एक समय था जब चंबल के बीहड़ों में डाकुओं का आतंक था। चंबल में पान सिंह तोमर, निर्भय गुर्जर और मलखान सिंह जैसे कई ऐसे डाकू हुए, जिनके नाम सुनकर पुलिस भी कांप जाती थी। लेकिन कुछ ऐसी महिलाए थीं, जिन्होंने बीहड़ों पर पुरुष डकैतों की तरह ही राज किया। एक दिन पहले रिहा हुई दस्यु सुंदरी सरला ने इन सारे नामों को फिर से जीवंत कर दिया है। यूपी की जेल अब दस्यु सुंदरियों से खाली हो गई है। एमपी के भिंड में बस कुसुमा नाइन ही सजा काट रही हैं।

बीहड़ के 7 दस्यु सुंदरी के बारे में :- फूलन देवी : 22 लोगों को लाइन में खड़ा कर गोलियों से भून दिया था

फूलन देवी को बीहड़ में कुख्यात डाकू माना जाता है। उसके साथ सामूहिक बलात्कार हुआ था, जिसके बाद वह महज 16 साल की उम्र में डाकू बन गई थी। डकैत गिरोह में उसकी सर्वाधिक नजदीकी विक्रम मल्लाह से रही। 1981 में वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तब सुर्खियों में आई, जब ऊंची जाति के 22 लोगों का सरेआम कत्ल कर दिया था। बाद में वर्ष 1983 में फूलन देवी ने सरेंडर कर दिया था।
बिना मुकदमा चलाये ग्यारह साल तक जेल में रहने के बाद फूलन को 1994 में मुलायम सिंह यादव की सरकार ने रिहा कर दिया। फूलन ने अपनी रिहाई के बाद बौद्ध धर्म अपना लिया। 1996 में फूलन ने उत्तर प्रदेश के भदोही सीट से लोकसभा का चुनाव जीता और वह संसद पहुंच गईं। 25 जुलाई 2001 को दिल्ली में उनके आवास पर ही फूलन की हत्या कर दी गई थी।
सीमा परिहार: अपहरण के बाद डकैत बनी तो वर्दी और रायफल का शौक
फोटो पूर्व दस्यु सुंदरी सीमा परिहार की है, जब बिग बॉस में सलमान से मिली थी।
औरैया के बबाइन गांव में जन्मी सीमा का 13 साल की उम्र में अपहरण हो गया। वह बीहड़ में लालराम के गैंग में पहुंच गई। कई सालों तक डाकू लालराम के साथ काम करने के बाद वह मशहूर डाकू निर्भय गुज्जर के साथ काम करने लगी। जवानी की दहलीज तक पहुंचते पहुंचते सीमा परिहार का नाम चंबल में आतंक बन गया था। वर्दी और रायफल की शौकीन थी। जून 2000 में सीमा ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया।
सीमा के सरेंडर करने के बाद उन पर करीब 29 केस दर्ज हुए। सीमा को इसके बाद इटावा जेल भेज दिया गया, जहां उन्होंने तीन साल 7 महीने गुजारे और 2004 में वह बाहर आ गई। भदोही सीट से वह लोकसभा उपचुनाव लड़ी, लेकिन हार गई। इसके कुछ साल बाद वह साल 2010 में चर्चित टीवी शो ‘बिग बॉस’ में दिखाई दी थी। अब दिबियापुर में वह रहती है।
रेणु यादव: स्कूल जाते समय डाकुओं ने कर लिया था अपहरण
रेणु का जन्म का औरैया के जमालीपुर गांव में हुआ था। रेणु पिता का नाम विद्याराम यादव था। 29 नवम्बर, 2003 को वह स्कूल जा रही थी। तभी चंदन यादव के गिरोह ने उसे अगवा कर लिया था। डाकुओं ने उसके घरवालों से 10 लाख रुपये फिरौती मांगी थी। मगर उसका परिवार पैसा नहीं दे पाया था। बस तभी से व उस गैंग में ही पली बढ़ी। रेणु चंदन की प्रेमिका बन गई और बंदूक उठा ली। 4 जनवरी 2005 को चंदन और रामवीर गुर्जर गैंग के बीच गैंगवार हुआ और चंदन मारा गया।
रामवीर ने उस वक्त रेणु को बंधक बना लिया। कुछ ही दिनों बाद रामवीर ने बदनीयती से रेणु पर हमला किया। खुद को बचाने की खातिर रेणु ने रामवीर की हत्या कर दी थी। इसके बाद उसने आत्म समर्पण कर दिया था। इस दौरान रेणु गर्भवती थी। रेणु ने जेल में बच्चे को जन्म दिया। रेणु 29 मई, 2012 को रिहा हो गई। रेणु ने अपनी ससुराल कस्बा जाना से बीडीसी का चुनाव भी जीता। रेणु अब अपने गांव जमालीपुर में रहकर अपनी बेटी को पढा रही हैं।
नीलम गुप्ता: बीहड़ में जीन्स की शौकीन, रखती थी पिस्टल
औरैया के विधूना कस्बे की रहने वाली नीलम को 2001 में निर्भय ने किडनैप किया था। उस समय नीलम की उम्र महज 12 साल थी। अपहरण के बाद नीलम वहां भी जींस पहनने लगी। निर्भय ने उसे बन्दूक चलाना सिखाया।कंधे पर बंदूक और कारतूस और माथे पर हमेशा बिंदी लगी रहती थी। धीरे-धीरे वो गैंग में घुल-मिल गई। निर्भय ने उसे अपनी पत्नी बना लिया। 26 जनवरी 2004 को दोनों ने इटावा जिले के जाहरपुर गांव के एक मंदिर में शादी कर ली।
नीलम फिर निर्भय के दत्तक पुत्र श्याम जाटव के साथ भाग गई। इससे निर्भय गुर्जर आगबबूला हो गया था। उसने एलान किया था कि जो भी उसकी पत्नी को जिंदा या मुर्दा पकड़कर लाएगा, उसे वो 21 लाख रुपए का इनाम देगा। 31 जुलाई 2004 को नीलम और श्याम ने इटावा की एंटी डकैती कोर्ट में सरेंडर कर दिया। फरवरी, 2017 में कोर्ट ने उसे रिहा कर दिया। नीलम ने इटावा में नगर पालिका का निर्दलीय चुनाव लड़ा, लेकिन हार गई। वह अब इटावा में रह रही है।
सुलेखा: सलीम गुर्जर ने अपहरण कर बना लिया था प्रेमिका
मूलरूप से मध्यप्रदेश के भिंड की रहने वाली सुरेखा का भी अपहरण हुआ था। फिरौती न आने पर वह गैंग में ही रह गई। सलीम गुर्जर ने उसे अपनी प्रेमिका बना लिया और ट्रेनिंग दी। सलीम के एनकाउंटर के बाद सुलेखा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। सुलेखा पर दो दर्जन से अधिक मुकदमे दर्ज हुए। वह लंबे समय तक जेल में रही है। अदालत के निर्णय पर वह रिहा हुई है। उसने एक बेटे को जन्म दिया है। फिलहाल सुरेखा भिंड में रहकर अपना जीवन बसर कर रही है।
शीला: कपड़े की थी शौकीन, रामवीर से रचाई थी शादी
मध्यप्रदेश के भिंड की रहने वाली शीला का भी अपहरण हुआ था। रामवीर गुर्जर ने शीला को डकैत बनाने की ट्रेनिंग दी। इसके बाद शीला से डाकू जीवन में ही रामवीर ने शादी रचाई। दोनों पर कई मुकदमे भी दर्ज रहे। बताते हैं कि शीला कपड़े पहनने की शौकीन थी और गोली चलाने में अचूक निशाना था। रामवीर की बीबी शीला ने नर्मदा नाम की एक बेटी को भी जन्म दिया। काफी साल जेल में रहने के बाद रिहा हुई, लेकिन सामान्य जीवन चुना। आज शीला अपनी बेटी नर्मदा के साथ मध्य प्रदेश के इंदौर में पढ़ाई करके जीवन यापन कर रही है।
सरला: निर्भय गुर्जर गैंग की संभालती थी कमान
औरैया जिले के अजीतमल कोतवाली क्षेत्र के नियामतपुर की रहने वाली सरला दस्यु सुंदरी थी। चंबल की घाटियों में निर्भय गुर्जर गैंग की कमान संभालने वाली दस्यु सुंदरी सरला को 18 साल बाद जमानत मिल गई है। 11 साल की उम्र में उसका अपहरण हुआ था। सरला ब्रांडेड चश्मे, लिपस्टिक और जींस-टी-शर्ट की शौकीन थी। वह 2005 से जेल में बंद थी। सरला पर अपहरण, लूट और डकैती सहित 15 आपराधिक मुकदमे दर्ज थे। औरैया और इटावा पुलिस ने 25-25 हजार और MP पुलिस ने 5 हजार का इनाम घोषित किया था।साल 2005 में इटावा पुलिस ने सरला जाटव को गिरफ्तार किया था। बाद में इटावा कोर्ट ने उसे उम्र कैद की सजा सुनाई थी। वो कुख्यात सरगना निर्भय सिंह गुर्जर के दत्तक पुत्र श्याम जाटव की पत्नी है। शुक्रवार को हाईकोर्ट के आदेश के बाद जेल से छूटी है।
