*1. शुरुआती जीवन और राजनीतिक सफर*
सज्जन कुमार का जन्म *28 सितंबर 1945* को दिल्ली में हुआ था। वे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता थे और दिल्ली की राजनीति में 1980-90 के दशक में बड़ा नाम था।
1980 में पहली बार वे *कांग्रेस* के टिकट पर *बाहरी दिल्ली* से लोकसभा सांसद बने। इसके बाद 1985, 1991 और 2004 में भी सांसद चुने गए। माना जाता था कि दिल्ली की सिख और ग्रामीण बेल्ट में उनकी अच्छी पकड़ थी।
कांग्रेस सरकार में वे *मंत्री* भी रहे। उन्हें “जमीनी नेता” कहा जाता था क्योंकि वो सीधे लोगों से मिलते थे।
2. 1984 के सिख विरोधी दंगे और नाम क्यों आया
31 अक्टूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री *इंदिरा गांधी* की उनके सिख अंगरक्षकों ने हत्या कर दी थी। इसके बाद दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में सिख समुदाय के खिलाफ हिंसा भड़क गई। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली में करीब 2800 सिख मारे गए।
इसी दौरान *पालम कॉलोनी, राजनगर पार्ट-1, जनकपुरी, विकासपुरी, सरस्वती विहार* जैसे इलाकों में सबसे ज्यादा हिंसा हुई।
सज्जन कुमार का नाम इन इलाकों में दंगों का “नेतृत्व” करने के आरोप में आया। पीड़ित परिवारों ने कहा कि 1-2 नवंबर 1984 को उनके घरों को जलाया गया, लूटा गया और कई लोगों को मार दिया गया।
3. लंबी कानूनी लड़ाई
ये केस 30 साल से ज्यादा चला।
2013: दिल्ली की निचली अदालत ने पालम कॉलोनी केस में सज्जन कुमार को बरी कर दिया। कोर्ट ने कहा सबूत कमजोर हैं।
दिसंबर 2018: दिल्ली हाईकोर्ट ने निचली अदालत का फैसला पलट दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि ये “सामूहिक हिंसा” थी और सज्जन कुमार ने भीड़ को उकसाया। उन्हें *उम्रकैद* की सजा सुनाई गई। कोर्ट ने कहा – “राजनीतिक अपराधियों को सजा मिलनी चाहिए”।
इसके बाद सज्जन कुमार ने सरेंडर किया और तिहाड़ जेल चले गए।
2025: राउज एवेन्यू कोर्ट ने सरस्वती विहार केस में भी उन्हें उम्रकैद सुनाई। आरोप था कि उन्होंने 1 नवंबर 1984 को जसवंत सिंह और उनके बेटे तरुंदीप सिंह की हत्या करने वाली भीड़ का नेतृत्व किया।
जनवरी 2026*: राउज एवेन्यू कोर्ट ने जनकपुरी-विकासपुरी वाले एक अन्य केस में उन्हें *बरी* कर दिया। कोर्ट ने कहा उस केस में सबूत नाकाफी थे।
कुल मिलाकर 3 केस थे – 2 में उम्रकैद, 1 में बरी।
4. जेल जीवन और स्वास्थ्य
2018 से 2026 तक सज्जन कुमार *तिहाड़ जेल* में बंद थे। जेल सूत्रों के मुताबिक उन्हें *हाई ब्लड प्रेशर और पार्किंसन* की बीमारी थी। उम्र 80 साल हो चुकी थी।
जेल में रहते हुए भी उनके समर्थक उनसे मिलने आते थे। कांग्रेस में उनके कुछ पुराने साथी उन्हें “फंसाया गया नेता” कहते थे, जबकि सिख संगठन उन्हें “दंगों का दोषी” मानते थे।
5. 20 अगस्त 2026 – निधन
20 अगस्त 2026 गुरुवार की सुबह तिहाड़ जेल में सज्जन कुमार की तबीयत अचानक बिगड़ गई।
सुबह करीब 11 बजे उन्हें VMMC-सफदरजंग अस्पताल लाया गया। अस्पताल ने बयान दिया कि “तमाम कोशिशों के बावजूद दोपहर 12:30 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया गया”।
निधन के समय उनकी उम्र 80 साल थी। मौत की वजह आधिकारिक तौर पर “बीमारी” बताई गई।
निधन की खबर के बाद बेटे जग प्रवेश कुमार और परिवार अस्पताल पहुंचे।
6. निधन के बाद प्रतिक्रियाएं
सिख पीड़ित परिवार: Live Hindustan से बात करते हुए 1984 दंगों में अपने 11 परिवार के सदस्यों को खोने वाली *गंगा कौर* ने कहा – “अगर फांसी होती तो ज्यादा सुकून मिलता। प्राकृतिक मौत से इंसाफ जैसा नहीं लगा”।
राजनीतिक प्रतिक्रिया: कांग्रेस ने आधिकारिक शोक नहीं जताया। कई नेताओं ने कहा “कानून अपना काम कर चुका”। भाजपा और सिख संगठनों ने कहा “देर से ही सही, न्याय हुआ”।
7. विवाद और बहस
सज्जन कुमार का नाम आज भी 2 ध्रुवों में बंटा है:
आरोप: पीड़ित पक्ष कहता है कि वो 1984 दंगों के मुख्य साजिशकर्ताओं में से थे। हाईकोर्ट ने भी माना कि सत्ता के दुरुपयोग से हिंसा हुई।
*बचाव*: समर्थक कहते हैं कि 30 साल बाद गवाहों के बयानों पर सजा हुई। कुछ का कहना है कि उन्हें “बलि का बकरा” बनाया गया।
8. विरासत
सज्जन कुमार का जीवन 3 बातों के लिए याद रखा जाएगा:
1. 1980-2004 तक दिल्ली कांग्रेस के बड़े चेहरे
2. 1984 दंगों के सबसे चर्चित आरोपी* जिनको उम्रकैद हुई
3. 8 साल तिहाड़ में बिताने के बाद जेल में ही निधन
1984 दंगों के केस में सजा पाने वाले वो सबसे बड़े राजनीतिक नेता थे।
निष्कर्ष
सज्जन कुमार का निधन एक युग के अंत जैसा है। 1984 दंगों के घाव आज भी सिख समुदाय में ताजे हैं। कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया, जेल में सजा भी काटी, और अंत जेल में ही हुआ।
इतिहास उन्हें “नेता” के रूप में भी याद करेगा और “आरोपी” के रूप में भी।
—
- समय और स्थान: 20 अगस्त 2026 को दोपहर 12:30 बजे, सफदरजंग अस्पताल, नई दिल्ली।
- अस्पताल का बयान: उन्हें सुबह करीब 11 बजे बेहोशी की हालत में तिहाड़ जेल से अस्पताल लाया गया था, जहां इलाज के दौरान उनका निधन हो गया।
- स्वास्थ्य कारण: वह लंबे समय से बीमार थे और उन्हें हाई ब्लड प्रेशर तथा पार्किंसंस जैसी बीमारियां थीं।
- कानूनी पृष्ठभूमि: वह 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े मामलों में तिहाड़ जेल में उम्रकैद की सजा
