(हल्दीराम स्नैक्स फूड प्राइवेट लिमिटेड – HSFPL) में मनोहर और मधुसूदन अग्रवाल के नेतृत्व वाले दिल्ली-आधारित गुट के पास 56% हिस्सेदारी है।
विलय के प्रमुख विवरण: नई इकाई: हलदिराम स्नैक्स फूड्स (HSFPL) दिल्ली गुट (मनोहर/मधुसूदन): 56% हिस्सा।
नागपुर गुट (कमलकुमार शिवकिशन अग्रवाल): 44% हिस्सा।
मूल्यांकन: यह विलय लगभग बिलियन डॉलर (लगभग ₹85,000 करोड़) के मूल्यांकन पर हुआ है, जो भारतीय पैकेटबंद खाद्य उद्योग में सबसे बड़ा माना जा रहा है।
अन्य भागीदार: इस सौदे के साथ ही सिंगापुर की टेमासेक (Temasek) ने भी कंपनी में 10% हिस्सेदारी खरीदी है।
यह विलय दोनों गुटों के एफएमसीजी (FMCG) कारोबार को एक साथ लाता है, जिससे हल्दीराम भारत के पारंपरिक स्नैक्स बाजार में अपनी स्थिति और मजबूत कर सके।

हलदिराम ने अपने दिल्ली और नागपुर स्थित परिचालनों का एचएसएफपीएल में विलय करने का निर्णय किन कारकों के आधार पर लिया, और इससे कंपनी के मूल्यांकन और बाजार स्थिति पर क्या प्रभाव पड़ा है?
हलदिराम ने अपने दिल्ली और नागपुर स्थित संयंत्रों का हलदिराम स्नैक्स फूड प्राइवेट लिमिटेड (एचएसएफपीएल) में विलय करने का निर्णय संस्थागत पूंजी आकर्षित करने, प्रारंभिक सार्वजनिक पेशकश (आईपीओ) की तैयारी करने, परिचालन में तालमेल स्थापित करने, बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करने और ब्रांड को लेकर बनी अस्पष्टता को दूर करने जैसे रणनीतिक लक्ष्यों के लिए लिया था। इस विलय से कंपनी निवेशकों को आकर्षित करने वाली एक बड़े पैमाने की, सुव्यवस्थित इकाई के रूप में सामने आई। इस रणनीतिक एकीकरण के परिणामस्वरूप कंपनी का मूल्यांकन 10 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जिसे टेमासेक, अल्फा वेव ग्लोबल और आईएचसी के रणनीतिक निवेशों का समर्थन प्राप्त था। इससे हलदिराम की बाजार में पकड़ और विकास क्षमता, विशेष रूप से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में, और भी मजबूत हुई।

