भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी लगातार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार की नीतियों की तीखी आलोचना करते रहे हैं। स्वामी ने मोदी सरकार पर आर्थिक, विदेशी, और सुरक्षा मामलों को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए हैं, जिनका ब्यौरा नीचे दिया गया है:
सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा मोदी पर मुख्य आरोप:
- आर्थिक मोर्चे पर विफलता: स्वामी ने आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री मोदी को मैक्रोइकॉनॉमिक्स (समष्टि अर्थशास्त्र) का कोई ज्ञान नहीं है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार की गलत नीतियों के कारण देश की जीडीपी में बड़ी गिरावट आई, और उन्होंने 2026 के बजट को भी “जीरो” बताया।
- चीन के साथ नरम रुख और झूठ: स्वामी ने आरोप लगाया है कि 2020-22 के दौरान चीन ने भारतीय क्षेत्र में कब्जा किया, लेकिन पीएम मोदी ने “कोई नहीं आया” कहकर देश से झूठ बोला। उन्होंने पीएम मोदी पर चीन के सामने झुकने और सीमा मुद्दे पर कमजोरी दिखाने का आरोप लगाया।
- रामसेतु को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने में बाधा: स्वामी ने दावा किया है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा याचिका स्वीकार किए जाने के बावजूद, मोदी अपनी ईर्ष्या के कारण रामसेतु को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने में बाधा डाल रहे हैं।
- राजनीतिक नेतृत्व पर सवाल: स्वामी ने पीएम मोदी के नेतृत्व शैली को “तानाशाही” वाला बताते हुए, उन्हें 2024 के बाद सत्ता में नहीं रहने की सलाह दी थी और उन्हें भाजपा के लिए एक “संभावित खतरा” बताया।
- व्यक्तिगत और गंभीर आरोप (2025-26): स्वामी ने हाल ही में ‘इप्सटीन फाइल्स’ (Epstein Files) का जिक्र करते हुए पीएम मोदी पर गंभीर व्यक्तिगत आरोप लगाए हैं और उन्होंने पीएम मोदी से अपने पद से इस्तीफा देने की मांग की है।
सच्चाई और स्थिति:
- स्वामी का रुख: सुब्रमण्यम स्वामी का कहना है कि वह बीजेपी में तब तक बने रहेंगे जब तक पार्टी उन्हें बाहर नहीं निकालती, लेकिन वे मोदी सरकार की गलत नीतियों की आलोचना जारी रखेंगे।
- आरोपों की प्रकृति: स्वामी द्वारा लगाए गए कई आरोप उनके निजी सोशल मीडिया हैंडल (X) और साक्षात्कारों के माध्यम से सामने आते हैं। इन आरोपों पर बीजेपी या पीएमओ की ओर से सीधे तौर पर अक्सर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी जाती है।
- पार्टी के भीतर: भाजपा ने स्वामी के खिलाफ कोई कड़ा एक्शन नहीं लिया है, लेकिन उनके इन बयानों से पार्टी के भीतर असहजता की स्थिति रहती है।
नोट: ये आरोप सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा लगाए गए हैं। इनमें से अधिकांश मामलों में कोई आधिकारिक न्यायिक जांच या पुष्टि नहीं हुई है।

