

*Page 4 – सनातन धर्म संसद परिचय:*
सनातन धर्म संसद कोई भवन नहीं, एक विचार है। प्राचीन भारत में धर्म से जुड़े सभी निर्णय धर्म संसद में होते थे। इसमें ऋषि, आचार्य, मुनि, विद्वान बैठते थे। उद्देश्य – धर्म की स्थापना और अधर्म का नाश। मुख्य सिद्धांत: वेद आधारित निर्णय, सर्वसम्मति, राष्ट्रहित सर्वोपरि, शास्त्रार्थ से निर्णय। आज भी हर कुंभ, अर्धकुंभ में धर्म संसद होती है जो गौ रक्षा, गंगा संरक्षण, मंदिर, संस्कृति पर दिशा देती है।

Page 5 – सनातन इतिहास:*
इतिहास गवाह है आदि शंकराचार्य ने चार पीठों (ज्योतिर्मठ, द्वारका, पुरी, श्रृंगेरी) की स्थापना कर धर्म संसद परंपरा को व्यवस्थित किया। हर 12 साल महाकुंभ, 6 साल अर्धकुंभ, 3 साल कुंभ में देश भर के अखाड़े, शंकराचार्य, महामंडलेश्वर एकत्र होते हैं। पिछले 20 वर्षों में हरिद्वार 2010, प्रयाग 2013, 2019, उज्जैन 2016 की धर्म संसदों ने गौ हत्या बंदी, गंगा अविरल, राम मंदिर, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, धर्मांतरण रोक जैसे प्रस्ताव पारित किए।

 

Page 6 – स्वरूप:*
धर्म संसद का स्वरूप लोकतांत्रिक है पर आधार आध्यात्मिक है। इसमें अध्यक्ष नहीं, धर्माचार्य होते हैं। वोट नहीं, शास्त्रार्थ होता है। सदस्यता ज्ञान आधारित, जन्म नहीं। कार्य: 1. धर्म पर संकट पर चर्चा 2. समाज को दिशा 3. सरकार को सुझाव 4. नई पीढ़ी को संस्कार। इसमें चारों शंकराचार्य, 13 अखाड़ों के आचार्य महामंडलेश्वर, विद्वत परिषद के विद्वान। निर्णय सर्वसम्मति से। आज जरूरत है धर्म संसद और भारतीय संसद में संवाद हो।

Page 7 – चित्र गैलरी:* [फोटो 1 यज्ञ हवन, फोटो 2 साधु सम्मेलन, फोटो 3 ॐ गेरुआ ध्वज, फोटो 4 प्राचीन मंदिर]


संतों के विचार – विशेष

*सुधांशु जी महाराज*

– सनातन में ही जीवन का सार है, भक्ति से ही मुक्ति है।

*योगी आदित्यनाथ जी महाराज*

Page 8 – भारतीय संसद परिचय:*
भारतीय संसद 140 करोड़ लोगों की आवाज, लोकतंत्र का मंदिर। दो सदन: लोकसभा (543+2) जनता द्वारा सीधे चुनी, राज्यसभा (245) राज्यों का प्रतिनिधित्व। कार्य: कानून बनाना, सरकार पर नियंत्रण, जनता के सवाल उठाना, बजट पास करना, संविधान संशोधन। संविधान ने संसद को सर्वोच्च बनाया। यहाँ से देश की दिशा तय होती है।

*Page 9 – इतिहास:*
पुरानी संसद भवन 1927 में बना, 96 साल सेवा की। इसी में संविधान सभा 1946-49 चली, पं. नेहरू ने 15 अगस्त 1947 को भाषण दिया। नया संसद भवन 28 मई 2023 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समर्पित किया। सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत बना।

*Page 10 – नया संसद भवन:*
नया संसद भवन नए भारत का संकल्प। त्रिकोणीय आकार, 888 लोकसभा सीटें, 384 राज्यसभा सीटें, 1272 संयुक्त सत्र। मयूर द्वार, अश्व द्वार, गज द्वार, हंस द्वार। हर सीट पर टच स्क्रीन, डिजिटल वोटिंग, 360 डिग्री कैमरा। संविधान हॉल में मूल संविधान की प्रति। आत्मनिर्भर भारत का प्रतीक। इसमें सनातन प्रतीक – ओंकार, स्वस्तिक, कमल, मोर, बanyan। यह 150 साल की जरूरत पूरी करेगा।

*Page 11 – चित्र गैलरी:* [फोटो 1 लोकसभा अंदर, फोटो 2 राज्यसभा, फोटो 3 तिरंगा, फोटो 4 संविधान पुस्तक]

*Page 12 – तुलनात्मक अध्ययन:*

सनातन धर्म संसद भारतीय संसद
आधार – वेद, उपनिषद, गीता आधार – संविधान
सदस्य – संत, आचार्य, विद्वान सदस्य – सांसद, जनता प्रतिनिधि
चुनाव – ज्ञान, तप, त्याग से चुनाव – वोट से
उद्देश्य – धर्म रक्षा, मोक्ष उद्देश्य – जन सेवा, विकास
निर्णय – शास्त्रार्थ, सर्वसम्मति निर्णय – बहुमत, वोट

दोनों का लक्ष्य – राष्ट्र कल्याण। जरूरत समन्वय की।

 

सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति की रक्षा ही हमारा संकल्प है, राम राज्य ही लक्ष्य है।
Page 13 – क्या सीखें:*
धर्म संसद से सीखें – नैतिकता, त्याग, दीर्घकालीन सोच, सर्वे भवन्तु सुखिनः। भारतीय संसद से सीखें – भागीदारी, पारदर्शिता, जवाबदेही, सबका साथ। दोनों मिल जाएं तो भारत विश्वगुरु। आज कई सांसद संतों से मिलते हैं, कई संत संसद जाते हैं – शुभ संकेत।

*Page 14 – संविधान प्रस्तावना:*
“हम भारत के लोग, भारत को एक संपूर्ण प्रभुत्व-संपन्न समाजवादी पंथनिरपेक्ष लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए, तथा उसके समस्त नागरिकों को: सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक न्याय, विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता, प्रतिष्ठा और अवसर की समता प्राप्त कराने के लिए, तथा उन सब में व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखंडता सुनिश्चित करने वाली बंधुता बढ़ाने के लिए…” ये चार शब्द – न्याय, स्वतंत्रता, समानता, बंधुत्व – सनातन के मूल हैं।

*Page 15 – मूल अधिकार:*
6 मूल अधिकार: 1. समानता का अधिकार (अनु 14-18) 2. स्वतंत्रता का अधिकार (19-22) 3. शोषण के विरुद्ध (23-24) 4. धर्म स्वतंत्रता (25-28) – हर व्यक्ति अपना धर्म पालन, प्रचार कर सकता है 5. संस्कृति-शिक्षा (29-30) 6. संवैधानिक उपचार (32)। धर्म स्वतंत्रता सनातन उदारता का प्रमाण।

*Page 16 – संविधान और सनातन मूल्य:*
संविधान में सनातन झलक: पंथनिरपेक्षता = सर्व धर्म समभाव (ऋग्वेद), न्याय = धर्मो रक्षति रक्षितः, नारी शक्ति = यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, गौ संरक्षण अनुच्छेद 48, पर्यावरण संरक्षण = वेदों में प्रकृति पूजा, ग्राम पंचायत अनु 40 = राम राज्य। संविधान निर्माताओं ने भारतीय संस्कृति को सम्मान दिया।

*Page 17 – वर्तमान राजनीति:*
आज राजनीति में धर्म और विकास दोनों की चर्चा। सबका साथ सबका विकास सबका विश्वास, विरासत भी विकास भी, मंदिर पुनरुद्धार – काशी, अयोध्या, उज्जैन महाकाल, नई शिक्षा नीति में भारतीय ज्ञान परंपरा, योग-आयुर्वेद को सम्मान। राजनीति अब सिर्फ सत्ता नहीं, संस्कृति की भी बात कर रही है।

*Page 18 – संतुलन:*
धर्म राजनीति को नैतिक बनाता है, राजनीति धर्म को व्यावहारिक बनाती है। यदि धर्म अलग तो राजनीति स्वार्थी, यदि राजनीति अलग तो धर्म अव्यावहारिक। चाणक्य ने कहा – धर्म के बिना राज्य नहीं। संतुलन जरूरी – राजधर्म।

*Page 19 – विशेष रिपोर्ट:*
राष्ट्र समाज टीम ने 50 संतों और 30 सांसदों से बात की। 90% संतों ने कहा संसद में धर्म की बात होनी चाहिए। 85% सांसदों ने कहा संतों के सुझाव महत्वपूर्ण। 95% जनता चाहती है दोनों में संवाद हो। सर्वे में सामने आया – युवा दोनों संस्थाओं को साथ देखना चाहते हैं।

*स्वामी अवधेशानंद गिरि जी महाराज*

वेदांत ही विश्व को शांति देगा, ज्ञान ही सनातन है, सेवा ही धर्म है।

जगद्गुरु शंकराचार्य जी महाराज  – सनातन ही विश्व का कल्याण है, धर्म ही राष्ट्र है।

चारों महापुरुषों ने कहा – धर्म संसद और भारतीय संसद मिलकर काम करें तो भारत विश्वगुरु बनेगा।

डॉ. प्रमोद तिवारी जी की यह पुस्तक धर्म और राजनीति का अद्भुत संगम है। युवा पीढ़ी को सनातन से जोड़ना जरूरी है। मंदिर शिक्षा केंद्र बनें। एकता ही सनातन की शक्ति है।

Page 20 – युवा राय:*
1000 युवाओं (18-30 साल) से पूछा – क्या आप धर्म संसद जानते हैं? 70% भारतीय संसद जानते, 30% धर्म संसद भी जानते, 95% ने कहा दोनों स्कूल-कॉलेज में पढ़ाना चाहिए। 80% ने कहा इस अंक से जानकारी मिली। युवाओं में सनातन और संविधान दोनों के प्रति जिज्ञासा।

*Page 21 – संतों के विचार:*
“धर्म बिना राजनीति लंगड़ी, राजनीति बिना धर्म अंधी” – स्वामी अवधेशानंद। “संसद में गीता होनी चाहिए” – बाबा रामदेव। “सनातन ही संविधान की आत्मा है” – योगी आदित्यनाथ। “दोनों मिलकर विश्वगुरु बनाएंगी” – श्री श्री रविशंकर। “धर्म संसद समाज की आत्मा” – स्वामी रामभद्राचार्य।

*Page 22 – नेताओं के विचार:*
“भारत लोकतंत्र की जननी” – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। “संविधान पवित्र ग्रंथ” – राष्ट्रपति। “संसद में हर धर्म का सम्मान” – लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला। “धर्म और राजनीति दोनों जनसेवा” – सांसद। “संविधान और सनातन एक दूसरे के पूरक” – गृह मंत्री।

*Page 23 – महत्वपूर्ण व्यक्तित्व:* [फोटो बॉक्स 1 बड़ा मुख्य अतिथि, 3 मध्यम – आप नाम फोटो भेजेंगे तो लगा दूंगा]

*Page 24 – लोहिया ग्रुप:*
प्रायोजक सहयोगी लोहिया ग्रुप ने विशेषांक प्रकाशन में सहयोग दिया। लोहिया ग्रुप निर्माण, रियल एस्टेट, समाज सेवा में अग्रणी। हम आभारी हैं। संपर्क: लोहिया ग्रुप

*Page 25 – राष्ट्र तक | राष्ट्र समाज:*
राष्ट्र तक राष्ट्रवादी मीडिया समूह। उद्देश्य – राष्ट्र प्रथम। समाचार चैनल, समाचार पत्र, डिजिटल, विशेषांक प्रकाशन। पता: 298/299 B-9 Sector 5 Rohini New Delhi 110086 Web: http://www.rashtratak.comEmail: rashtratak@gmail.com

*Page 26-27 – विज्ञापन पृष्ठ:* [4-5 विज्ञापन बॉक्स] विज्ञापन बुक करें: 9911662767

*Page 28 – आभार:*
आभार – सभी संतगण, सांसदगण, लोहिया ग्रुप, राष्ट्र तक टीम, पाठकगण। विशेष आभार – आपका प्रेम आशीर्वाद बना रहे। – संपादक डॉ प्रमोद तिवारी 9911662767


Page 29 – संपर्क सदस्यता:*
संपादक डॉ प्रमोद तिवारी 9911662767 पता Rohini Web http://www.rashtratak.com QR Code – Website, YouTube, Facebook, Instagram

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Page 32 – बैक कवर: राष्ट्र समाज विशेषांक सनातन धर्म संसद एवं भारतीय संसद | संपादक डॉ प्रमोद तिवारी | प्रायोजक लोहिया ग्रुप | संपर्क 9911662767 | मूल्य ₹100/- | Barcode

 

 

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स्वस्थ नागरिक, अनुशासित युवा, विश्वस्तरीय खिलाड़ी और खेल-संस्कृति से संपन्न समाज-ये विकसित भारत की आधारशिलाएं https://www.rashtratak.com/rashtratak-khel/ Sat, 29 Aug 2026 00:19:23 +0000 https://www.rashtratak.com/?p=2787 राष्ट्रीय खेल दिवस केवल एक महान खिलाड़ी की स्मृति को नमन करने का अवसर नहीं, बल्कि राष्ट्र की

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राष्ट्रीय खेल दिवस केवल एक महान खिलाड़ी की स्मृति को नमन करने का अवसर नहीं, बल्कि राष्ट्र की खेल-चेतना को जगाने एवं खेल आयामों को नये शिखर देने का दिन है। 29 अगस्त को मनाया जाने वाला यह दिवस हॉकी के महानायक मेजर ध्यानचंद की जयंती से जुड़ा है। खेल किसी राष्ट्र की शक्ति का केवल प्रदर्शन नहीं होते, वे उसके आत्मविश्वास, अनुशासन, सामूहिकता और वैश्विक प्रतिष्ठा के दर्पण भी होते हैं। आज जब भारत 2047 में स्वतंत्रता की शताब्दी तक विकसित राष्ट्र बनने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है, तब खेलों को राष्ट्रीय विकास की मुख्यधारा से जोड़ना समय की अनिवार्यता है। स्वस्थ नागरिक, अनुशासित युवा, विश्वस्तरीय खिलाड़ी और खेल-संस्कृति से संपन्न समाज-ये विकसित भारत की आधारशिलाएं हैं।
29 अगस्त 1905 को जन्मे मेजर ध्यानचंद भारतीय हॉकी के ऐसे जादूगर थे, जिन्होंने अपनी स्टिक से केवल गोल नहीं किए, बल्कि दुनिया के खेल मानचित्र पर भारत की पहचान अंकित की।

1928, 1932 और 1936 के ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम की स्वर्णिम सफलता में उनका योगदान ऐतिहासिक रहा। उनके खेल में कौशल के साथ राष्ट्रभक्ति, अनुशासन और समर्पण का अद्भुत समन्वय था। उनके सम्मान में राष्ट्रीय खेल दिवस मनाना वास्तव में उस खेल-दर्शन को याद करना है जिसमें प्रतिभा से बड़ा परिश्रम और व्यक्तिगत उपलब्धि से बड़ा राष्ट्र का गौरव होता है। ध्यानचंद की विरासत आज के खिलाड़ियों को यह संदेश देती है कि खेल का अंतिम लक्ष्य केवल पदक नहीं, बल्कि देश के लिए सम्मान अर्जित करना है। निश्चित तौर पर खेल अब मनोरंजन नहीं, राष्ट्रीय शक्ति हैं। एक समय भारत में खेलों को पढ़ाई या रोजगार के विकल्प के रूप में गंभीरता से नहीं देखा जाता था। आज परिस्थितियां तेजी से बदली हैं। क्रिकेट से आगे बढ़कर एथलेटिक्स, बैडमिंटन, कुश्ती, मुक्केबाजी, निशानेबाजी, भारोत्तोलन, हॉकी, टेबल टेनिस, तीरंदाजी, शतरंज और अनेक अन्य खेलों में भारतीय खिलाड़ी विश्व स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं। नीरज चोपड़ा ने एथलेटिक्स में ओलंपिक स्वर्ण जीतकर भारतीय युवाओं को बताया कि ट्रैक और फील्ड में भी भारत विश्व विजेता बन सकता है। पी. वी. सिंधु ने बैडमिंटन में लगातार दो ओलंपिक पदक जीतकर नई पीढ़ी के लिए आदर्श स्थापित किया। मनु भाकर, डी. गुकेश, मीराबाई चानू, निकहत जरीन, लवलीना बोरगोहेन, अवनि लेखरा, हरमनप्रीत सिंह और अनेक खिलाड़ियों ने अलग-अलग खेलों में भारतीय प्रतिभा की व्यापकता सिद्ध की है। यह बदलाव किसी एक खिलाड़ी की सफलता नहीं, बल्कि बदलती हुई राष्ट्रीय खेल-संस्कृति का संकेत है।
टोक्यो 2020 में भारत ने सात पदक जीते और पेरिस 2024 में छह पदक हासिल किए। पदकों की संख्या भले ही अभी विकसित खेल राष्ट्रों के बराबर न हो, लेकिन भारतीय खेलों की चौड़ाई और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता लगातार बढ़ी है। पैरालंपिक खेलों में भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन तो विशेष रूप से प्रेरणादायी रहा है। उन्होंने यह मिथक तोड़ा है कि शारीरिक सीमाएं सफलता की सीमा निर्धारित करती हैं। भारत की वास्तविक उपलब्धि केवल पदकों में नहीं है। आज छोटे शहरों, कस्बों और गांवों से निकलने वाले युवा अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। यह खेलों के लोकतंत्रीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण परिवर्तन है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खेलों को राष्ट्रीय विकास और युवा सशक्तीकरण के महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में सामने रखा है। ‘खेलो इंडिया’ जैसी पहल ने विद्यालयों, विश्वविद्यालयों और जमीनी स्तर पर प्रतिभाओं की पहचान तथा खेल अवसंरचना के विकास को गति दी है। टॉप्स-टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम के माध्यम से संभावित ओलंपिक पदक विजेताओं को लक्षित सहायता दी जाती है। खेलो इंडिया यूथ गेम्स और विश्वविद्यालय खेलों ने युवाओं को प्रतिस्पर्धात्मक मंच उपलब्ध कराया है। खिलाड़ियों के प्रशिक्षण, पोषण, विदेशी प्रशिक्षण, आधुनिक उपकरण, वैज्ञानिक सहयोग और आर्थिक सहायता पर बढ़ता ध्यान इस बात का संकेत है कि खेल नीति अब केवल प्रतियोगिता आयोजित करने तक सीमित नहीं है। प्रतिभा की खोज से लेकर उसे विश्वस्तरीय खिलाड़ी बनाने तक एक समग्र खेल-परिसंस्था तैयार करने की कोशिश हो रही है।
जब हम 2047 में स्वतंत्रता की शताब्दी मनाएंगे, तब विकसित भारत की तस्वीर केवल ऊंची जीडीपी, आधुनिक सड़कों, अत्याधुनिक तकनीक और विश्वस्तरीय शहरों से पूरी नहीं होगी। विकसित भारत का वास्तविक अर्थ होगा-स्वस्थ नागरिक, ऊर्जावान युवा, मानसिक रूप से मजबूत समाज और विश्व मंच पर आत्मविश्वास से खड़ा राष्ट्र। इस लक्ष्य में खेलों की भूमिका निर्णायक है। खेल युवाओं को नशे, निष्क्रिय जीवनशैली और दिशाहीनता से दूर रख सकते हैं। वे समयबद्धता, लक्ष्य-निर्धारण, हार को स्वीकार कर पुनः प्रयास करने की क्षमता और नेतृत्व सिखाते हैं। खेल मैदान लोकतंत्र की तरह हैं-यहां प्रदर्शन, अनुशासन और योग्यता ही निर्णायक होते हैं। आज देश में फिटनेस और सक्रिय जीवनशैली को बढ़ावा देने की जरूरत इसलिए भी है क्योंकि आर्थिक विकास तभी सार्थक होगा जब उसकी ऊर्जा स्वस्थ मानव संसाधन में परिवर्तित हो। फिट भारत ही उत्पादक भारत और शक्तिशाली भारत का आधार बन सकता है।
खेलों की एक और बड़ी शक्ति है-वे सीमाओं के पार संवाद स्थापित करते हैं। मैदान में प्रतिद्वंद्वी देश आमने-सामने होते हैं, लेकिन खेल के बाद वही खिलाड़ी एक-दूसरे के अनुभव, संस्कृति और मानवीय भावनाओं को समझते हैं। ओलंपिक और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताएं देशों के बीच संवाद और सद्भाव का माध्यम बनती हैं। भारत की खेल उपलब्धियां उसकी सॉफ्ट पावर को मजबूत करती हैं। जब भारतीय खिलाड़ी विश्व मंच पर तिरंगा फहराते हैं और राष्ट्रगान गूंजता है, तो करोड़ों भारतीयों में एक साथ गर्व और एकता की अनुभूति पैदा होती है। खेलों ने भारत को दुनिया के सामने एक युवा, आत्मविश्वासी और प्रतिभाशाली राष्ट्र के रूप में प्रस्तुत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इन उपलब्धियों के बावजूद भारत को खेल महाशक्ति बनने के लिए लंबा रास्ता तय करना है। गांव-गांव तक अच्छे मैदान, प्रशिक्षित कोच, खेल विज्ञान केंद्र, पोषण सुविधाएं और आधुनिक उपकरण पहुंचाने होंगे। खेलों को केवल कुछ लोकप्रिय खेलों तक सीमित रखने के बजाय ओलंपिक और पारंपरिक भारतीय खेलों की व्यापक श्रृंखला को बढ़ावा देना होगा। स्कूलों में खेल का समय बढ़ाना, प्रतिभाशाली बच्चों की प्रारंभिक उम्र में पहचान करना और उन्हें शिक्षा के साथ खेल का समान अवसर देना आवश्यक है। महिला खिलाड़ियों, दिव्यांग खिलाड़ियों और आर्थिक रूप से कमजोर प्रतिभाओं के लिए विशेष अवसर और सुरक्षित वातावरण भी सुनिश्चित करना होगा। सबसे महत्वपूर्ण परिवर्तन मानसिकता में होना चाहिए। खेल में हार असफलता नहीं, अगली जीत की तैयारी है। यह भावना यदि शिक्षा और जीवन में भी उतर जाए तो भारत की युवा शक्ति असाधारण परिणाम दे सकती है।
खेल केवल पदक नहीं देते, वे रोजगार और अर्थव्यवस्था भी बनाते हैं। स्टेडियम, खेल उपकरण, स्पोर्ट्स टेक्नोलॉजी, फिटनेस उद्योग, खेल प्रसारण, पर्यटन, कोचिंग, स्पोर्ट्स मेडिसिन और डेटा एनालिटिक्स जैसे अनेक क्षेत्रों में नए अवसर पैदा हो रहे हैं। भारत में खेल-आधारित स्टार्टअप और तकनीकी नवाचारों की संभावनाएं भी तेजी से बढ़ रही हैं। अर्थात खेलों में निवेश केवल खिलाड़ियों पर खर्च नहीं, बल्कि भविष्य की मानव पूंजी और नई अर्थव्यवस्था में निवेश है। इसलिये राष्ट्रीय खेल दिवस हमें एक महत्वपूर्ण संकल्प लेने का अवसर देता है-हर बच्चा खेले, हर युवा फिट रहे और हर प्रतिभा को आगे बढ़ने का अवसर मिले। हमें ऐसी खेल संस्कृति विकसित करनी होगी जिसमें अभिभावक खेल को समय की बर्बादी न समझें, विद्यालय खेल को अतिरिक्त गतिविधि न मानें और समाज खिलाड़ी को केवल पदक जीतने के बाद सम्मान न दे।
2047 का विकसित भारत यदि दुनिया की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होना चाहता है तो उसे खेलों में भी अग्रणी राष्ट्र बनना होगा। आर्थिक शक्ति और खेल शक्ति एक-दूसरे की पूरक हैं। जिस देश के युवा मैदान में लक्ष्य साधना सीखते हैं, वे जीवन में भी बड़े लक्ष्य हासिल करने की क्षमता रखते हैं। राष्ट्रीय खेल दिवस इसलिए केवल ध्यानचंद को श्रद्धांजलि का दिवस नहीं; यह भारत की युवा शक्ति को जगाने, खेल को जीवन का हिस्सा बनाने और विकसित भारत के निर्माण में खेलों को राष्ट्रीय अभियान बनाने का दिवस है। आज आवश्यकता है कि हम ध्यानचंद की खेल-प्रतिभा, नीरज की दृढ़ता, सिंधु के संघर्ष, मनु भाकर के आत्मविश्वास और हमारे हजारों उभरते खिलाड़ियों के सपनों को एक राष्ट्रीय संकल्प में बदलें। 2047 का भारत केवल आर्थिक रूप से समृद्ध न हो, बल्कि शरीर से स्वस्थ, मन से मजबूत, चरित्र से अनुशासित और खेल के मैदान में विश्वविजयी भारत बने-यही राष्ट्रीय खेल दिवस का सबसे सार्थक संदेश है।

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कोई दो MINI कभी एक जैसी नहीं दिखनी चाहिए। MINI India ने लॉन्च किया एक्सक्लूसिव ‘Mod My MINI’ कस्टमाइजेशन प्रोग्राम https://www.rashtratak.com/gurugram/ Wed, 26 Aug 2026 08:24:17 +0000 https://www.rashtratak.com/?p=2780 — आपकी MINI को और भी ज्यादा खास बनाने के लिए कस्टमाइजेशन विकल्पों की एक खास रेंज। सिग्नेचर

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आपकी MINI को और भी ज्यादा खास बनाने के लिए कस्टमाइजेशन विकल्पों की एक खास रेंज। सिग्नेचर पेंट और बोल्ड डिकल्स से लेकर प्रेसिजन एक्सेसरीज तक की बेस्पोक रेंज जो आपकी MINI को आपके पर्सनल स्टेटमेंट में बदल देती है। 2.5 मिलियन से ज्यादा यूनिक कॉम्बिनेशन्स के साथ आपकी MINI को सच में अलग बनाने की अनंत संभावनाएं।

गुरुग्राम। MINI India ने अपने ऑफिशियल व्हीकल कस्टमाइजेशन प्रोग्राम की लॉन्चिंग की घोषणा की है, जो इंडिविजुअल स्टाइल को बढ़ाने और मालिकों को अपनी पसंद के अनुसार वाहनों को तैयार करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। ब्रांड के इस पुराने विश्वास पर आधारित कि सड़क पर कोई भी दो MINI एक जैसी नहीं दिखनी चाहिए, इस नई पहल में Cooper और Countryman फैमिली दोनों के लिए बेस्पोक अपग्रेड्स की एक क्यूरेटेड रेंज – ओरिजिनल एक्सेसरीज, सिग्नेचर पेंट्स और बोल्ड डिकल्स – पेश की गई है।

यह प्रोग्राम ग्राहकों को लगभग किसी भी एलिमेंट – जिसमें रूफ, मिरर कैप, स्पॉयलर और ब्रेक कैलिपर्स शामिल हैं – को मॉडिफाई करके बिल्कुल नई या मौजूदा गाड़ी को पर्सनलाइज करने की अनुमति देता है। ग्राहक अपनी पर्सनैलिटी से मैच करने के लिए 100 से अधिक क्लासिक MINI शेड्स, कई एक्सक्लूसिव थीमैटिक डिकल्स और ओरिजिनल MINI एक्सेसरीज में से चुन सकते हैं। यह विस्तृत चयन कुल 2.5 मिलियन यूनिक कॉम्बिनेशन्स को संभव बनाता है।

श्री हरदीप सिंह बराड़, प्रेसिडेंट और CEO, BMW ग्रुप इंडिया ने कहा, “MINI कभी भी सिर्फ ट्रांसपोर्ट का साधन नहीं रही है; यह पर्सनल स्टाइल का ऐलान है। हम दृढ़ता से मानते हैं कि सड़क पर कोई भी दो MINI एक जैसी नहीं दिखनी चाहिए, इसीलिए ‘Mod My MINI’ प्रोग्राम डिज़ाइन का कैनवास सीधे हमारे मालिकों के हाथों में देता है।”

सभी ऑफिशियल डिकल्स पर इंस्टॉलेशन की तारीख से 24 महीने की वारंटी भी दी जाएगी।

ग्राहक अपने नजदीकी MINI Authorized Dealer से संपर्क कर सकते हैं।

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आरईसी लिमिटेड ने अपनी 57वीं वार्षिक आम बैठक संपन्न की और ईएसजी रिपोर्ट का तीसरा संस्करण जारी किया https://www.rashtratak.com/%e0%a4%86%e0%a4%b0%e0%a4%88%e0%a4%b8%e0%a5%80-%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%9f%e0%a5%87%e0%a4%a1-%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%85%e0%a4%aa%e0%a4%a8%e0%a5%80-57%e0%a4%b5%e0%a5%80%e0%a4%82/ Wed, 26 Aug 2026 07:29:41 +0000 https://www.rashtratak.com/?p=2777 नई दिल्ली, 25 अगस्त, 2026: आरईसी लिमिटेड, भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय के अधीन महारत्न सीपीएसई, ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम

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नई दिल्ली25 अगस्त2026: आरईसी लिमिटेड, भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय के अधीन महारत्न सीपीएसईने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अपनी 57वीं वार्षिक आम बैठक (एजीएमसंपन्न की, जिसमें शेयरधारकों को वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी के प्रदर्शन और मुख्य उपलब्धियों की जानकारी दी गई।

शेयरधारकों को संबोधित करते हुएआरईसी लिमिटेड के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर श्री जितेंद्र श्रीवास्तव ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान कंपनी के मज़बूत वित्तीय और ऑपरेशनल प्रदर्शन और भारत के ऊर्जा बदलाव में एक भरोसेमंद पार्टनर के तौर पर इसकी बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि तेज़ी से बदलते वैश्विक परिवेश के बीचयह वर्ष आरईसी के लिए शानदार प्रदर्शन और रणनीतिक प्रगति का प्रतीक रहाजिसमें कंपनी ने विकासलचीलेपनस्थिरतापारदर्शिता और सुदृढ़ कॉर्पोरेट प्रशासन पर अपना ध्यान केंद्रित रखा।

वित्त वर्ष 2025-26 के दौरानआरईसी ने 2.11 लाख करोड़ का अपना अब तक का सबसे अधिक वार्षिक वितरण हासिल कियाजबकि मंज़ूरियाँ बढ़कर रिकॉर्ड 4.09 लाख करोड़ हो गईं। कंपनी की नेट वर्थ 84,000 करोड़ को पार कर गईजिसमें साल-दर-साल लगभग 9% की वृद्धि दर्ज की गईऔर 31 मार्च2026 तक इसकी सकल ऋण संपत्ति 5.84 लाख करोड़ थी। कंपनी ने वर्ष के दौरान 16,282 करोड़ का शुद्ध लाभ और 59,187 करोड़ की कुल आय दर्ज की।

 

स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन में आरईसी के बढ़ते योगदान को रेखांकित करते हुएश्री श्रीवास्तव ने कहा कि वर्ष के दौरान कंपनी ने 13,000 मेगावाट से अधिक की कुल स्थापित क्षमता वाली 58 नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं को मंज़ूरी दीजिसमें 85,000 करोड़ रुपये से अधिक की ऋण सहायता शामिल है। आरईसी की नवीकरणीय ऊर्जा ऋण परिसंपत्तियां 75,000 करोड़ रुपये को पार कर गईंजो साल-दर-साल लगभग 30% की वृद्धि दर्ज करती हैं। कंपनी द्वारा वित्तपोषित परियोजनाओं ने सामूहिक रूप से लगभग 7.6 मिलियन टन CO उत्सर्जन को कम करने में योगदान दिया है।

आरईसी लिमिटेड के सीएमडी और बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स ने एजीएम के दौरान आरईसी की एनवायरनमेंटलसोशलगवर्नेंस (ईएसजीरिपोर्ट का तीसरा एडिशन जारी किया। यह सस्टेनेबिलिटी रिपोर्ट भारत के लिए एक ग्रीनसमावेशी और मज़बूत एनर्जी इकोसिस्टम बनानेसाथ ही सस्टेनेबल ग्रोथ और ज़िम्मेदार विकास को आगे बढ़ाने के लिए आरईसी की लगातार प्रतिबद्धता को दिखाती है। यह सार्थक बदलाव लानेसमुदायों को मजबूत करने और एक साफ-सुथरे व टिकाऊ भविष्य की दिशा में काम करने के कंपनी के निरंतर प्रयासों को दर्शाता है।

सतत विकास और ज़िम्मेदार प्रगति परश्री श्रीवास्तव ने पर्यावरणसामाजिक और शासन (ESG) प्राथमिकताओं पर आरईसी के निरंतर ध्यान को रेखांकित किया। कंपनी को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज की ESG रेटिंग में 505 भारतीय कंपनियों में सर्वोच्च रेटिंग प्राप्त हुई। आरईसी ने ISO 31000:2018 और ISO 27001:2022 प्रमाणपत्रों सहित मज़बूत जोखिम-प्रबंधन और सूचना-सुरक्षा ढांचे को भी बनाए रखा।

आरईसी ने सीएसआर पहलों के ज़रिए समावेशी विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता भी जारी रखी। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरानहेल्थकेयरग्रामीण विकासपर्यावरणखेलसशस्त्र बलों को सहायताबुनियादी ढांचे और सामुदायिक विकास के लिए 338 करोड़ का सीएसआर बजट आवंटित किया गया।

सीएमडी ने केंद्रीय बजट 2026-27 में घोषित आरईसी और पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन (पीएफसीके प्रस्तावित पुनर्गठन के बारे में भी बात की। उन्होंने बताया कि विलय की प्रक्रिया चल रही है और इससे बैलेंस-शीट की मज़बूतीबेहतर कैपिटल क्षमता और ऑपरेशनल तालमेल जैसे फ़ायदे मिलने की उम्मीद है। इससे पावर सेक्टर की पूरी वैल्यू चेन में बड़े पैमाने पर फंडिंग और बेहतर क्रेडिट फ़्लो में मदद मिलेगी।

  • आरईसी लिमिटेड के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर श्री जितेंद्र श्रीवास्तव और बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स के सदस्यों ने एजीएम में हिस्सा लिया।

57वीं एजीएम ने ज़िम्मेदार वित्तपोषणनवाचारस्थिरता और हितधारक-केंद्रित शासन के माध्यम से भारत के विकास को शक्ति देनेदेश के ऊर्जा परिवर्तन का समर्थन करने और विकसित भारत @2047‘ के दृष्टिकोण में योगदान देने के लिए आरईसी की प्रतिबद्धता को दोहराया।

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भारतीय सद्विचार मंच (दहिसर) द्वारा भव्य रुद्राभिषेक सम्पन्न – भक्ति, एकता और सामाजिक समरसता का दिव्य संगम https://www.rashtratak.com/mumbai-maharashtra/ Tue, 25 Aug 2026 09:22:13 +0000 https://www.rashtratak.com/?p=2766 राष्ट्र तक ब्यूरो, मुंबई/दहिसर।। श्रावण मास के पावन अवसर पर भारतीय सद्विचार मंच, दहिसर इकाई द्वारा भव्य रुद्राभिषेक

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राष्ट्र तक ब्यूरो, मुंबई/दहिसर।। श्रावण मास के पावन अवसर पर भारतीय सद्विचार मंच, दहिसर इकाई द्वारा भव्य रुद्राभिषेक का आयोजन अत्यंत धूमधाम, श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ सम्पन्न हुआ। भगवान शिव को समर्पित इस पवित्र महीने में आयोजित इस दिव्य अनुष्ठान में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने सहभागिता की और ‘हर हर महादेव’ के जयघोष से पूरा परिसर गूंजायमान हो गया। यह कार्यक्रम केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं था, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा, युवा जागरूकता और सामाजिक समरसता का अद्भुत संगम बन गया।

कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुई। विद्वान ब्राह्मणों द्वारा विधि-विधान से भगवान शिव का रुद्राभिषेक किया गया। दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल के पंचामृत से भगवान शिव का अभिषेक किया गया। इसके बाद बेलपत्र, पुष्प, धतूरा, भस्म और अक्षत अर्पित कर शिवस्तुति और रुद्रसूक्त का पाठ किया गया। मंत्रों की दिव्य ध्वनि से वातावरण पूरी तरह से भक्तिमय और आध्यात्मिक हो गया था। उपस्थित सभी श्रद्धालु आँखें बंद कर भोलेनाथ की भक्ति में लीन दिखे।

कार्यक्रम का विवरण:

कार्यक्रम स्थल को फूलों और भगवा पताकाओं से सजाया गया था। सुबह से ही श्रद्धालुओं का आना शुरू हो गया था। महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों ने बड़ी संख्या में भाग लेकर यह साबित कर दिया कि आज भी सनातन धर्म के प्रति लोगों की आस्था अटूट है।

भजन-कीर्तन मंडली द्वारा प्रस्तुत शिव भजनों और शिव स्तुति ने पूरे वातावरण को और भी भक्तिमय बना दिया। ढोलक और हारमोनियम की थाप पर ‘बम बम भोले’ और ‘शिव शंकर को जिसने पूजा’ जैसे भजनों पर श्रद्धालु झूमते नजर आए।

इस अवसर पर भारतीय सद्विचार मंच द्वारा युवाओं को भारतीय संस्कृति एवं सनातन परंपरा से जोड़ने हेतु विशेष प्रेरणादायी उद्बोधन भी प्रस्तुत किया गया। वक्ताओं ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़ना बहुत जरूरी है। पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव में हम अपनी महान परंपराओं को भूलते जा रहे हैं। रुद्राभिषेक जैसे कार्यक्रम नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं।

सामाजिक समरसता का संदेश देते हुए इस पूजा में सभी वर्गों के लोगों ने एक साथ बैठकर पूजा-अर्चना में भाग लिया। न कोई छोटा, न कोई बड़ा – सभी शिव भक्त के रूप में एक साथ थे। यही तो सनातन धर्म की सबसे बड़ी सुंदरता है।

आयोजन में साफ-सफाई, बैठने की व्यवस्था, ध्वनि व्यवस्था और प्रसाद वितरण की उत्कृष्ट व्यवस्था की गई थी। स्वयंसेवकों ने अनुशासित तरीके से पूरे कार्यक्रम को संभाला। अंत में महा-आरती की गई। महा-आरती के पश्चात सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित कर कार्यक्रम का समापन किया गया।

उपस्थित गणमान्य:

 

इस पावन अवसर पर मंच के कई वरिष्ठ पदाधिकारी एवं गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे।

  • डॉ. राधेश्याम तिवारी – मार्गदर्शक, संस्थापक:जिन्होंने मंच की स्थापना कर समाज में सद्विचारों के प्रसार का बीड़ा उठाया है। उनके मार्गदर्शन में मंच निरंतर प्रगति कर रहा है।
  • डॉ. शिवश्याम तिवारी – अध्यक्ष: जिनके नेतृत्व में दहिसर इकाई ने इस भव्य आयोजन को सफलतापूर्वक सम्पन्न कराया।
  • – श्री हरि शंकर दुबे – राष्ट्र समाज के संरक्षक एवं वरिष्ठ समाजसेवी, विशेष अतिथि रहे : जिन्होंने अपने उद्बोधन में सामाजिक एकता पर जोर  दिया!

इनके अलावा श्री विनय पांडेय, श्री राजेश दुबे, श्रीमती उर्मिला तिवारी सहित सैकड़ों पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित थे। फोटो में सभी गणमान्य सदस्य पारंपरिक अंगवस्त्र पहनकर कार्यक्रम की शोभा बढ़ा रहे हैं। दूसरे चित्र में कार्यक्रम के दौरान सेल्फी में उपस्थित पदाधिकारी एवं सदस्यों का उत्साह स्पष्ट दिखाई दे रहा है।

मंच का उद्देश्य एवं कार्य:

भारतीय सद्विचार मंच केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं है। यह मंच निरंतर धार्मिक, सामाजिक एवं शैक्षणिक कार्यक्रमों के माध्यम से समाज में संस्कार, एकता और सेवा का संदेश प्रसारित कर रहा है।

मंच द्वारा समय-समय पर स्वास्थ्य शिविर, रक्तदान शिविर, स्वच्छता अभियान, संस्कृत शिक्षण एवं युवाओं के लिए मार्गदर्शन सत्र आयोजित किए जाते हैं। गरीब और जरूरतमंद बच्चों को शिक्षा सामग्री वितरित करना, महिलाओं के लिए सिलाई-कढ़ाई प्रशिक्षण और पर्यावरण संरक्षण के लिए वृक्षारोपण जैसे कार्य भी मंच द्वारा किए जाते हैं।

रुद्राभिषेक जैसे कार्यक्रमों से नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ते हुए राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है। मंच का लक्ष्य आने वाले समय में और भी सेवा कार्यों को विस्तारित कर समाज हित में सतत योगदान देना है। मंच का मानना है कि जब समाज में सद्विचार आएंगे, तभी राष्ट्र का निर्माण होगा।

— राष्ट्र समाज टीम

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अखिल भारतीय अग्रवाल सम्मेलन, सोनीपत इकाई का भव्य आयोजन – सामाजिक एकजुटता, संस्कार और महाराजा अग्रसेन की विरासत पर जोर https://www.rashtratak.com/rashtra/ Tue, 25 Aug 2026 07:59:01 +0000 https://www.rashtratak.com/?p=2750 ––रिपोर्ट: विनीत कुमार लोहिया, संरक्षक –      राष्ट्र तक, सोनीपत हरियाणा   सोनीपत। अखिल भारतीय अग्रवाल सम्मेलन,

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  • –रिपोर्ट: विनीत कुमार लोहिया, संरक्षक –
  •      राष्ट्र तक, सोनीपत हरियाणा

 

सोनीपत। अखिल भारतीय अग्रवाल सम्मेलन, सोनीपत इकाई के तत्वावधान में एक भव्य और प्रेरणादायी विशेष समारोह का आयोजन किया गया। इस समारोह में हरियाणा भाजपा की प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती (डॉ.) अर्चना गुप्ता जी का भव्य अभिनंदन किया गया, साथ ही अग्रवाल समाज की एकजुटता, सामाजिक समरसता और महाराजा अग्रसेन जी के आदर्शों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संकल्प लिया गया।

समारोह स्थल को तिरंगे और फूलों से सजाया गया था। मंच पर पुष्प गुच्छों से सुसज्जित पोडियम से वक्ताओं ने समाज के उत्थान के लिए अपने विचार रखे। प्रस्तुत चित्र में वरिष्ठ पदाधिकारी मंच से समाज को संबोधित करते हुए संस्कार और संगठन की महत्ता पर प्रकाश डाल रहे हैं। उनके पीछे तिरंगा और सांस्कृतिक सजावट इस बात का प्रतीक है कि समाज देशभक्ति और संस्कृति दोनों को साथ लेकर चलता है।

  • समारोह में उमड़ा जनसैलाब

इस विशेष समारोह में सोनीपत की अनेक सामाजिक, शैक्षणिक, धार्मिक एवं सेवा संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। महिलाओं की बड़ी संख्या में उपस्थिति ने यह सिद्ध कर दिया कि अग्रवाल समाज में महिला सशक्तिकरण को भी उतना ही महत्व दिया जाता है। मंच के सामने बैठे श्रोताओं में युवा, बुजुर्ग और महिलाएं सभी ने तालियों के साथ वक्ताओं का स्वागत किया।

वक्ताओं ने कहा कि हमारी सबसे बड़ी शक्ति हमारी एकजुटता है। जब समाज एकजुट होता है, तो वह किसी भी चुनौती का सामना कर सकता है। अग्रवाल समाज ने हमेशा से ही व्यापार, सेवा और परोपकार के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाई है। महाराजा अग्रसेन जी ने एक ऐसे समाज की कल्पना की थी जहाँ कोई गरीब न हो, कोई भूखा न सोए। उसी कल्पना को साकार करने के लिए आज का यह सम्मेलन आयोजित किया गया है।

  • डॉ. अर्चना गुप्ता का प्रेरणादायी संबोधन

समारोह की मुख्य अतिथि हरियाणा भाजपा की प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अर्चना गुप्ता जी ने अपने संबोधन में कहा कि अग्रवाल समाज ने हमेशा राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में देश आज विकास के पथ पर अग्रसर है और इसमें समाज की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने महिलाओं से आह्वान किया कि वे आगे आएं और सामाजिक कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें।

उन्होंने कहा, “महाराजा अग्रसेन जी ने हमें एक रुपया और एक ईंट का सिद्धांत दिया था। यह सिद्धांत आज भी प्रासंगिक है। इसका अर्थ है कि समाज के हर व्यक्ति को सहयोग करना चाहिए ताकि कोई भी व्यक्ति पीछे न रह जाए। आज जब हम बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ की बात करते हैं, तो अग्रवाल समाज पहले से ही इस दिशा में काम कर रहा है।

विनीत कुमार लोहिया का संदेश

राष्ट्र तक सोनीपत के प्रतिनिधि विनीत कुमार लोहिया ने कहा कि इस तरह के आयोजन समाज को जोड़ने का काम करते हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्र तक और राष्ट्र समाज हमेशा से ही सामाजिक मुद्दों को प्रमुखता से उठाता रहा है। उन्होंने कहा, “हमारा उद्देश्य सिर्फ खबर दिखाना नहीं, बल्कि समाज को जागरूक करना भी है। आज का यह सम्मेलन इसका जीता-जागता उदाहरण है।”

  • महाराजा अग्रसेन की विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प

समारोह में सभी वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि आइए, आने वाली पीढ़ी को संस्कार, संगठन, अवसर और सशक्त सामाजिक आधार देकर महाराजा अग्रसेन जी की विरासत को और मजबूत करें। वक्ताओं ने कहा कि आज के युवा को अपने इतिहास और संस्कृति के बारे में जानना बहुत जरूरी है। अगर युवा अपने संस्कारों से जुड़ा रहेगा, तो वह कभी भी गलत रास्ते पर नहीं जाएगा।

समारोह में समाज के कई गणमान्य व्यक्तियों को सम्मानित भी किया गया जिन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और समाज सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है। अंत में सभी ने मिलकर महाराजा अग्रसेन जी के जयकारे लगाए।

जय महाराजा अग्रसेन!

कार्यक्रम के समापन पर आयोजकों ने सभी अतिथियों और सहयोगी संस्थाओं का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी इसी तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे ताकि समाज में एकता और भाईचारा बना रहे।

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संपादकीय संपर्क: डॉ. प्रमोद तिवारी, मुख्य संपादक – राष्ट्र समाज, 9911662767 / 8368272439 

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