जयकर मिश्र (फ़ौजी महाराज) राष्ट्र तक .नई दिल्ली ।
नाम में काशी, कर्म में कला ! बाबा विश्व नाथ की नगरी काशी में जन्मे और कर्म की नगरी दिल्ली में पले-बढ़े मंजू-ब्रजेश के राज कुमार काशी दुबे आज उन कलाकारों में से एक हैं जो भीड़ में अलग दिखते हैं – क्योंकि वो भीड़ का हिस्सा बनने की कोशिश ही नहीं करते।
‘उस्ताद बंटू’ के बंटू को जब आप पर्दे पर ट्रम्पेट बजाते देखते हैं, तो लगता है ये किरदार नहीं, एक ज़िंदगी है। शादी में बैंड बजाने वाले उस लड़के में काशी ने वाराणसी की जड़ों की ईमानदारी और दिल्ली की सड़कों की सच्चाई दोनों घोल दी है। इसी ऑथेंटिसिटी ने उन्हें ‘कार्बोरेटर’ जैसे इंडिपेंडेंट प्रोजेक्ट्स में लीड रोल दिलाए।
*24 दिसंबर 1999* को जन्मे काशी ने करियर की शुरुआत में एक बात ठान ली थी – “ब्रेक का इंतज़ार नहीं करना है, खुद ब्रेक बनना है।” वाराणसी की तंग गलियों में लोगों को सुनना, दिल्ली की भीड़ में चेहरे पढ़ना – यही उनकी एक्टिंग स्कूल रही। उन्होंने एक्टिंग, लेखन, थिएटर एजुकेशन और डिजिटल कंटेंट – हर माध्यम को कहानी कहने का औजार बना लिया।

2021 काशी के लिए टर्निंग पॉइंट था। उन्होंने ‘चर्चे, एन एम्प्टी स्पेस’ की नींव रखी। ये सिर्फ एक स्पेस नहीं था, ये उस सोच का नाम था जो मानती है कि कला और बातचीत से ही कम्युनिटी बनती है। आज वो स्टेज पर नए कलाकारों को गढ़ते थिएटर ट्रेनर हैं, और स्क्रीन के पीछे कॉर्पोरेट ब्रांड्स के लिए क्रिएटिव स्ट्रैटेजी भी बनाते हैं।
काशी सोशल मीडिया पर भी वही करते हैं जो वो असल जिंदगी में मानते हैं – रोज़मर्रा की छोटी-छोटी बातों में बड़ी कहानी ढूंढना। ट्रेंड फॉलो करने के बजाय वो जिंदगी को ऑब्ज़र्व करते हैं, और फिर उसे ऐसे पेश करते हैं कि आप खुद को उसमें देख लें।

26 साल की उम्र में काशी ने ये साबित कर दिया कि सफलता शोर नहीं मांगती, निरंतरता मांगती है। खुद पर शक, “सिस्टम में फिट होने” का दबाव और इंडस्ट्री की बंदिशें – सबको पीछे छोड़कर उन्होंने अपना रास्ता खुद बनाया।
निर्देशक अर्श जैन द्वारा निर्देशित फ़िल्म उस्ताद बंटू को गोवा में 2500 डॉलर का प्रथम फ़िल्म फ़ेस्टिवल अवार्ड मिला। यह फ़िल्म भारतीय सिनेमा के द्वारा नीदरलैंड रोडर डैम्प इंटरनेशनल फ़िल्म फ़ेस्टिवल में “उस्ताद बंटू “शामिल हुई जो जल्द ही भारतीय सिनेमा के पर्दे पर दिखेगी। इंटरनेशनल फ़िल्म फ़ेस्टिवल मैगज़ीन के पोस्टर व्याय काशी कुमार दुबे बने ,जिसके लिए अर्श जैन एवं उस्ताद बंटू के सभी कलाकार साथियों को “राष्ट्रीय हिंदी पत्रिका राष्ट्र समाज “एवं “राष्ट्र तक “पोर्टल की ओर से हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ
काशी कुमार दुबे आज के दौर के वो कहानीकार हैं जिनका मंत्र एक लाइन का है: “जो है उसी से शुरू करो। कहानी अपने आप बन जाएगी।”

* काशी कुमार दुबे
काशी में जन्मे, दिल्ली में पले-बढ़े। ‘उस्ताद बंटू’ और ‘कार्बोरेटर’ में लीड। संस्थापक: ‘चर्चे, एन एम्प्टी स्पेस’
* “ थिएटर ट्रेनर और क्रिएटिव स्ट्रैटेजिस्ट के तौर पर भी सक्रिय काशी के लिए सफलता का मतलब है – परफेक्शन नहीं, ऑथेंटिसिटी।”
उल्लेखनीय हैं निर्देशक अर्श जैन द्वारा निर्देशित फ़िल्म “उस्ताद बंटू “ को गोवा में 2500 डॉलर का प्रथम फ़िल्म फ़ेस्टिवल अवार्ड मिला। यह फ़िल्म भारतीय सिनेमा के द्वारा नीदरलैंड रोडर डैम्प इंटरनेशनल फ़िल्म फ़ेस्टिवल में “उस्ताद बंटू “शामिल हुई जो जल्द ही आप सभी को भारतीय सिनेमा के पर्दे पर दिखेगी। इस फ़िल्म को इंटरनेशनल फ़िल्म फ़ेस्टिवल मैगज़ीन के पोस्टर व्याय के रूप में काशी दुबे को सौभाग्य प्राप्त हुआ ,जिसके लिए अर्श जैन एवं उस्ताद बंटू के सभी कलाकार साथियों को “राष्ट्रीय हिंदी पत्रिका “राष्ट्र समाज “एवं “राष्ट्र तक “पोर्टल की ओर से हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ



