अखिल भारतीय अग्रवाल सम्मेलन के राष्ट्रीय अधिवेशन एवं नवनिर्वाचित राष्ट्रीय पदाधिकारियों के शपथ ग्रहण कार्यक्रम में विनीत कुमार लोहिया ने कहा कि महाराजा अग्रसेन जी की प्रेरणा से अग्रवाल समाज सेवा, सहयोग, सामाजिक समरसता और राष्ट्रहित के कार्यों में सदैव अग्रणी भूमिका निभाता रहा है।
“एक ईंट और एक रुपया” के मानवीय दर्शन को आत्मसात करते हुए समाज निरंतर शिक्षा, संस्कार, सेवा और जनकल्याण के विविध आयामों में उल्लेखनीय योगदान दे रहा है। विश्वास है कि नवनिर्वाचित कार्यकारिणी इस गौरवशाली परंपरा को नई ऊर्जा, नई चेतना और सेवाभावी संकल्पों के साथ और अधिक समृद्ध करेगी।
इसके साथ उन्होंने कहा कि समाज में एक ऐसा माहौल होना चाहिए जिससे लोकतंत्र मजबूत होगा, सामाजिक असमानताएं कम होंगी और राष्ट्र विकास के पथ पर आगे बढ़ेगा। शिक्षा को व्यक्ति निर्माण और चिकित्सा को जीवन रक्षा का माध्यम माना गया था। लेकिन स्वतंत्रता के लगभग आठ दशकों बाद स्थिति चिंताजनक प्रश्न खड़े करती है कि क्या ये दोनों क्षेत्र अपने मूल उद्देश्य से भटककर व्यवसाय और बाजार के अधीन नहीं हो गए हैं? आज शिक्षा और चिकित्सा दोनों क्षेत्रों में जो विसंगतियां दिखाई देती हैं, वे केवल व्यवस्थागत संकट नहीं बल्कि सामाजिक संकट का रूप ले चुकी हैं। एक ओर शिक्षा व्यवस्था परीक्षा, अंकों और प्रतिस्पर्धा की आर्थिक मशीन बन गई है, वहीं दूसरी ओर चिकित्सा सेवा लाभ-हानि के गणित में उलझती दिखाई देती है। इन दोनों क्षेत्रों की बढ़ती व्यावसायिकता ने आम आदमी को सबसे अधिक प्रभावित किया है। शिक्षा का मूल उद्देश्य केवल ज्ञान देना नहीं था। शिक्षा अब डिग्री, नौकरी और प्रतिस्पर्धा तक सीमित होती दिखाई देती है! शिक्षा और चिकित्सा को पुनः सेवा और राष्ट्र निर्माण के मूल उद्देश्य से जोड़ा जाए।
सरकार, समाज, नीति निर्माताओं और निजी क्षेत्र को मिलकर ऐसी व्यवस्था विकसित करनी होगी जिसमें कोई बच्चा आर्थिक कारणों से शिक्षा से वंचित न हो और कोई नागरिक उपचार के अभाव में पीड़ित न रहे। यही स्वतंत्र भारत की मूल भावना थी और यही भविष्य का मार्ग भी होना चाहिए।
