नासिक के बाबा अशोक खैरात की पुलिस कस्टडी 1 अप्रैल तक बढ़ा दी गई है. कोर्ट में पीड़ितों के वकीलों ने दलील दी कि आरोपी जांच में सहयोग नहीं कर रहा है और उसने महिलाओं के यौन शोषण के साथ आर्थिक धोखाधड़ी भी की है. एसआईटी को खैरात के मोबाइल से महत्वपूर्ण डिजिटल डेटा मिला है, जिसमें कई रसूखदार लोगों के नाम कोडवर्ड में छिपे होने का संदेह है. अब तक उस पर 10 मामले दर्ज हो चुके हैं.
महाराष्ट्र,नासिक के कुख्यात भोंदूबाबा अशोक खैरात मामले में एक ऐसा मोड़ आ गया है जिसने पूरे शहर के रसूखदारों की नींद उड़ा दी है. पुलिस जांच में यह बात साफ हो गई है कि खैरात के मोबाइल में कई सफेदपोश और रसूखदार चेहरों के नाम दर्ज हैं, लेकिन इसके बावजूद उन पर तुरंत एक्शन लेना पुलिस के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है. ऐसा इसलिए क्योंकि उसके मोबाइल का पासवर्ड डिकोर्ड नहीं हो पा रही है. उधर, पीड़िता के वकीलों ने आरोपी की क्रूरता और जांच में उसके असहयोग को लेकर परतें खोल दी. वकील एडवोकेट एम.वाई. काले ने कोर्ट को बताया कि यह केवल अंधविश्वास का मामला नहीं है बल्कि सैकड़ों महिलाओं के जीवन को बर्बाद करने वाला एक सुनियोजित षड्यंत्र है. उन्होंने दलील दी कि खरात न केवल महिलाओं का शारीरिक और आर्थिक शोषण करता था बल्कि उन्हें दिव्य शक्तियों और नरबळी (मानव बलि) जैसे डरावने कृत्यों का डर दिखाकर चुप रहने पर मजबूर करता था. कोर्ट में यह भी बताया गया कि खरात जांच दल (SIT) को गुमराह कर रहा है और अपने मोबाइल और लैपटॉप में छिपे डिजिटल सबूतों को डिकोड करने में बाधा डाल रहा है. नासिक जिला अदालत ने इस बाबा की हिरासत 1 अप्रैल तक बढ़ा दी है.
जांच के दौरान जो सबसे चौंकाने वाला खुलासा हुआ है वह खैरात के मोबाइल डेटा से जुड़ा है. पुलिस को संदेह है कि इस भोंदूबाबा ने अपने मोबाइल में कई प्रभावशाली राजनीतिक हस्तियों और सफेदपोश लोगों के नंबर कोडवर्ड या फर्जी नामों से सेव कर रखे हैं. यह डिजिटल डेटा इस पूरे मामले का सबसे बड़ा राज खोल सकता है लेकिन आरोपी की चुप्पी जांच में रोड़ा बनी हुई है. कोर्ट को बताया गया कि पीड़ितों को पीने के पानी में क्या नशीला पदार्थ मिलाकर दिया जाता था इसका खुलासा भी अभी होना बाकी है. जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, नई पीड़ित महिलाएं सामने आ रही हैं, जिससे इस अपराध का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है.



