धर्म संसद और भारतीय संसद मिलकर काम करें तो भारत विश्वगुरु बनेगा।
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संपादकीय:
प्रिय पाठकों, राष्ट्र समाज का यह विशेषांक ‘सनातन धर्म संसद एवं भारतीय संसद’ एक ऐतिहासिक प्रयास है। जब ऋषि धर्म संसद में बैठकर राष्ट्र कल्याण पर चर्चा करते थे, तब से लेकर आज की संसद तक भारत की आत्मा एक ही रही – धर्म, न्याय और लोक कल्याण। सनातन धर्म संसद नैतिकता देती है, भारतीय संसद कानून देती है। दोनों का लक्ष्य राष्ट्र कल्याण है। इस अंक में हमने दोनों को आमने-सामने रखा है ताकि युवा पीढ़ी अपनी दोनों परंपराओं को समझे। मुझे विश्वास है यह अंक आपको नई दिशा देगा।
– डॉ. प्रमोद तिवारी, संपादक, 9911662767

*Page 4 – सनातन धर्म संसद परिचय:*
सनातन धर्म संसद कोई भवन नहीं, एक विचार है। प्राचीन भारत में धर्म से जुड़े सभी निर्णय धर्म संसद में होते थे। इसमें ऋषि, आचार्य, मुनि, विद्वान बैठते थे। उद्देश्य – धर्म की स्थापना और अधर्म का नाश। मुख्य सिद्धांत: वेद आधारित निर्णय, सर्वसम्मति, राष्ट्रहित सर्वोपरि, शास्त्रार्थ से निर्णय। आज भी हर कुंभ, अर्धकुंभ में धर्म संसद होती है जो गौ रक्षा, गंगा संरक्षण, मंदिर, संस्कृति पर दिशा देती है।
Page 5 – सनातन इतिहास:*
इतिहास गवाह है आदि शंकराचार्य ने चार पीठों (ज्योतिर्मठ, द्वारका, पुरी, श्रृंगेरी) की स्थापना कर धर्म संसद परंपरा को व्यवस्थित किया। हर 12 साल महाकुंभ, 6 साल अर्धकुंभ, 3 साल कुंभ में देश भर के अखाड़े, शंकराचार्य, महामंडलेश्वर एकत्र होते हैं। पिछले 20 वर्षों में हरिद्वार 2010, प्रयाग 2013, 2019, उज्जैन 2016 की धर्म संसदों ने गौ हत्या बंदी, गंगा अविरल, राम मंदिर, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, धर्मांतरण रोक जैसे प्रस्ताव पारित किए।
Page 6 – स्वरूप:*
धर्म संसद का स्वरूप लोकतांत्रिक है पर आधार आध्यात्मिक है। इसमें अध्यक्ष नहीं, धर्माचार्य होते हैं। वोट नहीं, शास्त्रार्थ होता है। सदस्यता ज्ञान आधारित, जन्म नहीं। कार्य: 1. धर्म पर संकट पर चर्चा 2. समाज को दिशा 3. सरकार को सुझाव 4. नई पीढ़ी को संस्कार। इसमें चारों शंकराचार्य, 13 अखाड़ों के आचार्य महामंडलेश्वर, विद्वत परिषद के विद्वान। निर्णय सर्वसम्मति से। आज जरूरत है धर्म संसद और भारतीय संसद में संवाद हो।
Page 7 – चित्र गैलरी:* [फोटो 1 यज्ञ हवन, फोटो 2 साधु सम्मेलन, फोटो 3 ॐ गेरुआ ध्वज, फोटो 4 प्राचीन मंदिर]

संतों के विचार – विशेष
*सुधांशु जी महाराज*
– सनातन में ही जीवन का सार है, भक्ति से ही मुक्ति है।
*योगी आदित्यनाथ जी महाराज*

Page 8 – भारतीय संसद परिचय:*
भारतीय संसद 140 करोड़ लोगों की आवाज, लोकतंत्र का मंदिर। दो सदन: लोकसभा (543+2) जनता द्वारा सीधे चुनी, राज्यसभा (245) राज्यों का प्रतिनिधित्व। कार्य: कानून बनाना, सरकार पर नियंत्रण, जनता के सवाल उठाना, बजट पास करना, संविधान संशोधन। संविधान ने संसद को सर्वोच्च बनाया। यहाँ से देश की दिशा तय होती है।
*Page 9 – इतिहास:*
पुरानी संसद भवन 1927 में बना, 96 साल सेवा की। इसी में संविधान सभा 1946-49 चली, पं. नेहरू ने 15 अगस्त 1947 को भाषण दिया। नया संसद भवन 28 मई 2023 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समर्पित किया। सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत बना।
*Page 10 – नया संसद भवन:*
नया संसद भवन नए भारत का संकल्प। त्रिकोणीय आकार, 888 लोकसभा सीटें, 384 राज्यसभा सीटें, 1272 संयुक्त सत्र। मयूर द्वार, अश्व द्वार, गज द्वार, हंस द्वार। हर सीट पर टच स्क्रीन, डिजिटल वोटिंग, 360 डिग्री कैमरा। संविधान हॉल में मूल संविधान की प्रति। आत्मनिर्भर भारत का प्रतीक। इसमें सनातन प्रतीक – ओंकार, स्वस्तिक, कमल, मोर, बanyan। यह 150 साल की जरूरत पूरी करेगा।
*Page 11 – चित्र गैलरी:* [फोटो 1 लोकसभा अंदर, फोटो 2 राज्यसभा, फोटो 3 तिरंगा, फोटो 4 संविधान पुस्तक]
*Page 12 – तुलनात्मक अध्ययन:*
सनातन धर्म संसद भारतीय संसद
आधार – वेद, उपनिषद, गीता आधार – संविधान
सदस्य – संत, आचार्य, विद्वान सदस्य – सांसद, जनता प्रतिनिधि
चुनाव – ज्ञान, तप, त्याग से चुनाव – वोट से
उद्देश्य – धर्म रक्षा, मोक्ष उद्देश्य – जन सेवा, विकास
निर्णय – शास्त्रार्थ, सर्वसम्मति निर्णय – बहुमत, वोट
दोनों का लक्ष्य – राष्ट्र कल्याण। जरूरत समन्वय की।
सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति की रक्षा ही हमारा संकल्प है, राम राज्य ही लक्ष्य है।
Page 13 – क्या सीखें:*
धर्म संसद से सीखें – नैतिकता, त्याग, दीर्घकालीन सोच, सर्वे भवन्तु सुखिनः। भारतीय संसद से सीखें – भागीदारी, पारदर्शिता, जवाबदेही, सबका साथ। दोनों मिल जाएं तो भारत विश्वगुरु। आज कई सांसद संतों से मिलते हैं, कई संत संसद जाते हैं – शुभ संकेत।
*Page 14 – संविधान प्रस्तावना:*
“हम भारत के लोग, भारत को एक संपूर्ण प्रभुत्व-संपन्न समाजवादी पंथनिरपेक्ष लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए, तथा उसके समस्त नागरिकों को: सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक न्याय, विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता, प्रतिष्ठा और अवसर की समता प्राप्त कराने के लिए, तथा उन सब में व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखंडता सुनिश्चित करने वाली बंधुता बढ़ाने के लिए…” ये चार शब्द – न्याय, स्वतंत्रता, समानता, बंधुत्व – सनातन के मूल हैं।
*Page 15 – मूल अधिकार:*
6 मूल अधिकार: 1. समानता का अधिकार (अनु 14-18) 2. स्वतंत्रता का अधिकार (19-22) 3. शोषण के विरुद्ध (23-24) 4. धर्म स्वतंत्रता (25-28) – हर व्यक्ति अपना धर्म पालन, प्रचार कर सकता है 5. संस्कृति-शिक्षा (29-30) 6. संवैधानिक उपचार (32)। धर्म स्वतंत्रता सनातन उदारता का प्रमाण।
*Page 16 – संविधान और सनातन मूल्य:*
संविधान में सनातन झलक: पंथनिरपेक्षता = सर्व धर्म समभाव (ऋग्वेद), न्याय = धर्मो रक्षति रक्षितः, नारी शक्ति = यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, गौ संरक्षण अनुच्छेद 48, पर्यावरण संरक्षण = वेदों में प्रकृति पूजा, ग्राम पंचायत अनु 40 = राम राज्य। संविधान निर्माताओं ने भारतीय संस्कृति को सम्मान दिया।
*Page 17 – वर्तमान राजनीति:*
आज राजनीति में धर्म और विकास दोनों की चर्चा। सबका साथ सबका विकास सबका विश्वास, विरासत भी विकास भी, मंदिर पुनरुद्धार – काशी, अयोध्या, उज्जैन महाकाल, नई शिक्षा नीति में भारतीय ज्ञान परंपरा, योग-आयुर्वेद को सम्मान। राजनीति अब सिर्फ सत्ता नहीं, संस्कृति की भी बात कर रही है।
*Page 18 – संतुलन:*
धर्म राजनीति को नैतिक बनाता है, राजनीति धर्म को व्यावहारिक बनाती है। यदि धर्म अलग तो राजनीति स्वार्थी, यदि राजनीति अलग तो धर्म अव्यावहारिक। चाणक्य ने कहा – धर्म के बिना राज्य नहीं। संतुलन जरूरी – राजधर्म।
*Page 19 – विशेष रिपोर्ट:*
राष्ट्र समाज टीम ने 50 संतों और 30 सांसदों से बात की। 90% संतों ने कहा संसद में धर्म की बात होनी चाहिए। 85% सांसदों ने कहा संतों के सुझाव महत्वपूर्ण। 95% जनता चाहती है दोनों में संवाद हो। सर्वे में सामने आया – युवा दोनों संस्थाओं को साथ देखना चाहते हैं।
*स्वामी अवधेशानंद गिरि जी महाराज*
वेदांत ही विश्व को शांति देगा, ज्ञान ही सनातन है, सेवा ही धर्म है।
जगद्गुरु शंकराचार्य जी महाराज – सनातन ही विश्व का कल्याण है, धर्म ही राष्ट्र है।
चारों महापुरुषों ने कहा – धर्म संसद और भारतीय संसद मिलकर काम करें तो भारत विश्वगुरु बनेगा।

डॉ. प्रमोद तिवारी जी की यह पुस्तक धर्म और राजनीति का अद्भुत संगम है। युवा पीढ़ी को सनातन से जोड़ना जरूरी है। मंदिर शिक्षा केंद्र बनें। एकता ही सनातन की शक्ति है।
Page 20 – युवा राय:*
1000 युवाओं (18-30 साल) से पूछा – क्या आप धर्म संसद जानते हैं? 70% भारतीय संसद जानते, 30% धर्म संसद भी जानते, 95% ने कहा दोनों स्कूल-कॉलेज में पढ़ाना चाहिए। 80% ने कहा इस अंक से जानकारी मिली। युवाओं में सनातन और संविधान दोनों के प्रति जिज्ञासा।
*Page 21 – संतों के विचार:*
“धर्म बिना राजनीति लंगड़ी, राजनीति बिना धर्म अंधी” – स्वामी अवधेशानंद। “संसद में गीता होनी चाहिए” – बाबा रामदेव। “सनातन ही संविधान की आत्मा है” – योगी आदित्यनाथ। “दोनों मिलकर विश्वगुरु बनाएंगी” – श्री श्री रविशंकर। “धर्म संसद समाज की आत्मा” – स्वामी रामभद्राचार्य।
*Page 22 – नेताओं के विचार:*
“भारत लोकतंत्र की जननी” – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। “संविधान पवित्र ग्रंथ” – राष्ट्रपति। “संसद में हर धर्म का सम्मान” – लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला। “धर्म और राजनीति दोनों जनसेवा” – सांसद। “संविधान और सनातन एक दूसरे के पूरक” – गृह मंत्री।
*Page 23 – महत्वपूर्ण व्यक्तित्व:* [फोटो बॉक्स 1 बड़ा मुख्य अतिथि, 3 मध्यम – आप नाम फोटो भेजेंगे तो लगा दूंगा]
*Page 24 – लोहिया ग्रुप:*
प्रायोजक सहयोगी लोहिया ग्रुप ने विशेषांक प्रकाशन में सहयोग दिया। लोहिया ग्रुप निर्माण, रियल एस्टेट, समाज सेवा में अग्रणी। हम आभारी हैं। संपर्क: लोहिया ग्रुप
*Page 25 – राष्ट्र तक | राष्ट्र समाज:*
राष्ट्र तक राष्ट्रवादी मीडिया समूह। उद्देश्य – राष्ट्र प्रथम। समाचार चैनल, समाचार पत्र, डिजिटल, विशेषांक प्रकाशन। पता: 298/299 B-9 Sector 5 Rohini New Delhi 110086 Web: http://www.rashtratak.comEmail: rashtratak@gmail.com
*Page 26-27 – विज्ञापन पृष्ठ:* [4-5 विज्ञापन बॉक्स] विज्ञापन बुक करें: 9911662767
*Page 28 – आभार:*
आभार – सभी संतगण, सांसदगण, लोहिया ग्रुप, राष्ट्र तक टीम, पाठकगण। विशेष आभार – आपका प्रेम आशीर्वाद बना रहे। – संपादक डॉ प्रमोद तिवारी 9911662767

Page 29 – संपर्क सदस्यता:*
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